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Home World मस्कट में आज आमने-सामने होंगे अमेरिका-ईरान: ‘परमाणु जंग’ टालने पर महामंथन, क्या सुधरेंगे हालात?

मस्कट में आज आमने-सामने होंगे अमेरिका-ईरान: ‘परमाणु जंग’ टालने पर महामंथन, क्या सुधरेंगे हालात?

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मस्कट में आज आमने-सामने होंगे अमेरिका-ईरान: ‘परमाणु जंग’ टालने पर महामंथन, क्या सुधरेंगे हालात?
मस्कट में अमेरिका-ईरान: परमाणु महा-मंथन आज.

US Iran Nuclear Talks: अमेरिका और ईरान के बीच की कड़वाहट क्या अब कम होने वाली है? ओमान की राजधानी मस्कट में शुक्रवार को एक बेहद अहम मीटिंग होने जा रही है. इस मीटिंग के लिए अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी मस्कट पहुंच चुके हैं.

सबसे बड़ी बात ये है कि जून में जब अमेरिका ने इजराइल के साथ मिलकर ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमले किए थे, उसके बाद दोनों देशों के बड़े अधिकारियों के बीच यह पहली आमने-सामने (Face-to-Face) की मुलाकात होगी.

ईरान बोला- हम सीरियस हैं, अमेरिका भी जिम्मेदारी दिखाए

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने साफ किया है कि वे इस बातचीत में पूरी ताकत के साथ उतरेंगे. उनका मकसद एक ऐसा समझौता करना है जो दोनों पक्षों को मंजूर हो और सम्मानजनक हो. बघाई के अनुसार, अब अमेरिका को भी ‘हकीकत और जिम्मेदारी’ के साथ इस बातचीत में हिस्सा लेना चाहिए. हालांकि, दोनों देशों के बीच इस बात को लेकर अभी भी खींचतान है कि चर्चा किस विषय पर होगी.

एजेंडे पर झगड़ा: अमेरिका चाहता है सब पर बात हो, ईरान को सिर्फ न्यूक्लियर से मतलब

बातचीत की मेज पर बैठने से पहले ही दोनों देशों की अपनी-अपनी शर्तें हैं:

अमेरिका का स्टैंड: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के अनुसार, कोई भी बातचीत तभी सार्थक है जब उसमें ईरान के मिसाइल प्रोग्राम, आतंकी संगठनों को उसकी मदद और ईरान में लोगों के साथ हो रहे बर्ताव पर भी चर्चा हो.

ईरान का स्टैंड: वहीं, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अपने विदेश मंत्रालय को ‘फेयर’ बातचीत करने को कहा है, लेकिन ईरान का कहना है कि वे सिर्फ न्यूक्लियर प्रोग्राम और उनके ऊपर लगे आर्थिक प्रतिबंध (Sanctions) हटाने पर ही बात करेंगे. वे मिसाइल और क्षेत्रीय मुद्दों को इस बातचीत से दूर रखना चाहते हैं.

ओमान क्यों बना वेन्यू? 9 देशों ने लगाई थी गुहार

पहले चर्चा थी कि ये मीटिंग तुर्की के इस्तांबुल में होगी. लेकिन ईरान ने इसे ओमान में करने का प्रस्ताव दिया. एक्सियोस (Axios) की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआत में अमेरिका इसे टालना चाहता था, लेकिन मिडिल ईस्ट के कम से कम 9 देशों ने व्हाइट हाउस से अपील की कि इस मीटिंग को रद्द न किया जाए. ओमान के एक्सपर्ट खल्फान अल-तौकी के अनुसार, ओमान हमेशा से एक भरोसेमंद बिचौलिया रहा है जहाँ ऐसी गुप्त और संवेदनशील बातें शांति से हो पाती हैं.

पीछे की कहानी: 12 दिन की जंग और इंटरनल बवाल

इस मीटिंग का बैकग्राउंड काफी तनावपूर्ण है. जून 2025 में ईरान और इजराइल के बीच 12 दिन की जंग हुई थी, जिसमें अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर बमबारी की थी. इसके तुरंत बाद, दिसंबर 2025 के आखिर में ईरान के अंदर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए, जिन्हें सरकार ने बेरहमी से दबा दिया. ये विरोध प्रदर्शन शुरू में आर्थिक संकट और बढ़ती महंगाई की वजह से शुरू हुए थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन प्रदर्शनों में लाखों लोगों ने हिस्सा लिया, जिसे दबाने के लिए सरकार ने इंटरनेट बंद किया और सुरक्षा बलों का इस्तेमाल किया. 

मानवाधिकार संगठनों और सरकारी आंकड़ों के बीच मौतों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे हैं (सरकारी आंकड़ा करीब 3,117 मौतें बताता है) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया था, जबकि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इसके लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए ट्रंप को ‘अपराधी’ कहा था.

न्यूक्लियर वेपन का डर और मिलिट्री टेंशन

वेस्टर्न देशों को डर है कि ईरान बहुत तेजी से यूरेनियम को समृद्ध (Enrich) कर रहा है, जिसका इस्तेमाल परमाणु बम बनाने में हो सकता है. हालांकि, ईरान की परमाणु ऊर्जा संस्था के चीफ मोहम्मद इस्लामी का कहना है कि उनका प्रोग्राम सिर्फ शांतिपूर्ण कामों के लिए है और उन्हें परमाणु हथियार की जरूरत नहीं है. वहीं, ईरान के एक और अधिकारी अली बघेरी कनी के अनुसार, ईरान अपना समृद्ध यूरेनियम किसी दूसरे देश को नहीं भेजेगा.

तनाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अभी हाल ही में (मंगलवार को) अमेरिकी लड़ाकू विमान ने ईरान के एक Shahed-139 ड्रोन को मार गिराया था, जो अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर की तरफ बढ़ रहा था. ईरान भी चेतावनी दे चुका है कि अगर अमेरिका ने कोई एक्शन लिया, तो मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी बेस उनके निशाने पर होंगे.

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