US आर्मी के ‘पैसिफिक कमांड’ से हटा ‘इंडो’ शब्द, ट्रंप प्रशासन ने किया बदलाव, भारत पर क्या असर?

US Army Indo Pacific Command: अमेरिका ने यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) का नाम बदलकर फिर से यूएस पैसिफिक कमांड (USPACOM) कर दिया है. जानिए इस फैसले का भारत, क्वाड और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर क्या असर पड़ सकता है?

By Anant Narayan Shukla | June 17, 2026 11:55 AM

US Indo Pacific Command: अमेरिका ने अपने सबसे महत्वपूर्ण सैन्य कमांडों में से एक के नाम को लेकर बड़ा फैसला लिया है. अमेरिकी युद्ध विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ वॉर) ने घोषणा की है कि अब अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) को फिर से उसके पुराने नाम अमेरिकी पैसिफिक कमांड (USPACOM) के रूप में जाना जाएगा. यह वही नाम है जिसके तहत यह सैन्य कमांड सात दशकों से भी अधिक समय तक काम करता रहा था.

फिर पुरानी पहचान की वापसी

साल 2018 में तत्कालीन अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने अमेरिकी पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड कर दिया था. उस समय वॉशिंगटन का तर्क था कि हिंद महासागर क्षेत्र का रणनीतिक महत्व तेजी से बढ़ रहा है और उसकी सुरक्षा चुनौतियां प्रशांत क्षेत्र से गहराई से जुड़ती जा रही हैं.

अब अमेरिकी युद्ध विभाग ने इस बदलाव को वापस लेते हुए कहा है कि कमांड के मूल नाम को बहाल करने का उद्देश्य उसकी ऐतिहासिक पहचान और संस्थागत विरासत का सम्मान करना है. विभाग के अनुसार, ‘USPACOM नाम की बहाली कमांड की गहरी ऐतिहासिक जड़ों का सम्मान करती है और प्रशांत क्षेत्र में सेवा देने वाले सभी सैन्यकर्मियों के बीच गर्व तथा सामूहिक भावना को मजबूत करती है.’

नाम बदला, लेकिन क्षेत्र और जिम्मेदारियां वही रहेंगी

अमेरिकी युद्ध विभाग ने साफ किया है कि नाम बदलने से कमान की जिम्मेदारियों, रणनीतिक मिशन या भौगोलिक दायरे में कोई बदलाव नहीं होगा.

विभाग के अनुसार, USPACOM का संचालन क्षेत्र पहले की तरह अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला रहेगा. इसमें प्रशांत महासागर, हिंद महासागर का बड़ा हिस्सा, पूर्वी एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण एशिया के कुछ क्षेत्र शामिल हैं.

कमान आगे भी रक्षा तैयारियों, सैन्य अभ्यासों, साझेदार देशों के साथ सहयोग, समुद्री सुरक्षा अभियानों, आपदा राहत और संभावित संकटों की योजना बनाने जैसे कार्य करती रहेगी.

विभाग ने यह भी कहा कि क्षेत्रीय सहयोगियों और साझेदार देशों के साथ मिलकर ‘स्वतंत्र और खुला थिएटर बनाए रखने’ की उसकी प्रतिबद्धता पहले की तरह जारी रहेगी.

क्यों अहम है यह सैन्य कमांड?

अमेरिकी पैसिफिक कमांड की स्थापना 1 जनवरी 1947 को राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन के कार्यकाल में हुई थी. यह अमेरिकी सेना की सबसे पुरानी और सबसे बड़े संयुक्त लड़ाकू कमांडों में से एक माना जाता है. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद एशिया में सुरक्षा ढांचे को आकार देने में इस कमांड की महत्वपूर्ण भूमिका रही. कोरियाई युद्ध और वियतनाम युद्ध जैसे बड़े सैन्य अभियानों के दौरान भी इसने संयुक्त सैन्य संचालन का नेतृत्व और समन्वय किया. इसके अलावा मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में भी इसकी सक्रिय भूमिका रही है.

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हवाई से संचालित होता है विशाल रणनीतिक क्षेत्र

नाम बदलने से पहले तक USINDOPACOM अमेरिका का प्रमुख सैन्य कमांड पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सैन्य अभियानों, रणनीतिक योजना, रक्षा साझेदारियों और क्षेत्रीय सुरक्षा मामलों की जिम्मेदारी संभाल रहा था.

हवाई स्थित मुख्यालय से संचालित यह कमांड प्रशांत महासागर, हिंद महासागर के बड़े हिस्से, पूर्वी एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण एशिया के कुछ क्षेत्रों तक फैले विशाल भूभाग की निगरानी करता है.

इसके कार्यक्षेत्र में प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखना, रक्षा तैयारियों को मजबूत करना, साझेदार देशों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास, समुद्री सुरक्षा अभियान, आपदा राहत कार्य और आपातकालीन रणनीतिक योजना शामिल हैं.