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Home World बगदाद दूतावास पर हमले के बाद US का अपने नागरिकों को निर्देश- अमेरिकी तुरंत छोड़ दें इराक

बगदाद दूतावास पर हमले के बाद US का अपने नागरिकों को निर्देश- अमेरिकी तुरंत छोड़ दें इराक

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बगदाद दूतावास पर हमले के बाद US का अपने नागरिकों को निर्देश- अमेरिकी तुरंत छोड़ दें इराक
अमेरिकी दूतावास पर शुक्रवार को हमला हुआ था.

US Iran War: ईरान बनाम इजरायल-अमेरिका युद्ध का दायरा पूरे मिडिल ईस्ट में फैल रहा है. अमेरिका के बगदाद स्थित दूतावास ने शनिवार को एक अपडेटेड सुरक्षा अलर्ट जारी करते हुए अपने नागरिकों से तुरंत इराक छोड़ने की अपील की है. यह चेतावनी दूतावास पर शनिवार रात में हुए मिसाइल हमले के बाद जारी की गई. यह हमला अमेरिकी दूतावास परिसर के अंदर बने हैलीपैड पर हुआ. इस हमले की जिम्मेदारी फिलहाल किसी ने नहीं ली है. यह हमला उस कार्रवाई के तुरंत बाद हुआ है, जिसमें बगदाद में ईरान समर्थित शिया मुस्लिम मिलिशिया के तीन सदस्यों की मौत हुई थी.

बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने कहा, ‘जो अमेरिकी नागरिक अभी भी इराक में रहने का विकल्प चुन रहे हैं, उन्हें ईरान समर्थित आतंकवादी मिलिशिया समूहों से उत्पन्न गंभीर खतरे को देखते हुए अपने फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए.’ दूतावास ने अमेरिकी नागरिकों को सख्त हिदायत दी है कि वे बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास और एरबिल स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास दोनों से दूर रहें.

इराक से बाहर कैसे बाहर निकलें?

एंबेसी ने कहा, इराक से फिलहाल कमर्शियल उड़ानें संचालित नहीं हो रही हैं, इसलिए अमेरिकी नागरिकों को ज़मीन के रास्ते जॉर्डन, कुवैत, सऊदी अरब और तुर्की के जरिए निकलने पर विचार करने की सलाह है. अधिकतर बॉर्डर क्रॉसिंग फिलहाल खुले हैं, लेकिन सुरक्षा हालात के कारण इन्हें कभी भी अचानक बंद किया जा सकता है.

जॉर्डन के क्वीन आलिया इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सीमित उड़ानें चल रही हैं, हालांकि उनमें बाधा आ सकती है और वहां पहुंचने के लिए अमेरिकी नागरिकों को पहले से ई-वीजा लेना होगा. वहीं कुवैत से फिलहाल उड़ानें रॉकेट और ड्रोन हमलों के खतरे के कारण बंद हैं, हालांकि कुवैत पहुंचने पर अमेरिकी नागरिक वैध पासपोर्ट के साथ वीजा ऑन अराइवल प्राप्त कर सकते हैं और वहां से सऊदी अरब के लिए भूमि मार्ग खुले हैं, लेकिन सीमाएं बिना पूर्व सूचना के बंद या खुल सकती हैं.

इराक में अमेरिकी दूतावास की एडवाइजरी

दूतावास की एडवाइजरी मूल रूप से अरबी में जारी की गई थी. इसमें कहा गया है, ‘ईरान समर्थित आतंकवादी मिलिशिया ने कई बार मध्य बगदाद के इंटरनेशनल जोन पर हमले किए हैं. इंटरनेशनल जोन सीमित अपवादों को छोड़कर बंद है. एरबिल इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के आसपास भी कई बार हमले हुए हैं. इराकी हवाई क्षेत्र में रॉकेट, ड्रोन और मोर्टार के खतरे को देखते हुए बगदाद स्थित दूतावास या एरबिल स्थित वाणिज्य दूतावास आने की कोशिश न करें.’

बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास परिसर दुनिया के सबसे बड़े अमेरिकी कूटनीतिक परिसरों में से एक है. यह एंबेसी शहर के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाके ग्रीन जोन में स्थित है. इसे पहले भी कई बार ईरान समर्थित मिलिशिया द्वारा रॉकेट और ड्रोन हमलों का निशाना बनाया जा चुका है.

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शनिवार को हुए हमले के कई वीडियोज सामने आए, जिनमें दूतावास के अंदर से घना धुआं उठता हुआ दिखाई दिया. हालांकि इस हमले में किसी के मारे जाने की सूचना नहीं आई.  सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेरकर मामले की जांच शुरू कर दी है.

https://twitter.com/FapeFop90614/status/2032703211845595321

यह घटना, इराकी संगठन इराकी इस्लामिक रेजिस्टेंस ने अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियों के कर्मियों के बारे में जानकारी देने पर 150 मिलियन इराकी दीनार (95 लाख रुपये) इनाम घोषित करने के बाद हुई. यह इनाम इराकियों और वहां रह रहे विदेशी नागरिकों के लिए भी है. ईराक में शुक्रवार को एक एयर रिफ्यूलिंग अमेरिकी विमान KC-135 गिर गया. इसे गिराना का दावा भी इराक के संगठन ने किया था. हालांकि, अमेरिका ने कहा था कि उसका विमान तकनीकी कारण से गिरा, जिसमें 6 यूएस सैनिकों की मौत हो गई.

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इराक में मिलिशिया के हमले बढ़े

शुक्रवार को ही अमेरिकी दूतावास ने इराक के लिए लेवल-4 सुरक्षा चेतावनी दोबारा जारी की थी. इसमें कहा गया था कि ईरान और उससे जुड़े मिलिशिया समूह पहले भी अमेरिकी नागरिकों, हितों और बुनियादी ढांचे पर हमले कर चुके हैं और भविष्य में भी उन्हें निशाना बना सकते हैं. ईरान और अमेरिका-इजरायल के संयुक्त मोर्चे के बीच जारी युद्ध अब पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र में तेजी से फैलता जा रहा है. पिछले कुछ दिनों में इराक में शिया मिलिशिया समूहों द्वारा अमेरिकी हितों पर हमलों की संख्या तेजी से बढ़ी है.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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