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Home World US का प्लान: खाड़ी देशों में तोड़-फोड़ का हर्जाना भरेगा ईरान, बांटी जाएगी फ्रीज की हुईं ईरानी संपत्तियां

US का प्लान: खाड़ी देशों में तोड़-फोड़ का हर्जाना भरेगा ईरान, बांटी जाएगी फ्रीज की हुईं ईरानी संपत्तियां

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US का प्लान: खाड़ी देशों में तोड़-फोड़ का हर्जाना भरेगा ईरान, बांटी जाएगी फ्रीज की हुईं ईरानी संपत्तियां
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों पर हमले किए थे.

US Iranian Assets Gulf Countries: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत अभी दूर दिखाई दे रहे हैं. संघर्षविराम लागू होने के बावजूद दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियां जारी हैं. इसी बीच एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ईरानी संपत्तियों का इस्तेमाल अपने खाड़ी सहयोगियों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए करने की संभावना पर विचार कर रहा है. अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट के इस प्लान से मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ सकता है, क्योंकि ईरान ने अपनी जब्त संपत्ति को डिफ्रीज करना, अमेरिका के साथ किसी भी संभावित डील का अहम मुद्दा बताया है.

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट ने एक सूत्र के हवाले से बताया कि प्रस्ताव के तहत; केवल पहले हुए नुकसान का मुआवजा ही नहीं, बल्कि भविष्य में संभावित हमलों से होने वाले नुकसान की भरपाई को भी इन्हीं फ्रीज ईरानी एसेट्स से करने की भी योजना बना रहा है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन ईरानी संपत्तियों को इस योजना में शामिल किया जा सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि चर्चा केवल अमेरिका द्वारा फ्रीज की गई संपत्तियों तक सीमित नहीं दिखती.

किन ईरानी संपत्तियों पर है नजर?

सूत्र के अनुसार, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने अधिकारियों को यह आकलन करने का निर्देश दिया है कि खाड़ी देशों में ईरान से जुड़े हमलों के कारण अब तक कितना नुकसान हुआ है. साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या ईरानी संपत्तियों का उपयोग उन क्षतियों की भरपाई के लिए किया जा सकता है.

विश्लेषकों का मानना है कि अगर, ऐसा कदम उठाया जाता है तो वॉशिंगटन और तेहरान के बीच पहले से चल रही कूटनीतिक वार्ताओं पर इसका असर पड़ सकता है. ईरान लंबे समय से विदेशों में रोकी गई अपनी लगभग 24 अरब डॉलर की संपत्तियों को मुक्त करने की मांग करता रहा है.

संघर्ष-विराम के बावजूद जारी हैं हमले

यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब संघर्ष-विराम लागू होने के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई जारी है. बीते शनिवार तड़के अमेरिकी बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित गोरुक और केश्म द्वीप पर ईरानी तटीय रडार प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक यह कार्रवाई उन ईरानी ड्रोन को रोकने के बाद की गई, जिन्हें समुद्री यातायात के लिए खतरा माना गया था.

इसके जवाब में ईरान ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की दिशा में मिसाइलें दागीं. ईरान ने 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष से पहले ही कहा था कि अगर उसके ऊपर हमला हुआ, तो वह खाड़ी देशों में अमेरिकी हितों को निशाना बनाएगा. 8 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर से पहले ईरान ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, जॉर्डन समेत अन्य खाड़ी देशों पर जवाबी हमला किया था.

पाकिस्तान निभा रहा मध्यस्थ की भूमिका

सैन्य तनाव के बावजूद कूटनीतिक प्रयास जारी हैं. इस प्रक्रिया में पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में उभरकर सामने आया है. पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी शनिवार को तेहरान पहुंचे. ईरानी मीडिया के अनुसार वह पाकिस्तान की सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व की ओर से ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के लिए विशेष संदेश लेकर गए थे.  वहीं, लेबनानी सेना प्रमुख जनरल रुडोल्फ हायकल पाकिस्तान सेना प्रमुख के निमंत्रण पर पाकिस्तान पहुंचे. ये दौरे ऐसे समय हुए हैं, जब दोनों पक्षों- ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की रफ्तार धीमी पड़ने की खबरें सामने आईं हैं.

ईरान की प्रमुख मांगें क्या हैं?

रिपोर्टों के अनुसार ईरान अब भी कई अहम मुद्दों पर रियायत चाहता है. इनमें विदेशों में रोकी गई संपत्तियों तक पहुंच, तेल निर्यात और बंदरगाहों पर लगे प्रतिबंधों में राहत तथा होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले समुद्री मार्गों पर अधिक प्रभाव शामिल हैं. ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार मोहसिन रेजाई  ने साफ कहा था कि अमेरिका द्वारा फ्रीज किए गए 24 अरब डॉलर की संपत्तियों की रिहाई, किसी भी संभावित शांति समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी.

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लेबनान मोर्चे पर भी जारी है हिंसा

तनाव केवल खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं है. लेबनान में भी संघर्षविराम के बावजूद हिंसा जारी है. लेबनानी सेना के अनुसार दक्षिणी लेबनान में एक सैन्य वाहन पर हुए इजरायली हमले में सेना के तीन सदस्य मारे गए, जिनमें दो अधिकारी शामिल थे. लेबनान का मोर्चा भी अमेरिका-ईरान कूटनीति से जुड़ा है. तेहरान ने वॉशिंगटन के साथ वार्ता में प्रगति को इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्षविराम से जोड़ा है, जबकि इजरायल ने संकेत दिए हैं कि वह अपने सैन्य अभियान जारी रखेगा.

शांति समझौते की राह अब भी कठिन

मध्य पूर्व में जारी घटनाक्रम से ऐसा लग रहा है कि मौजूदा संघर्षविराम को स्थायी शांति समझौते में बदलना आसान नहीं होगा. एक ओर सैन्य टकराव जारी है, तो दूसरी ओर संपत्तियों, प्रतिबंधों और सुरक्षा गारंटी जैसे मुद्दों पर मतभेद अब भी बने हुए हैं.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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