[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home World हमारे देश पर कब्जा करने का कोई अधिकार नहीं… डोनाल्ड ट्रंप को इस देश से मिली सीधी चेतावनी

हमारे देश पर कब्जा करने का कोई अधिकार नहीं… डोनाल्ड ट्रंप को इस देश से मिली सीधी चेतावनी

0
हमारे देश पर कब्जा करने का कोई अधिकार नहीं… डोनाल्ड ट्रंप को इस देश से मिली सीधी चेतावनी
डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं ने कहा- ग्रीनलैंड पर कब्जा नहीं कर सकता अमेरिका.

US cannot seize Greenland: डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच पहले से ही संवेदनशील भू-राजनीतिक स्थिति अधिक चर्चा में आ गई है. अमेरिका की ओर से ग्रीनलैंड को लेकर एक नया कदम उठाया गया, जिसमें उसकी रणनीतिक और खनिज संसाधनों से भरपूर इस आर्कटिक द्वीप को लेकर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिलचस्पी बनी हुई है. हालांकि, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेतृत्व ने एक बार फिर साफ शब्दों में यह संदेश दे दिया है कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता और किसी भी देश को उस पर कब्जे का अधिकार नहीं है.

सोमवार को डेनमार्क और ग्रीनलैंड के शीर्ष नेताओं ने संयुक्त रूप से कहा कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका का कब्जा असंभव है और उसकी क्षेत्रीय अखंडता का हर हाल में सम्मान किया जाना चाहिए. यह प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड के लिए एक विशेष दूत नियुक्त किए जाने की घोषणा के बाद सामने आई है. ट्रंप ने रविवार को लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री को इस पद पर नामित किया, जिसके बाद डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को लेकर वाशिंगटन की मंशा पर फिर सवाल खड़े हो गए. डेनमार्क नाटो का सदस्य और अमेरिका का सहयोगी देश है. वह ट्रंप के इस फैसले से असहज नजर आया. डेनमार्क के विदेश मंत्री ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में कहा कि वह इस मामले पर अमेरिकी राजदूत को तलब करने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि वाशिंगटन से स्पष्टीकरण मांगा जा सके.

किसी भी तर्क से ग्रीनलैंड नहीं दिया जा सकता

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने एक साझा बयान जारी कर कहा कि यह मुद्दा नया नहीं है और वे इसे पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं. दोनों नेताओं ने कहा कि राष्ट्रीय सीमाएं और देशों की संप्रभुता अंतरराष्ट्रीय कानून द्वारा संरक्षित हैं और ये ऐसे बुनियादी सिद्धांत हैं, जिनसे कोई समझौता नहीं किया जा सकता. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि किसी भी देश द्वारा दूसरे देश या क्षेत्र पर कब्जा करना स्वीकार्य नहीं है, चाहे उसके पीछे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का तर्क ही क्यों न दिया जाए.

ग्रीनलैंड; वहां रहने वालों का है, कोई कब्जा नहीं कर सकता

प्रधानमंत्री फ्रेडरिक्सन के कार्यालय की ओर से ईमेल के जरिए जारी बयान में कहा गया, “ग्रीनलैंड ग्रीनलैंडवासियों का है और अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा नहीं कर सकता.” यह बयान ट्रंप के उन दावों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है, जिनमें उन्होंने कई बार ग्रीनलैंड को अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में लाने की बात कही है. ट्रंप ने यहां तक कहा है कि रणनीतिक रूप से अहम और खनिज संसाधनों से समृद्ध इस द्वीप पर नियंत्रण पाने के लिए सैन्य विकल्प से भी इनकार नहीं किया जा सकता.

डेनिश खुफिया एजेंसी ने US को संभावित सुरक्षा खतरा सूची में डाला था

इससे पहले डेनमार्क की खुफिया एजेंसी डैनिश डिफेंस इंटेलिजेंस सर्विस (DDIS) ने पहली बार अमेरिका को लेकर चेतावनी जारी की थी. डेनिश खुफिया एजेंसी ने अमेरिका को संभावित सुरक्षा खतरा सूची में डाला था, जहां चीन और रूस हैं. उसने कहा था कि वॉशिंगटन अब अपने हितों को सर्वोपरि रखते हुए आर्थिक, तकनीकी और यहां तक कि सैन्य ताकत को भी शक्ति के साधन के रूप में इस्तेमाल करने से नहीं हिचक रहा है, वह भी अपने सहयोगियों के खिलाफ. एजेंसी ने ग्रीनलैंड में अमेरिका की बढ़ती दिलचस्पी को चिंता का विषय बताया और कहा कि ट्रंप प्रशासन उच्च टैरिफ की धमकियों और सैन्य विकल्पों को नकारने से इनकार नहीं कर रहा है. इस आकलन के जवाब में अब डेनमार्क और ग्रीनलैंड की ओर से यह साझा प्रतिक्रिया आई है. 

रविवार को विशेष दूत की नियुक्ति की घोषणा करते हुए ट्रंप ने कहा था कि जेफ लैंड्री ग्रीनलैंड के महत्व को भली-भांति समझते हैं और वह अमेरिका के राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ सहयोगी देशों और वैश्विक सुरक्षा को मजबूत करने में भूमिका निभाएंगे. हालांकि, डेनमार्क और ग्रीनलैंड की तीखी प्रतिक्रिया से साफ है कि यह मुद्दा अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच कूटनीतिक तनाव का कारण बन रहा है.

ये भी पढ़ें:-

US बनाएगा ‘ट्रंप-क्लास’ जंगी जहाज, अमेरिकी राष्ट्रपति ने खुद की घोषणा, बताया; अब तक का सबसे बड़ा, क्या खास होगा इसमें?

समंदर में फ्रांस का ‘महाशक्ति दांव’! चार्ल्स डी गॉल की विदाई तय, मैक्रों लाएंगे सुपर एयरक्राफ्ट कैरियर, जानें कितना होगा खास

भारत में माइक्रोसॉफ्ट में काम करने वाला अब पुतिन के देश में मार रहा झाड़ू, रूस में 15 से ज्यादा भारतीय बने सफाईकर्मी

Previous article Bihar Ka Mausam: बर्फीली पछुआ से ठिठुरा बिहार, राजगीर में 6.6 डिग्री, पटना-गया समेत 26 जिलों में कोल्ड डे अलर्ट
Next article paper leak: प्रश्न पत्र लीक का मास्टरमाइंड खुसरूपुर से गिरफ्तार, ओडिशा दारोगा बहाली समेत कई मामले में थी तलाश
Avatar Of Anant Narayan Shukla
अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel