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Home World ईरान के वाटर प्लांट पर US का हमला, विदेश मंत्री का आरोप; 30 गांवों का पानी रुका

ईरान के वाटर प्लांट पर US का हमला, विदेश मंत्री का आरोप; 30 गांवों का पानी रुका

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ईरान के वाटर प्लांट पर US का हमला, विदेश मंत्री का आरोप; 30 गांवों का पानी रुका
ईरान के विदेश मंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप.

US Attacks Iran Water Plant: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी युद्ध में अब सिर्फ इमारतें और सैन्य ठिकाने ही निशाने पर नहीं हैं. ईरान के विदेश मंत्री ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने ईरान के केश्म द्वीप पर स्थित एक डीसेलिनेशन प्लांट (समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य बनाने वाली सुविधा) पर हमला किया है. उनके मुताबिक इस हमले के कारण आसपास के करीब 30 गांवों की पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई है. अराघची ने शनिवार शाम सोशल मीडिया पर कहा कि पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट पर हमला करके अमेरिका ने एक खतरनाक और गलत मिसाल पेश की है.

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अमेरिका की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा, ‘अमेरिका ने केश्म द्वीप पर स्थित मीठे पानी के विलवणीकरण संयंत्र पर हमला कर एक गंभीर और हताश अपराध किया है. इस हमले से 30 गांवों की जलापूर्ति बाधित हुई है. किसी देश के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना बेहद खतरनाक कदम है, जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं. यह खतरनाक मिसाल अमेरिका ने पेश की है, ईरान ने नहीं.’ इस आरोप को लेकर अमेरिका या इजरायल की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

पानी की आपूर्ति पर हमले के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई

ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने बाद में कहा कि यह हमला दक्षिण के एक पड़ोसी देश के एयरबेस के समर्थन से किया गया था. उन्होंने कहा कि जब तक क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, तब तक देशों को शांति नहीं मिल सकती. अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार को ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बहरीन के जुफैर एयरबेस पर मौजूद अमेरिकी बलों को निशाना बनाया.

पानी पर संकट से फैलेगी अराजकता

यह हमला केश्म द्वीप पर स्थित मीठे पानी के विलवणीकरण संयंत्र (डीसेलिनेशन प्लांट) पर हुए हमले के जवाब में किया गया. अटलांटिक काउंसिल के वरिष्ठ सलाहकार हार्लन उलमैन ने अल जजीरा से कहा कि अगर पानी की आपूर्ति से जुड़े ठिकानों पर हमले बढ़े तो इससे खाड़ी क्षेत्र में ‘और ज्यादा अराजकता’ फैल सकती है. उन्होंने कहा, ‘खाड़ी क्षेत्र में लगभग 95 प्रतिशत पानी डीसेलिनेशन से आता है. अगर ईरान इन संयंत्रों और जल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाता है, तो पूरा खाड़ी क्षेत्र ठप हो सकता है.’

युद्ध के बीच गहराता जल संकट

भले ही दुनिया इस समय युद्ध के कारण तेल की कीमतों और आपूर्ति को लेकर चिंतित हो, लेकिन ईरान के सामने पानी का संकट बेहद गंभीर है. यह देश पहले से ही दुनिया के सबसे अधिक जल संकट झेलने वाले देशों में गिना जाता है. यहां उपलब्ध लगभग सभी नवीकरणीय जल संसाधनों का उपयोग कृषि, उद्योग और घरेलू जरूरतों में पहले से ही हो रहा है. पानी की कमी की वजह से ईरान अपनी राजधानी बदलने पर भी विचार कर रहा है.

सितंबर 2025 में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने राजधानी बदलने की जरूरत पर जोर दिया था. उनका कहना है कि तेहरान गंभीर आर्थिक और पर्यावरणीय संकट का सामना कर रहा है. यहां जल संकट, भू-धंसाव और तेजी से बढ़ती आबादी बड़ी समस्या बन चुकी है. तेहरान, करज और कज्विन जैसे इलाके पानी की कमी से जूझ रहे हैं, जबकि राजधानी तेहरान में अब एक करोड़ से अधिक लोग रहते हैं और देश के कुल पानी का लगभग 25 प्रतिशत इस्तेमाल होता है.

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मकरान में राजधानी बनाने का था प्लान

ईरान में उपलब्ध कुल पानी का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा खेती में इस्तेमाल होता है. वहीं पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और आर्थिक दबावों के कारण देश की सिंचाई व्यवस्था आधुनिक नहीं हो पाई है, जिससे बड़ी मात्रा में पानी की बर्बादी होती है. घटती बारिश, सूखते बांध और हर साल करीब 30 सेंटीमीटर जमीन धंसने जैसी स्थितियों के कारण सरकार विकास का रुख फारस की खाड़ी के तट पर स्थित मकरान क्षेत्र की ओर मोड़ने पर विचार कर रही थी. यहां चाबहार बंदरगाह जैसे महत्वपूर्ण बंदरगाह मौजूद हैं और इसे संभावित नई राजधानी के रूप में भी देखा जा रहा था. हालांकि फरवरी–मार्च 2026 के युद्ध ने ईरान की सुरक्षा स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है.

दूसरे सप्ताह में पहुंचा संघर्ष

ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष अब दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है. अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार युद्ध के पहले सप्ताह में अमेरिका और इजरायल के हमलों में 1300 से अधिक ईरानी नागरिकों की मौत हो चुकी है. 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हमला शुरू किया था. इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई, रक्षा मंत्री सहित कई वरिष्ठ नेता और लगभग 40 शीर्ष सैन्य अधिकारी मारे गए थे.

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ईरान के जवाबी हमले

ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं. ईरानी हमलों में इजरायल के कई शहरों को निशाना बनाया गया, जिससे भारी नुकसान की खबरें सामने आई हैं. इजरायल ने अब तक देश में 11 लोगों की मौत की पुष्टि की है. इसके अलावा ईरान ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए हैं. कुवैत में किए गए हमलों में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत होने की जानकारी सामने आई है.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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