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Home World ईरान का डर! अमेरिका का फायदा, मिडिल ईस्ट में 8.6 अरब+ डॉलर के हथियार बेचने की दी मंजूरी

ईरान का डर! अमेरिका का फायदा, मिडिल ईस्ट में 8.6 अरब+ डॉलर के हथियार बेचने की दी मंजूरी

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ईरान का डर! अमेरिका का फायदा, मिडिल ईस्ट में 8.6 अरब+ डॉलर के हथियार बेचने की दी मंजूरी
एक कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. फोटो- एक्स (@WhiteHouse).

US Military Sales Middle East: अमेरिका ने ईरान युद्ध के साथ साथ अपना व्यापार भी बढ़ा लिया है. उसने इस संघर्ष के दौरान ही पश्चिम एशिया के अपने प्रमुख सहयोगियों को 8.6 अरब डॉलर से अधिक के सैन्य उपकरणों की बिक्री को मंजूरी दे दी है. हथियार खरीदने वाले देशों में इजरायल, कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) शामिल हैं. 

अमेरिकी विदेश विभाग ने शुक्रवार को इन हथियारों की बिक्री की घोषणा की. यह सहमति ऐसे समय में आई है, जब ईरान से जुड़े लंबे संघर्ष के कारण मिडिल ईस्टा का क्षेत्रीय तनाव हाई लेवल पर बना हुआ है. अमेरिका के इन सहयोगियों के ऊपर ईरान ने काफी हमले किए थे. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ युद्ध-जैसा हमला किया, जिसके बाद से हालात बिगड़े हुए हैं. 

अस्थायी शांति काल में जंग की तैयारी कर रहा मिडिल ईस्ट

अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ युद्ध नौवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है. हालांकि, 8 अप्रैल के बाद से एक नाजुक युद्धविराम लागू हुआ, जिसे तीन हफ्तों से अधिक समय बीत चुका है. लेकिन, यह संघर्ष कब फिर से शुरू हो जाए, कहा नहीं जा सकता. ऐसे में अस्थायी शांति काल में अमेरिका के सहयोगी देश खुद को तैयार कर रहे हैं. चूंकि ईरान और अमेरिका के बीच अब भी स्थायी शांति वाला समझौता नहीं हो पाया है, ऐसे में ये देश खुद को फिर से तैयार करना चाहते हैं.

इससे अमेरिका को भी फायदा हो रहा है और  इजरायल, कतर, कुवैत और यूएई को भी राहत मिल रहा है. हालांकि, अमेरिका को एक तरह का दोहरा फायदा हो रहा है,  जहां अपने हमलों से उसने दुश्मन ईरान को कमजोर किया, वहीं दूसरी ओर असुरक्षित महसूस करने सहयोगी देशों को हथियार भी बेच दिए. क्योंकि हथियारों का बाजार डर के बाद ही शुरू होता है.

कैसै फैला इन देशों में डर?

ईरान के हमलों में इन सभी देशों की रक्षा प्रणाली की कमजोरी साफ तौर पर उजागर हुई. डिफेंस सिस्टम ईरान के कुछ मिसाइल और ड्रोन हमलों को इंटरसेप्ट करने में नाकाम रहे. इसकी वजह से सैन्य ठिकाने, प्रमुख ऊर्जा प्रतिष्ठान और यहां तक कि सिविल एरिया में भी हमला हुआ. इन सभी के पास अमेरिका के थाड या पैट्रियट मिसाइल डिफेंस प्रणालियों का उपयोग किया, लेकिन यह सिस्टम सभी हमले को रोकने में नाकाम रहे. इसके साथ ही ईरान के स्वार्म अटैक (कीड़ों के झुंड की तरह होने वाले हमले) की वजह से इन देशों का स्टॉक भी खाली हुआ. 

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ईरान में अमेरिकी कार्रवाई से खुश ट्रंप

इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को अमेरिका का विरोध करने वालों को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि जो लोग यह दावा करते हैं कि अमेरिका ईरान के खिलाफ युद्ध नहीं जीत रहा है, वह ‘देशद्रोह’ के समान है. हालांकि, ट्रंप प्रशासन पहले ही कांग्रेस को बता चुका था कि शत्रुता समाप्त हो चुकी है. ट्रंप ने जनवरी में वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का भी जिक्र किया और इसे ‘इतिहास की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाइयों में से एक’ बताया, साथ ही इसकी तुलना ईरान के साथ मौजूदा संघर्ष से की.

ट्रंप ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए यह सैन्य कार्रवाई की गई थी, ताकि इजरायल और खाड़ी क्षेत्र को संभावित खतरे से बचाया जा सके. उन्होंने कहा कि बी-2 बॉम्बर्स के जरिए उन्हें रोक दिया गया. अगर हमने ऐसा नहीं किया होता, तो उनके पास परमाणु हथियार होता और इजरायल, मिडिल ईस्ट और यूरोप तबाह हो जाते.’

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ट्रंप का दावा- ईरान में सब बर्बाद हो चुका है

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता काफी हद तक कमजोर हो चुकी है और उसके नेतृत्व को भी नुकसान पहुंचा है. उनके पास नौसेना नहीं है, वायुसेना नहीं है, एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम नहीं है, रडार नहीं है और उनके नेता भी नहीं बचे हैं.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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