[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home World ईरान वॉर में यूएई की एंट्री, होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए पेश किया प्लान, क्या बदलेगा इससे?

ईरान वॉर में यूएई की एंट्री, होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए पेश किया प्लान, क्या बदलेगा इससे?

0
ईरान वॉर में यूएई की एंट्री, होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए पेश किया प्लान, क्या बदलेगा इससे?
होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने के लिए यूएई अमेरिका का साथ देगा.

UAE to Join Iran War: मिडिल ईस्ट में 28 फरवरी से चल रहे संघर्ष में इजरायल-अमेरिका ने ईरान के हजारों ठिकानों पर हमले किए हैं. जहां इजरायल की डिफेंस फोर्स ने इन अटैक्स में ज्यादातर ईरानी लीडरशिप को निशाना बनाया है, वहीं अमेरिकी हमलों में ईरान के मिलिट्री ठिकानों को निशाना बनाया गया.  अब अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की चर्चाएं चल रही हैं, दोनों देशों के राष्ट्रपति ने इस ओर इशारा किया है. ऐसे में लगा कि शायद यह संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है, लेकिन इसी बीच युद्ध के दौरान ईरान के हाथों सबसे ज्यादा मार खाए देश संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने इस लड़ाई में कूदने के संकेत दिए हैं. अगर ऐसा होता है, तो वह इस युद्ध में प्रत्यक्ष रूप से लड़ने वाला खाड़ी का पहला अरब देश होगा.

यूएई, अमेरिका और उसके सहयोगियों की मदद से हॉर्मुज स्ट्रेट को बलपूर्वक सुरक्षित करने की तैयारी कर रहा है. द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक अरब अधिकारियों ने यह जानकारी दी. रिपोर्ट के अनुसार, यूएई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सैन्य कार्रवाई को मंजूरी दिलाने के लिए प्रस्ताव लाने की कोशिश कर रहा है. अमीराती राजनयिकों ने अमेरिका और यूरोप व एशिया की सैन्य शक्तियों से मिलकर एक गठबंधन बनाने का आग्रह किया है, ताकि बलपूर्वक होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जा सके. यूएई ने अपने प्रस्ताव में उसके शहरों पर किए गए हमलों की निंदा करने की भी मांग रखी है.

यूएई खाड़ी के सभी मुल्कों के मुकाबले इस युद्ध में सबसे ज्यादा ईरानी हमले झेलने वाला देश है. ईरान ने यूएई के कई आइकॉनिक जगहों पर मिसाइल और ड्रोन अटैक किए, इनमें पाम जुमैरा, दुबई-अबूधाबी एयरपोर्ट और तेल के ठिकाने अहम रहे. ईरान ने यूएई के रिहायशी इलाकों पर भी हमले किए हैं. 31 मार्च 2026 तक ईरान ने यूएई के ऊपर 2,228 से अधिक हमले किए हैं, जिनमें 1,977 से अधिक ड्रोन और 433 से अधिक मिसाइलें शामिल हैं. इन मिसाइलों में 398 बैलिस्टिक और 15-19 क्रूज मिसाइलें शामिल हैं. यूएई में इन हमलों की वजह से अब तक 11 लोगों की मौतें भी हुई हैं, वहीं 178 लोग घायल हुए हैं.

पहले क्या कर रहा था यूएई, अब रुख क्यों बदला?

संयुक्त अरब अमीरात शुरुआत में इस पूरे संघर्ष में सीधे शामिल होने से बचता रहा और खुद को एक संतुलित मध्यस्थ के रूप में पेश करता रहा. वह ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम कराने की कोशिश कर रहा था, क्योंकि क्षेत्रीय स्थिरता उसके आर्थिक हितों के लिए बेहद जरूरी है. खासतौर पर तेल और गैस के निर्यात पर निर्भर अर्थव्यवस्था के कारण वह किसी बड़े युद्ध से बचना चाहता था. ईरान की नेशनल सिक्योरिटी के चीफ अली लारिजानी ने यूएई की यात्रा भी की थी, जिनकी पिछले महीने इजरायली हमले में बेटे के साथ मौत हो गई.

लेकिन हालात तब बदल गए जब ईरान की कार्रवाई सीधे यूएई के हितों को प्रभावित करने लगी. हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से उसके व्यापार और ऊर्जा निर्यात पर असर पड़ा, वहीं यूएई में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने से सुरक्षा चिंताएं भी बढ़ीं. ऐसे में अबू धाबी को लगने लगा कि केवल कूटनीति से स्थिति नहीं संभलेगी, इसलिए उसने सख्त रुख अपनाते हुए सैन्य विकल्पों पर विचार शुरू कर दिया है और वह अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में भी सक्रिय हो गया है.

ये भी पढ़ें:- हम जंग रोकने को तैयार, लेकिन… ईरानी राष्ट्रपति ने US के सामने रखी शर्त, विदेश मंत्री बोले- ट्रंप के दोस्त से बात…

क्या चाहता है यूएई?

रिपोर्ट के अनुसार, यूएई के संयुक्त राष्ट्र में पेश किए गए प्रस्ताव पर रूस और चीन वीटो पावर का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसकी वजह से यह खारिज हो सकता है. लेकिन इसके बावजूद यूएई ईरान के खिलाफ सहयोगियों के साथ सैन्य कार्रवाई पर आगे बढ़ना चाहता है.  रिपोर्ट के अनुसार, यूएई ने अमेरिका को कुछ आईलैंड्स पर कब्जा करने का प्रस्ताव रखा है, इसमें अबू मूसा द्वीप भी शामिल है. यह एक विवादित आईलैंड है, जिस पर ईरान का कब्जा है, जबकि यूएई भी इस पर अपना दावा करता है.

ईरान के खिलाफ युद्ध में उतरने के पीछे यूएई की ताकत

यूएई के पास मजबूत सैन्य ढांचा, आधुनिक तकनीक और रणनीतिक भू-स्थिति जैसी कई अहम क्षमताएं हैं, जो उसे इस संघर्ष में प्रभावी भूमिका निभाने का भरोसा देती हैं. उसके पास अमेरिकी एफ-16 लड़ाकू विमान से लैस उन्नत वायुसेना फ्लीट है, निगरानी ड्रोन सिस्टम और पश्चिमी देशों से मिले अत्याधुनिक हथियार मौजूद हैं.

इसके अलावा जेबेल अली जैसे बड़े बंदरगाह और लॉजिस्टिक नेटवर्क अमेरिकी नेतृत्व वाले किसी भी सैन्य अभियान को सपोर्ट देने में सक्षम हैं. यही नहीं, यूएई होर्मुज स्ट्रेट के एक दक्षिणी-पूर्वी मुहाने पर स्थित है. यह एक ऐसी लोकेशन है, जहां से होर्मुज की एंट्री पॉइंट है. वह खाड़ी क्षेत्र में अपनी स्थिति का फायदा उठाते हुए सप्लाई, खुफिया जानकारी और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है. यूएई होर्मुज स्ट्रेट में ईरान द्वारा बिछाई गई सी माइंस को भी हटाने में अहम योगदान दे सकता है.

ये भी पढ़ें:- इराक में अवॉर्ड विनिंग अमेरिकी पत्रकार का अपहरण, दिन-दहाड़े उठा ले गए किडनैपर्स

युद्ध में यूएई के उतरने से क्या बदलेगा?

अगर यूएई खुलकर इस युद्ध में शामिल होता है, तो यह संघर्ष एक सीमित टकराव से बढ़कर क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है. इससे सऊदी अरब जैसे अन्य खाड़ी देशों पर भी दबाव बढ़ेगा कि वे अपना पक्ष स्पष्ट करें. साथ ही, यह कदम ईरान पर सैन्य और कूटनीतिक दबाव को कई गुना बढ़ा सकता है, लेकिन इसके साथ ही क्षेत्र में अस्थिरता और तेल बाजार में उथल-पुथल भी तेज हो सकती है.

यूएई की एंट्री इस जंग को लंबा और अधिक जटिल बना सकती है, जिसमें वैश्विक शक्तियों की भागीदारी और बढ़ने की आशंका है. भले ही यूएई के प्रस्ताव को यूएन में सहयोग न मिले, लेकिन उसे बहरीन का समर्थन मिलने की संभावना है. यह ईरान के दक्षिणी समुद्री सीमा के पास स्थित एक छोटा, लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश है. यहां पर अमेरिकी नौसेना का फिफ्थ फ्लीट है. बहरीन लॉजिस्टिक और सैन्य समर्थन देने में सक्रिय भूमिका निभा सकता है.

सऊदी अरब समेत कई देश चाहते हैं कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हुए बिना अमेरिका को नहीं जाना चाहिए. वे चाहते हैं कि यह संघर्ष तब तक चले जब तक ईरान पूरी तरह कमजोर न हो जाए. उन्होंने इसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हमले जारी रखने की अपील की थी. हालांकि, इन देशों ने अब तक अपनी सेनाएं नहीं तैनात की हैं, लेकिन यूएई के पहल करने के बाद अन्य देशों की ओर से भी ऐसी कार्रवाई देखने को मिल सकती है. क्योंकि ईरान ने केवल यूएई ही नहीं, बल्कि सऊदी अरब, कुवैत, कतर, बहरीन और अन्य देशों पर भी मिसाइलें बरसाई हैं.

ये भी पढ़ें:- क्रीमिया में क्रैश हुआ रूस का मिलिट्री विमान, चट्टाने से टकराया; 29 की मौत

ट्रंप ने युद्ध को बताया 2-3 हफ्ते का मामला

यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कथित तौर पर ईरान के खिलाफ युद्ध को जल्द समाप्त करने की योजना बना रहे हैं. उन्होंने मंगलवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि यह युद्ध अगले 2-3 हफ्तों में समाप्त हो सकता है. उन्होंने अपने बयान में अमेरिकी युद्ध में खाड़ी के देशों और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद प्रभावित देशों से मदद न मिलने पर सहयोगी देशों की आलोचना की.

उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज को सुरक्षित रखना अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है, जाओ अपना तेल खुद न प्राप्त करो. ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान की सेना अब समाप्त हो गई है. ईरान की नौसेना भी तबाह हो चुकी हैं, वहीं उसका नेतृत्व भी लगभग समाप्त है. ट्रंप ने कहा कि ईरान की लीडरशिप अब बदल चुकी है और पहले वालों के मुकाबले यह नेतृत्व अधिक तर्कसंगत है.

यूएई ने अब तक धैर्य की नीति अपना रखी थी, लेकिन अब वह आक्रामकता दिखा रहा है. वह खाड़ी का एकमात्र देश है, जिसकी इजरायल के साथ दोस्ती है. वह अब्राहम अकॉर्ड साइन करने वाला भी पहला देश बना था. ऐसे में शांति की चर्चा के बीच यूएई का यह रुख थोड़ा चौंकाने वाला है. हालांकि, गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र में वोटिंग के बाद ही इस मामले में आगे की स्थिति साफ हो पाएगी.

Previous article ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में इमोशनल ट्विस्ट, मायरा के फैसले से बदल जाएगी अभीरा-अरमान की कहानी
Next article प्राइवेट स्कूलों में किताबों के नाम पर लूट, 3442 रुपये की हो जाता है एनसीईआरटी के 260 वाला बुकसेट
Avatar Of Anant Narayan Shukla
अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel