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Home World जल्द ही जर्मनी में कम करेंगे अमेरिकी सैनिक… जर्मन चांसलर के इस कमेंट पर भड़के ट्रंप ने दी चेतावनी

जल्द ही जर्मनी में कम करेंगे अमेरिकी सैनिक… जर्मन चांसलर के इस कमेंट पर भड़के ट्रंप ने दी चेतावनी

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जल्द ही जर्मनी में कम करेंगे अमेरिकी सैनिक… जर्मन चांसलर के इस कमेंट पर भड़के ट्रंप ने दी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज. फोटो- एक्स.

Trump warns Germany amid Iran War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सहयोगी जर्मनी को चेतावनी दी है. ट्रंप ने अपनी बातों से यह संकेत दिया कि वह वहां तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या कम कर सकते हैं. यह बयान ईरान और अमेरिका-इजराइल युद्ध को लेकर जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ बढ़ते तनाव के बीच आया है.

ईरान के बीच चल रहे युद्ध में नाटो और यूरोप से अमेरिका को मनचाही मदद नहीं मिली है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो से सैन्य सहयोग की मांग कई बार की, लेकिन हर बार उन्हें सिवाय नसीहत के कुछ नहीं मिला. इनमें स्पेन, जर्मनी और फ्रांस जैसे देश आगे रहे, जिन्होंने ईरान के खिलाफ किसी कार्रवाई में भाग न लेने का फैसला किया.  

जर्मन चांसलर मर्ज ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि ईरानी नेतृत्व के सामने अमेरिका ‘अपमानित’ हो रहा है और उन्होंने युद्ध में वाशिंगटन की रणनीति पर सवाल उठाए थे. इसके बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिका जर्मनी में सैनिकों की तैनाती में कटौती की संभावना की समीक्षा कर रहा है और इस पर जल्द फैसला लिया जाएगा.

पहले भी सैनिकों की संख्या घटाने की कोशिश कर चुके हैं ट्रंप

अपने पहले कार्यकाल में भी ट्रंप ने अमेरिकी रक्षा खर्च को कम बताते हुए जर्मनी से सैनिक घटाने की घोषणा की थी. 2020 में उन्होंने लगभग 34,500 में से 9,500 सैनिक वापस बुलाने की बात कही थी, लेकिन यह योजना लागू नहीं हो सकी. बाद में राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 2021 में इस निर्णय को रद्द कर दिया था. जर्मनी में अमेरिका के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने हैं, जिनमें यूरोपीय और अफ्रीकी कमान मुख्यालय, रामस्टीन एयर बेस और एक क्षेत्रीय मेडिकल सेंटर शामिल हैं.

यूरोप में तैनात अमेरिकी सैनिकों के लगभग आधे जर्मनी में

यूएसएफैक्ट्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक अमेरिका के 36,436 सैनिक जर्मनी में स्टेशन थे. यह अमेरिका से बाहर जापान के बाद किसी देश में तैनात सैनिकों की दूसरी सबसे बड़ी संख्या है. जापान में अमेरिका के 54,288 सैनिक तैनात हैं. फ्रेंच मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरे यूरोप में अमेरिका के लगभग 84,000 सैनिक तैनात हैं. यानी 45 प्रतिशत से ज्यादा अमेरिकी सैनिक जर्मनी में तैनात हैं.

होर्मुज स्ट्रेट की वजह से मर्ज और ट्रंप के बीच तनातनी

मर्ज ने कहा कि ट्रंप के साथ उनके संबंध अच्छे हैं, लेकिन ईरान युद्ध को लेकर उन्हें शुरुआत से ही संदेह था. उन्होंने चेतावनी दी कि इस संघर्ष के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से, जहां से विश्व का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है.

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ट्रंप ने पलटवार करते हुए मंगलवार को सोशल मीडिया पर लिखा, ‘जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज को लगता है कि ईरान के पास परमाणु हथियार होना ठीक है. उन्हें पता ही नहीं है कि वह क्या कह रहे हैं.’ ट्रंप ने कहा कि इसमें कोई हैरानी नहीं है कि जर्मनी आर्थिक रूप से और अन्य मामलों में बहुत खराब प्रदर्शन कर रहा है.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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