ईरान को ट्रंप की सीधी वॉर्निंग: ‘बात मानो या फिर अंजाम भुगतने को तैयार रहो’
Trump Iran Warning: मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को 'तगड़े एक्शन' की चेतावनी दी है. अमेरिकी बेड़े की तैनाती और पैट्रियट मिसाइलों के मूवमेंट ने जंग की सुगबुगाहट तेज कर दी है. क्या ईरान ट्रंप की 3 शर्तें मानेगा या शुरू होगा नया सैन्य संकट?
Trump Iran Warning: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ कड़े तेवर दिखाए हैं. ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अगर ईरान ने उनकी शर्तें नहीं मानीं, तो अमेरिका ‘बड़ी कार्रवाई’ (something very tough) कर सकता है. ट्रंप की ये डिमांड्स न्यूक्लियर हथियारों से लेकर मिसाइल प्रोग्राम तक जुड़ी हैं. इजरायली आउटलेट ‘चैनल 12’ से बात करते हुए ट्रंप ने इशारा दिया कि या तो डील होगी, या फिर ईरान के लिए मुश्किलें बढ़ने वाली हैं.
अमेरिका ने भेजी विशाल सेना
ट्रंप प्रशासन ने मिडिल ईस्ट में अपनी ताकत दिखानी शुरू कर दी है. ट्रंप ने खुद बताया कि उन्होंने इलाके में एक विशाल बेड़ा भेजा है, जिसमें USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर भी शामिल है.
‘चैनल 12’ और ‘एक्सियोस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप अब वहां एक और दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर भेजने का मन बना रहे हैं. इस सैन्य हलचल से पूरे इलाके में जंग का डर बढ़ गया है. वहीं, अमेरिका ने अपने कमर्शियल जहाजों को भी चेतावनी दी है कि वे ईरान की समुद्री सीमा से जितना हो सके दूर रहें.
ट्रंप की 3 बड़ी शर्तें- ‘वेनेजुएला जैसा हाल करने की धमकी’
ट्रंप ने ईरान के सामने 3 ऐसी शर्तें रखी हैं, जिन्हें न मानने पर उन्होंने स्पीड और पावर के साथ एक्शन लेने की बात कही है. ट्रंप ने ईरान की तुलना वेनेजुएला से की, जहां हाल ही में अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन में वहां के राष्ट्रपति मादुरो को पकड़ा गया था.
ट्रंप की डिमांड्स:
- ईरान अपना यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) पूरी तरह बंद करे.
- दूसरे देशों में सक्रिय अपने हथियारबंद ग्रुप्स (Proxies) से नाता तोड़े.
- अपने बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर लगाम लगाए.
फॉक्स बिजनेस से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान के लिए इन शर्तों को न मानना ‘बेवकूफी’ होगी. बता दें कि ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत (जनवरी 2025) से ही ईरान पर मैक्सिमम प्रेशर डालना शुरू कर दिया है.
पिछले साल ही हुई थी एयरस्ट्राइक
याद दिला दें कि पिछले साल जून में ट्रंप ने ईरान के तीन न्यूक्लियर ठिकानों पर हमले के आदेश दिए थे. यह हमला ईरान और इजरायल के बीच चली 12 दिनों की जंग का हिस्सा था. ट्रंप का मानना है कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम सिर्फ बिजली बनाने के लिए नहीं, बल्कि हथियारों के लिए है.
ईरान के अंदरूनी हालात
दिसंबर के आखिरी दिनों से ईरान में सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे. रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान सरकार ने इसे दबाने के लिए इंटरनेट बंद कर दिया और बल प्रयोग किया, जिसमें हजारों लोगों की जान गई.
ट्रंप ने इन प्रदर्शनकारियों की मदद करने की बात भी कही थी. हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रंप का असली मकसद प्रदर्शनकारियों की मदद करना नहीं, बल्कि ईरान की मिलिट्री पावर को कम करना है. वहीं, ईरान का कहना है कि इन प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका और इजरायल का हाथ है.
अमेरिका में भी शुरू हुआ विरोध- ‘बिना इजाजत जंग नहीं’
ट्रंप के इन कड़े फैसलों का अमेरिका के अंदर ही विरोध शुरू हो गया है. ‘अल जजीरा’ की रिपोर्ट के मुताबिक, 25 संस्थाओं ने अमेरिकी संसद (Congress) को लेटर लिखकर ट्रंप की शक्तियों पर लगाम लगाने की मांग की है.
सीनेटर टिम केन और रैंड पॉल ने एक नया बिल (War Powers Resolution) पेश किया है. इसमें कहा गया है कि जब तक संसद अनुमति न दे, ट्रंप ईरान के खिलाफ सेना का इस्तेमाल न करें. ‘नेशनल ईरानियन अमेरिकन काउंसिल’ (NIAC) के डायरेक्टर रयान कोस्टेलो का कहना है कि संसद को दबाव बनाना चाहिए ताकि अमेरिका एक और बेवजह की जंग में न फंसे.
कतर के बेस पर हलचल और सैटेलाइट तस्वीरें
तनाव इतना बढ़ गया है कि कतर में स्थित अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य बेस ‘अल-उदेद’ पर हाई अलर्ट है. ‘रॉयटर्स’ द्वारा जारी सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि अमेरिका ने अपनी पैट्रियट मिसाइलों को ट्रकों पर लोड कर दिया है ताकि उन्हें कभी भी कहीं भी मूव किया जा सके.
सिर्फ कतर ही नहीं, बल्कि जॉर्डन, सऊदी अरब, ओमान और डिएगो गार्सिया जैसे बेस पर भी अमेरिकी फाइटर जेट्स और सपोर्ट इक्विपमेंट की संख्या बढ़ गई है. दूसरी तरफ, ईरान भी चुप नहीं है; वह भी अपनी मिसाइलों का स्टॉक भर रहा है और समुद्र में अपने ‘शाहिद बघेरी’ ड्रोन कैरियर को तैनात कर रहा है.
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