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Home World ईरान से जंग में बुरी तरह फंसे ट्रंप, अमेरिका के पास अब बचे सिर्फ 2 रास्ते

ईरान से जंग में बुरी तरह फंसे ट्रंप, अमेरिका के पास अब बचे सिर्फ 2 रास्ते

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ईरान से जंग में बुरी तरह फंसे ट्रंप, अमेरिका के पास अब बचे सिर्फ 2 रास्ते
तस्वीर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. इमेज सोर्स क्रेडिट- एक्स/ @WhiteHouse

Trump-Iran War: उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के जरिए ईरान के डायरेक्ट और इनडायरेक्ट, दोनों तरह की बातचीत बहुत अच्छे से चल रही है और जल्द ही समझौता हो सकता है. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के कई बड़े ठिकानों को खत्म कर दिया है. 

उन्होंने दावा किया कि केवल तीन दिनों के भीतर ईरान के 158 जहाज डुबा दिए गए हैं, जिससे उनकी पूरी नेवी और एयरफोर्स खत्म हो गई है. ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के पास अब मिसाइलें भी लगभग खत्म हो चुकी हैं. जब उनसे ईरान के पूर्व नेता खामेनेई के बेटे के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वह शायद जिंदा है लेकिन गंभीर रूप से घायल है.

ट्रंप के सामने हैं दो मुश्किल ऑप्शन

भले ही ट्रंप अपनी जीत बता रहे हों, लेकिन बीबीसी न्यूज की एक एनालिसिस के मुताबिक ट्रंप अब एक चक्रव्यूह में फंस गए हैं. उनके पास अब केवल दो ही रास्ते बचे बाहर हैं बाहर आने के:

जंग को और बढ़ाना: बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के सामने इस वक्त दो ही रास्ते हैं. पहला रास्ता है कि वह सैन्य हमले और तेज कर दें. लेकिन इसमें बड़ा खतरा यह है कि ईरान समर्थित ग्रुप पूरे इलाके में हमला कर सकते हैं. इससे हॉर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) जैसा समुद्री रास्ता बंद हो सकता है, जिससे दुनिया भर में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और ग्लोबल इकोनॉमी को झटका लग सकता है.

बिना पूरी जीत के जीत का ऐलान करना: बीबीसी का विश्लेषण कहता है कि दूसरा विकल्प यह है कि ट्रंप छोटी-मोटी कामयाबियों को ही बड़ी जीत बताकर पीछे हट जाएं. लेकिन इसमें साख (क्रेडिबिलिटी) का खतरा है. अगर जमीन पर हकीकत ट्रंप के दावों से अलग निकली, तो उनकी दुनिया भर में किरकिरी हो सकती है. जानकारों का मानना है कि किसी भी युद्ध को शुरू करना आसान होता है, लेकिन उसे खत्म करना सबसे मुश्किल काम है.

खार्ग आइलैंड पर कब्जे का प्लान  

फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान के मुख्य तेल हब ‘खार्ग आइलैंड’ पर कब्जा कर सकता है. उन्होंने कहा कि उनके पास बहुत सारे विकल्प हैं और वह ईरान के तेल पर कंट्रोल करना चाहते हैं. ट्रंप ने इसकी तुलना वेनेजुएला से करते हुए कहा कि अमेरिका वहां अनिश्चित काल तक रुक सकता है. ट्रंप ने यह भी बताया कि ईरान ने ‘सम्मान’ के तौर पर 20 टैंकर तेल अमेरिका को भेजा है और वे अमेरिका के 15-पॉइंट वाले शांति प्लान पर राजी हो रहे हैं.

दूसरी तरफ, यूएस सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी दी है कि 27 मार्च को USS त्रिपोली (LHA-7) अब वेस्ट एशिया के मोर्चे पर पहुंच गया है. यह युद्धपोत करीब 3500 नौसैनिकों और मरीन कमांडोज के साथ युद्ध क्षेत्र में दाखिल हुआ है. ये मरीन कमांडो विशेष रूप से समुद्र में हाईजैक किए गए जहाजों को छुड़ाने और किसी भी सीधे सैन्य टकराव में शामिल होने के लिए ट्रेन्ड हैं.

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ईरान का पलटवार: ‘बातचीत सिर्फ एक दिखावा है’

दूसरी ओर, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने ‘प्रेस टीवी’ के जरिए आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल बातचीत के बहाने जमीन पर हमला करने की प्लानिंग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि ईरान दबाव में नहीं झुकेगा और उनकी सेना मुकाबले के लिए तैयार है. वहीं, ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री ब्रिगेडियर जनरल सैय्यद माजिद इब्न रजा ने तुर्की के रक्षा मंत्री से बात कर इस हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है.

द गार्जियन की रिपोर्ट 

द गार्जियन के अनुसार, युद्ध अक्सर उन रास्तों पर चले जाते हैं जिसकी उम्मीद लीडर को नहीं होती. ईरान की संस्थागत मजबूती और उसके क्षेत्रीय प्रभाव को देखते हुए उसे इतनी आसानी से खत्म करना मुमकिन नहीं लगता. इस युद्ध का असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ेगा जो तेल के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर हैं. अब देखना यह है कि ट्रंप इस मुश्किल हालात से बाहर निकलने के लिए क्या कदम उठाते हैं.

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