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Home World पिछले तेजस क्रैश में बच गए थे पायलट, दुबई में हुए हादसे ऐसा क्यों नहीं हो सका? कहां हुई चूक?

पिछले तेजस क्रैश में बच गए थे पायलट, दुबई में हुए हादसे ऐसा क्यों नहीं हो सका? कहां हुई चूक?

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पिछले तेजस क्रैश में बच गए थे पायलट, दुबई में हुए हादसे ऐसा क्यों नहीं हो सका? कहां हुई चूक?
दुबई में तेजस एयरक्राफ्ट क्रैश कैसे हुआ? फोटो- एक्स

How Tejas Fighter Jet Crashed-Why Tejas LCA Pilot could not eject: भारतीय वायु सेना (IAF) का एक तेजस लड़ाकू विमान दुबई एयरशो में करतब दिखाने के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. 17 नवंबर से शुरू हुए इस शो में शुक्रवार, 21 नवंबर को दोपहर करीब 2.15 बजे (स्थानीय समयानुसार) तेजस बड़ी भीड़ के सामने जमीन पर गिर गया. इस हादसे में पायलट नमांश स्याल की मौत हो गई. यह विमान के 24 साल के परिचालन इतिहास में दूसरा क्रैश था और पहला जिसमें किसी की जान गई. इससे पहले मई में जैसलमेर के पास हुए क्रैश में पायलट सुरक्षित बाहर निकल आया था. ऐसे में इस बार ऐसा क्या हुआ कि पायलट की जान नहीं बच सकी. 

2024 में तेजस क्रैश से बच गए थे पायलट

तेजस (हल्का लड़ाकू विमान- LCA) ने 2001 में पहली उड़ान भरी थी. इसके के बाद से यह सिर्फ दो बार क्रैश हुआ है. पहली बार पिछले साल यह विमान राजस्थान के जैसलमेर में गिरा था. वहीं दूसरी बार दुबई के अल मखतूम एयरपोर्ट पर हुई. 20 साल से ज्यादा उड़ान वाले करियर में केवल दो क्रैश, इसे सेवा रिकॉर्ड के लिहाज से सबसे सुरक्षित फाइटर बनाते हैं. पिछला क्रैश 12 मार्च 2024 को राजस्थान के जैसलमेर में एक ऑपरेशनल ट्रेनिंग मिशन के दौरान टेकऑफ के कुछ ही मिनट बाद हुआ था.

उस समय विमान जैसलमेर शहर के लक्ष्मी चंद सनवाल कॉलोनी के पास एक छात्रावास की जमीन पर गिरा था. इसमें पायलट सुरक्षित बच गए थे, इसकी पुष्टि IAF और प्रत्यक्षदर्शियों दोनों ने की थी. एक वीडियो में तेजस को कम ऊंचाई पर ग्लाइड करते हुए और लैंडिंग गियर खुले होने की स्थिति में जमीन की ओर जाते देखा गया था. पायलट को पैराशूट के साथ नीचे उतरते देखा गया था.

यह हादसा पोखरण रेगिस्तान में चल रहे भारत शक्ति त्रि-सेवा सैन्य अभ्यास से 100 किमी दूर हुआ था, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मौजूद थे. उस समय भी IAF ने कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी का आदेश दिया था. हालांकि HAL के एक वरिष्ठ अधिकारी ने तेजस की सुरक्षा पर किसी भी चिंता को खारिज करते हुए कहा था कि इसका रिकॉर्ड बेदाग है.

इस बार क्रैश हुए तेजस में पायलट क्यों नहीं बच सके?

सिंगल-सीट हल्का लड़ाकू विमान (LCA) तेजस दुबई एयर शो के आखिरी दिन एक डेमोंस्ट्रेशन कर रहा था. एक अच्छी उड़ान के बाद यह अचानक से नीचे गिरा और क्रैश कर गया. सोशल मीडिया पर इसके कई वीडियो वायरल हैं. दृश्यों में देखा गया कि विमान अचानक नीचे की ओर झुका और तेजी से जमीन में जा गिरा. विमान गिरते ही आग की लपटों में घिर गया और धुएं का विशाल गुबार एयरपोर्ट के ऊपर उठता दिखा.  NDTV की एक रिपोर्ट के मुताबिक पायलट एक निगेटिव G-फोर्स टर्न से उबर नहीं पाए.

क्या है निगेटिव G फोर्स टर्न

निगेटिव G वह बल है जिसे कोई पायलट या यात्री गुरुत्वाकर्षण (ग्रैविटी) के विपरीत दिशा में महसूस करता है. ऐसा तब होता है जब विमान नीचे की ओर तेजी से बढ़ता है या अचानक नीचे की ओर झटका महसूस करता है. इसमें पायलट को वजनहीनता जैसा अहसास होता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि नेगेटिव G पायलटों के लिए रोमांचक हो सकता है, लेकिन इससे असहजता, भ्रम (disorientation) और बेहोशी तक का जोखिम रहता है, क्योंकि रक्त सिर की ओर जमा हो सकता है. इसी कारण पायलटों को ऐसे G-फोर्स हालात को संभालने की गहन ट्रेनिंग दी जाती है.

तेजस की खासियतों में से एक यह भी है कि यह पायलट को ऐसे नेगेटिव G वाले एरोबेटिक करतब, जैसे लूप, रोल और उल्टा उड़ान करने की क्षमता देता है. घटना के वीडियो में विमान को फ्री-फॉल में जाते देखा गया, जो संभवतः रिकवरी में विफलता के कारण हुआ. यह दो दशकों में तेजस का दूसरा क्रैश है, जिसमें पिछला हादसा पिछले साल हुआ था.

F-16 की तरह फुर्तीला, लेकिन मुश्किलें भी उसी की तरह

जनरल इलेक्ट्रिक इंजन वाला तेजस आधुनिक मार्टिन-बेकर जीरो-जीरो इजेक्शन सीट से लैस है जो पायलट को टेकऑफ, लैंडिंग या कम ऊंचाई पर भी सुरक्षित बाहर निकलने की सुविधा देती है. इसमें कैनोपी उड़ाकर पायलट को विमान से दूर धकेला जाता है और पैराशूट खुलकर सुरक्षित लैंडिंग कराता है. पिछली बार पायलट ने इसका इस्तेमाल बेहतर ढंग से किया था, लेकिन इस बार संभवतः वह निगेटिव G फोर्स टर्न की वजह से उबर नहीं सके. विशेषज्ञ बताते हैं कि तेजस, F-16 की तरह, बेहद फुर्तीला विमान है. इसके एडवांस्ड एवियोनिक्स और कंपोजिट एयरफ्रेम के कारण यह बहुत हल्का और अत्यधिक मोड़ लेने योग्य है. हालांकि, F-16 की तरह, इतनी फुर्ती इसे थोड़ी अस्थिरता भी देती है.

IAF करेगा डिटेल इंक्वायरी

दुबई अधिकारियों ने बताया कि इमरजेंसी और फायरफाइटिंग टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और स्थिति को नियंत्रित कर लिया. IAF ने पुष्टि की कि पायलट की मृत्यु हो गई. वायुसेना ने कहा कि हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच के आदेश दिए जा रहे हैं. IAF ने बयान में कहा कि दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी का गठन किया जा रहा है. इस बार IAF को एक पुख्ता जानकारी के साथ आना ही होगा. विशेषज्ञों की राय सही हो भी सकती है और नहीं भी, ऐसे में इंडियन एयरफोर्स की जांच के बाद ही सही जानकारी सामने आएगी.

तेजस विमान के बारे में

HAL तेजस एक सिंगल-इंजन, 4.5-जनरेशन मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है, जिसमें डेल्टा विंग डिजाइन है. इसे एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) ने विकसित किया और HAL ने बनाया. तेजस LCA की अवधारणा 1984 में बनी थी. विमान का नाम तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रखा था. तेजस ने 2001 में अपनी पहली उड़ान भरी थी और 2015 में भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ था. इसका पहला ऑपरेशनल तेजस स्क्वॉड्रन नंबर 45 फ्लाइंग डैगर्स 2016 में सेवा में शामिल किया गया.

भारतीय वायुसेना तेजस के नए संस्करण LCA Mk-1A को सेवा में शामिल करने की तैयारी कर रही है. रूस निर्मित MiG-21 के रिटायर होने के बाद तेजस वायुसेना की रीढ़ बनने जा रहा है. सितंबर में सरकार ने HAL से 97 नए तेजस लड़ाकू विमान खरीदने का आदेश दिया है, जिनकी डिलीवरी 2027 से शुरू होगी. इससे पहले सरकार ने 2021 में 83 तेजस Mk-1A विमान खरीदने की घोषणा की थी, लेकिन इनकी डिलीवरी में देरी हो रही है.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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