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Tara Chand Urges PM Modi: जिहादी फौज के कब्जे में बलोचिस्तान, तारा चंद ने मोदी से मांगा भारत का साथ

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Tara Chand Urges PM Modi: जिहादी फौज के कब्जे में बलोचिस्तान, तारा चंद ने मोदी से मांगा भारत का साथ
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Tara Chand Urges PM Modi: बलोच अमेरिकी कांग्रेस (BAC) के अध्यक्ष और बलोचिस्तान सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री तारा चंद बलोच ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक औपचारिक पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने बलोच जनता के राष्ट्रीय प्रतिरोध आंदोलन को भारत से नैतिक, राजनीतिक और कूटनीतिक समर्थन देने की अपील की है. यह अपील दो औपचारिक पत्रों के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय, दिल्ली को संबोधित की गई है.

डॉ. तारा चंद ने अपने पत्र में बलोचिस्तान मुद्दे को लेकर भारतीय नेतृत्व की पूर्व में दिखाई गई संवेदनशीलता के लिए आभार जताया है. विशेष रूप से उन्होंने पीएम मोदी द्वारा लाल किले से दिए गए भाषण में बलोचिस्तान का उल्लेख करने को “नैतिक समर्थन” की संज्ञा दी, जिससे दुनिया भर के बलोचों में आशा की किरण जगी. उन्होंने पत्र में लिखा, “आपका लाल किले से बलोचिस्तान का उल्लेख बलोच जनता ने दुनिया भर में एक नैतिक समर्थन के संकेत के रूप में अपनाया. यह उस राष्ट्र के लिए उम्मीद का संदेश था, जिसे पाकिस्तान ने कब्जा कर रखा है, अत्याचार किया है और आतंकित किया है.”

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डॉ. चंद ने बलोचिस्तान के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि 1948 में ब्रिटिश शासन के अंत के बाद जबरन पाकिस्तान में विलय के साथ ही “क्रूर कब्जे” की शुरुआत हुई. उन्होंने पाकिस्तान की सैन्य प्रतिष्ठान रावलपिंडी स्थित जीएचक्यू द्वारा समर्थित “जिहादी सेना” पर बलोचों के खिलाफ नरसंहार जैसे अत्याचारों का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “एक जिहादी सेना द्वारा शासित इस देश ने मेरे हजारों देशवासियों के अपहरण, यातना, हत्या और विस्थापन के लिए ज़िम्मेदार है.” 

डॉ. चंद ने कहा कि ये अत्याचार बलोच राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन को दबाने की एक व्यापक साजिश का हिस्सा हैं, जो कई दशकों से जारी है. उन्होंने चीन की बलोचिस्तान में बढ़ती मौजूदगी को उपनिवेशवाद के एक नए खतरे के रूप में चिन्हित किया. उन्होंने इस बात पर निराशा जताई कि बलोच मुक्ति संग्राम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह मान्यता नहीं मिली जिसकी उसे ज़रूरत है. उन्होंने कहा, “भारतीय मीडिया के बाहर पाकिस्तान द्वारा कब्ज़ा किए गए बलोचिस्तान में हो रहे अत्याचारों को शायद ही कोई स्वीकार करता है.”

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डॉ. चंद ने भारत से अपील की कि वह वैश्विक मंच पर बलोचिस्तान की आवाज़ को प्रमुखता से उठाए और कहा कि यदि बलोच आंदोलन को राज्यस्तरीय नैतिक व राजनीतिक समर्थन नहीं मिला, तो पाकिस्तान और उसके सहयोगी बलोच राष्ट्रीय प्रतिरोध को समाप्त कर सकते हैं और बलोचिस्तान में उपनिवेशवाद के एक और भयावह चरण की शुरुआत हो सकती है. पत्र में उन्होंने बलोचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों और रणनीतिक स्थिति का भी उल्लेख किया, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम है. उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र और भारत के साथ सहयोगी बलोचिस्तान, शांति के पक्षधर भारतीयों के लिए लाभकारी होगा और भारत को बलोचिस्तान को 21वीं सदी के एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक तत्व के रूप में देखना चाहिए.

डॉ. चंद ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित करने के निर्णय की सराहना की और इसे पाकिस्तान के जिहादी जनरलों को स्पष्ट संदेश देने वाला साहसी कदम बताया. पत्र में उन्होंने लिखा, “मैं आपकी दूरदर्शिता की सराहना करता हूँ कि आपने सिंधु जल संधि को होल्ड पर रखा और यह स्पष्ट किया कि खून और पानी साथ नहीं बह सकते.” उन्होंने अंत में कहा कि बलोच जनता को भारत के नेतृत्व से काफी उम्मीदें हैं और वे आशा भरी नजरों से भारत की ओर देख रहे हैं.

गौरतलब है कि बलोच अमेरिकन कांग्रेस (BAC) अमेरिका में पंजीकृत एक राजनीतिक संगठन है, जिसका उद्देश्य बलोचों के आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए संघर्ष को बढ़ावा देना और अमेरिका में बलोच प्रवासी समुदाय के सामाजिक-सांस्कृतिक एवं राजनीतिक अधिकारों की रक्षा करना है.

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