[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home World AI से बनी इस देश की एआई पॉलिसी 16 दिन में ही रद्द, फर्जी जर्नल और रेफरेंस से हुआ खुलासा

AI से बनी इस देश की एआई पॉलिसी 16 दिन में ही रद्द, फर्जी जर्नल और रेफरेंस से हुआ खुलासा

0
AI से बनी इस देश की एआई पॉलिसी 16 दिन में ही रद्द, फर्जी जर्नल और रेफरेंस से हुआ खुलासा
एआई ने फर्जी रेफरेंस दिए, जिसे सरकार के मंत्री ने स्वीकार किया.

South Africa AI Policy: तकनीक हर दौर में बदलती है. हाइटेक साइंस के इस दौर में तो ऐसा लगता है, जैसे हर महीने कुछ न कुछ नया आ रहा है. ऐसा ही नया टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट है एआई. यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस. हर देश इसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने में लगा है. अमेरिका, चीन, यूरोप, भारत सभी पूरा जोर लगा रहे हैं. दक्षिण अफ्रीका ने भी कोशिश की. लेकिन उसने अपनी पहली ड्राफ्ट राष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) नीति को प्रकाशित होने के केवल 16 दिनों में ही वापस ले लिया है. क्यों? क्योंकि जांच में पता चला कि दस्तावेज के कुछ हिस्सों में फर्जी और एआई-जेनरेटेड एकेडमिक रेफरेंस शामिल थे. यानी देश की एआई पॉलिसी भी एआई से जेनरेट की गई. 

दक्षिण अफ्रीका के कम्यूनिकेशन एंड डिजिटल टेक्नोलॉजी विभाग ने 10 अप्रैल को ‘ड्राफ्ट साउथ अफ्रीका नेशनल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पॉलिसी’ को सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी किया था. इसमें देश को एआई इनोवेशन में उभरते नेता के रूप में पेश किया गया था. लेकिन 16 दिनों बाद ही इस दस्तावेज को हटा लिया गया.

पॉलिसी में क्या था?

इस ड्राफ्ट नीति का उद्देश्य एक व्यापक AI शासन ढांचा तैयार करना था, जिसमें एक राष्ट्रीय AI आयोग, एथिक्स बोर्ड और नियामक प्राधिकरण के गठन के प्रस्ताव शामिल थे. इसमें निजी क्षेत्र में AI इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश को बढ़ावा देने के लिए टैक्स इंसेंटिव, ग्रांट और सब्सिडी की भी रूपरेखा दी गई थी, साथ ही तकनीक से जुड़े नैतिक, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों को भी संबोधित किया गया था.   

एआई ने ‘हैलुसिनेट’ किया

देश के संचार मंत्री सॉली मलात्सी ने पुष्टि की कि पॉलिसी में दिए गए 67 रेफरेंस में से कम से कम छह हैलुसिनेटेड थे. यानी वे या तो ऐसे एकेडमिक जर्नल्स की ओर इशारा करते थे जो अस्तित्व में ही नहीं हैं, या फिर ऐसे लेखों की ओर जो किसी वैलिड पब्लिकेशन में कभी प्रकाशित ही नहीं हुए. इसकी वजह से विश्वसनीयता और शासन को लेकर गंभीर चिंताएं उठीं. 

कैसे खुला मामला?

यह मामला तब सामने आया जब एक दक्षिण अफ्रीकी ब्रॉडकास्टर की जांच में संदर्भों में गड़बड़ी उजागर हुई. ब्रिटिश अखबार ‘द इंडिपेंडेंट’ की रिपोर्ट के अनुसार, साउथ अफ्रीकन जर्नल ऑफ फिलॉसफी, एआई एंड सोसाइटी और जर्नल ऑफ एथिक्स एंड सोशल फिलॉसफी जैसे प्रतिष्ठित जर्नल्स के संपादकों ने पुष्टि की कि जिन लेखों का हवाला दिया गया था, वे अस्तित्व में ही नहीं हैं.  

एआई ने क्या किया?

फर्जी रेफरेंस संभवतः चैट जीपीटी या गूगल जैमिनी जैसे टूल्स के जरिए जेनरेट किए गए थे. AI द्वारा बनाए गए इन संदर्भों ने न केवल स्रोत गढ़े, बल्कि विश्वसनीय जर्नल्स और शोधकर्ताओं के नाम से गलत तरीके से शोध को जोड़कर एक झूठी विश्वसनीयता का भ्रम पैदा किया. इस घटना ने साबित किया है कि जेनरेटिव AI की वजह से गलत सूचना, डीपफेक और डिजिटल पहचान के दुरुपयोग जैसे व्यापक जोखिम हैं.

ये भी पढ़ें:- भारत एक सिग्नेचर से रिलीज कर सकता है, लेकिन हम नहीं… पाकिस्तानी मंत्री ने तेल संकट पर खोली अपने देश की पोल 

ये भी पढ़ें:- चमत्कारिक… बेस्ट फादर का अवॉर्ड दो… चलती ट्रेन के नीचे बच्चे को बचाने के लिए लेटा रहा पिता, Video

दक्षिण अफ्रीका की साख को लगा झटका

मलात्सी ने कहा, ‘सबसे संभावित कारण यह है कि AI-जनित संदर्भों को बिना उचित सत्यापन के शामिल कर लिया गया. ऐसा नहीं होना चाहिए था.’ उन्होंने यह भी कहा कि इस चूक ने दक्षिण अफ्रीका की साख, विश्वसनीयता  को प्रभावित किया है. इस घटना ने दक्षिण अफ्रीका की एआई पॉलिसी वाली योजनाओं को झटका दिया है.

मंत्री ने माना कि यह समस्या केवल तकनीकी गलती नहीं, बल्कि मानव निगरानी की विफलता भी दर्शाती है. उन्होंने कहा, ‘यह अस्वीकार्य चूक साबित करती है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के उपयोग पर सतर्क मानवीय निगरानी कितनी आवश्यक है.’ उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इसके लिए जवाबदेही तय की जाएगी. सरकार अब इस ड्राफ्ट नीति को संशोधित कर फिर से सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी करने की तैयारी कर रही है.

Previous article धनबाद में ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ पर शिकंजा, पार्टी जिलाध्यक्ष की गाड़ी पकड़ी गई
Next article बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों के लिए राज्य सरकार का फैसला, इस एक्ट में होगा बदलाव
Avatar Of Anant Narayan Shukla
अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel