फांसी की सजा के बावजूद नहीं डरीं शेख हसीना, बोलीं- हर हाल में इसी साल लौटूंगी बांग्लादेश

Sheikh Hasina: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने साफ कहा है कि वह इसी साल अपने देश लौटेंगी, चाहे उन्हें मौत की सजा का सामना ही क्यों न करना पड़े. करीब दो साल पहले बांग्लादेश छोड़ने के बाद से वह भारत में रह रही हैं. इस बीच उनके खिलाफ कई मामले दर्ज हुए और एक विशेष अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई. इसके बावजूद हसीना का कहना है कि उन्हें किसी भी तरह का डर नहीं है और वह हर हाल में अपने देश वापस जाएंगी.

By Pritish Sahay | June 28, 2026 4:48 PM

Sheikh Hasina: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दावा किया है कि वो अपने वतन लौट जाएंगी. बीते करीब दो सालों से भारत में रह रहीं शेख हसीना ने एनडीटीवी न्यूज चैनल को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि वह इसी साल बांग्लादेश वापस जाएंगी. बांग्लादेश में अपने खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई और मौत की सजा पर उन्होंने कहा कि सजा का खौफ उन्हें फैसले से पीछे नहीं हटा सकता. शेख हसीना करीब दो साल पहले बांग्लादेश छोड़कर भारत आई थीं. तब से वह यहीं रह रही हैं. इस दौरान बांग्लादेश में उनके खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए. एक विशेष न्यायाधिकरण ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी मानते हुए मौत की सजा तक सुनाई है. हालांकि इस फैसले को हसीना ने पूरी तरह गलत और राजनीति से प्रेरित कहा है.

आवामी लीग को कमजोर करने की कोशिश- शेख हसीना

अपने इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा कि उनके खिलाफ जो फैसला आया है, वह न्याय नहीं बल्कि राजनीतिक बदले की भावना का नतीजा है. उनके मुताबिक यह सब उनकी पार्टी अवामी लीग को कमजोर करने और नेतृत्व खत्म करने की कोशिश है. उन्होंने कहा कि अवामी लीग सिर्फ एक कागजी संगठन नहीं है, बल्कि एक मजबूत जनआंदोलन और ताकत है, इसलिए ऐसी कोशिशें पहले भी नाकाम रही हैं और आगे भी सफल नहीं होंगी.

शेख हसीना ने कहा- मुझे मौत का कोई डर नहीं

शेख हसीना ने कहा कि उन्हें मौत का कोई डर नहीं है. उन्होंने याद दिलाया कि साल 1975 में उनके पिता और बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान की हत्या कर दी गई थी. उस हमले में उनके परिवार के अधिकांश सदस्य भी मारे गए थे. इसके अलावा 21 अगस्त को उन पर ग्रेनेड हमला भी हुआ था, लेकिन वह हर बार बचीं और राजनीति में सक्रिय रहीं. उन्होंने कहा कि अपने पूरे राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई साजिशों का सामना किया है, लेकिन कभी हार नहीं मानी. जनता के समर्थन से वह पांच बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं और देश के विकास के लिए काम किया. उनका कहना है कि उनका जीवन बांग्लादेश की जनता, लोकतंत्र और विकास के लिए समर्पित रहा है. इसी वजह से वह हर हाल में अपने देश लौटेंगी.

यहां पढ़ें दुनिया की अन्य अहम खबरें

शेख हसीना ने मौजूदा सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

शेख हसीना ने बांग्लादेश की मौजूदा व्यवस्था पर भी कई सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लोकतंत्र कमजोर हो चुका है, कानून का शासन नहीं बचा है और आम लोगों की सुरक्षा भी खतरे में है. उनके अनुसार अर्थव्यवस्था भी कमजोर हुई है और अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले बढ़े हैं. उन्होंने कहा कि अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगातार कार्रवाई की जा रही है और उन्हें राजनीतिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है. हसीना का दावा है कि जब उनकी सरकार सत्ता में थी, तब देश में स्थिरता, विकास और लोगों की सुरक्षा बेहतर थी.

अल्पसंख्यकों पर हमलों को बताया देश पर हमला

शेख हसीना ने अपने इंटरव्यू में कहा कि बांग्लादेश में किसी भी अल्पसंख्यक समुदाय पर हमला केवल किसी एक वर्ग पर हमला नहीं, बल्कि पूरे देश और उसकी आजादी की भावना पर हमला है. उनका कहना है कि सभी नागरिकों की सुरक्षा तय करना किसी भी सरकार की जिम्मेदारी होती है. शेख हसीना ने इंटरव्यू के अंत में दोहराया कि चाहे उनके खिलाफ कितनी भी कानूनी या राजनीतिक कार्रवाई क्यों न हो, वह अपने फैसले पर कायम हैं. उनका कहना है कि बांग्लादेश की जनता का समर्थन उनके साथ है और इसी भरोसे के साथ वह इसी साल अपने देश लौटने का प्रयास करेंगी.

Also Read: सेशेल्स से पीएम मोदी का संदेश: हिंद महासागर में सुरक्षा के साथ आर्थिक प्रगति भी जरूरी

बोलीं शेख हसीना- मेरा दिल आज भी बांग्लादेश में ही है

शेख हसीना ने कहा कि लंबे समय से उनके जीवन में निजी समय जैसी कोई चीज नहीं रही. उन्होंने अपना पूरा जीवन बांग्लादेश की जनता को समर्पित कर दिया है. उन्होंने याद किया कि 1975 में अपने पूरे परिवार को खोने के बाद भी उन्हें सालों तक निर्वासन में रहना पड़ा था. बाद में वे देश लौटीं और लोकतंत्र की बहाली के लिए संघर्ष किया. उन्होंने कहा कि आज फिर बांग्लादेश कठिन दौर से गुजर रहा है और उन्हें सबसे अधिक पीड़ा इस बात की है कि वह ऐसे समय में अपने देश में मौजूद नहीं हैं. हसीना ने कहा कि उनका परिवार से सामान्य संपर्क बना रहता है, लेकिन उनका मन हमेशा बांग्लादेश में रहता है- उस मिट्टी में जहां उनके पिता दफन हैं और जहां उनके परिवार का रक्त मिला हुआ है. उन्होंने कहा कि देश से दूर रहकर रोज अपने नेताओं, कार्यकर्ताओं और पीड़ित परिवारों की तकलीफों के बारे में सुनना बेहद कष्टदायक है.

जनता की ताकत पर दोबारा खड़ी होगी आवामी लीग- शेख हसीना

हसीना ने कहा कि आज उनके लिए निजी जीवन से अधिक महत्वपूर्ण बांग्लादेश के लोगों के अधिकार हैं. वह विदेश में रहते हुए भी रोज़ देश की स्थिति पर नजर रखती हैं, कार्यकर्ताओं से संपर्क में रहती हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने बांग्लादेश में लोकतंत्र और मानवाधिकारों की स्थिति उठाने की कोशिश करती हैं. अंत में उन्होंने विश्वास जताया कि बांग्लादेश की जनता एक बार फिर लोकतंत्र बहाल करेगी और अवामी लीग जनता की ताकत के दम पर दोबारा खड़ी होगी. उन्होंने कहा कि वह अपने अंतिम दिन तक इस संघर्ष के साथ जुड़ी रहेंगी.