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Home World Saudi Arabia : गुनाह बहुत बड़ा नहीं, फिर भी फांसी! सऊदी अरब ने 11 महीने में 100 से ज्यादा विदेशियों को लटकाया

Saudi Arabia : गुनाह बहुत बड़ा नहीं, फिर भी फांसी! सऊदी अरब ने 11 महीने में 100 से ज्यादा विदेशियों को लटकाया

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Saudi Arabia : गुनाह बहुत बड़ा नहीं, फिर भी फांसी! सऊदी अरब ने 11 महीने में 100 से ज्यादा विदेशियों को लटकाया
Saudi arabia hang to death date

Saudi Arabia: सऊदी अरब में विदेशियों को भी फांसी दी जाती है. जी हां…आपने सही सुना. दरअसल, साल 2024 में 100 से ज्यादा विदेशियों को मौत की सजा दी गई है. पिछले सालों की तुलना में ये ज्यादा है. इस साल अब तक 101 तक यह आंकड़ा पहुंच चुका है. 16 नवंबर को यमनी नागरिक को सजा-ए-मौत दी गई, जिसपर ड्रग्स तस्करी का आरोप था. मानवाधिकार संगठन की ओर से यह आंकड़ा दिया गया है. सऊदी अरब में सजा दिए जाने के कानून पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

साल 2024 में फांसी के आंकड़ों पर गौर करें तो सजा पाने वाले विदेशी नागरिकों की संख्या पिछले तीन सालों में तीन गुना बढ़ी नजर आ रही है. 2022 और 2023 में क्रमशः 34 विदेशियों को फांसी पर लटकाया गया था. इस साल बढ़कर यह 100 से ज्यादा हो गई, जबकि अभी नवंबर के महीने में कुछ दिन शेष हैं. इसके बाद दिसंबर का पूरा महीना बचा हुआ है.

फांसी की सजा से ESOHR चिंतित

यूरोपियन-सऊदी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स (ESOHR) के मुताबिक,आंकड़ा चिंता बढ़ा रहा है. संगठन के कानूनी निदेशक ताहा अल-हज्जी ने मामले पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि ऐसा पहली बार है जब सऊदी अरब ने एक ही साल में इतनी बड़ी संख्या में विदेशियों को फांसी दे दी. ESOHR के अनुसार, सऊदी अरब में विदेशी कैदियों को न्याय मिलने में बहुत सी दिक्कत आती है. कई कैदियों को बड़े ड्रग तस्करों का शिकार बनाया जाता है. उनकी गिरफ्तारी की जाती है. आरोपी को फांसी देने तक कानून के उल्लंघन होते हैं.

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किन देशों के नगरिकों को दी गई फांसी

आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान, यमन, सीरिया, नाइजीरिया, मिस्र, जॉर्डन और इथियोपिया जैसे देशों के नागरिकों को इस साल फांसी पर लटकाया गया. ज्यादातर ड्रग्स तस्करी के आरोप में इन्हें सजा दी गई.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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