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Home World अमेरिका के दुश्मन को मिला रूस का साथ, मॉस्को ने वाशिंगटन को दी सीधी चेतावनी

अमेरिका के दुश्मन को मिला रूस का साथ, मॉस्को ने वाशिंगटन को दी सीधी चेतावनी

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अमेरिका के दुश्मन को मिला रूस का साथ, मॉस्को ने वाशिंगटन को दी सीधी चेतावनी
रूस और वेनेजुएला की चेतावनी; कैरिबियन में अमेरिकी कार्रवाई के 'दूरगामी परिणाम' हो सकते हैं.

Russia Venezuela caution US moves in the Caribbean: एक ओर रूस यूक्रेन युद्ध के लिए अमेरिका बेसब्री से प्रयास कर रहा है, ताकि दोनों देशों के बीच शांति स्थापित की जा सके. वहीं दूसरी ओर कैरिबियन क्षेत्र एक बार फिर बड़ी शक्तियों की रणनीतिक खींचतान का केंद्र बनता जा रहा है. अमेरिका द्वारा इस इलाके में सैन्य गतिविधियां तेज किए जाने के बीच रूस और वेनेजुएला ने वाशिंगटन के कदमों को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है. दोनों देशों का कहना है कि अमेरिकी कार्रवाई न केवल तनाव को बढ़ा रही है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को भी जोखिम में डाल सकती है. जैसे-जैसे कैरिबियाई क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी मजबूत हो रही है, रूस और वेनेजुएला ने इसे उकसावे भरा कदम करार देते हुए इसकी आलोचना की है. रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, मॉस्को और कराकास ने क्षेत्र में अमेरिकी गतिविधियों को लेकर गहरी चिंता जताई है.

रूसी विदेश मंत्रालय के बयान में बताया गया कि विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और वेनेजुएला के विदेश मंत्री इवान गिल पिंटो के बीच हुई बातचीत में अमेरिकी सैन्य जमावड़े पर गंभीर चर्चा हुई. दोनों नेताओं ने चेताया कि वाशिंगटन की ये कार्रवाइयां पूरे कैरिबियन क्षेत्र में अस्थिरता फैला सकती हैं और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों के लिए सीधा खतरा बन सकती हैं. बयान में कहा गया कि कैरिबियन सागर में अमेरिका द्वारा उठाए जा रहे कदमों की तीव्रता चिंता का विषय है, क्योंकि इनके दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं और वैश्विक समुद्री यातायात बाधित हो सकता है.

रूस-वेनेजुएला द्विपक्षीय के साथ UN में मिलकर काम करेंगे

क्रेमलिन ने वेनेजुएला सरकार के प्रति अपना पूरा समर्थन दोहराते हुए कहा कि दोनों देश न केवल द्विपक्षीय स्तर पर, बल्कि संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंचों पर भी मिलकर काम करेंगे. इसका उद्देश्य देशों की संप्रभुता की रक्षा करना और उनके आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप को रोकना है. दोनों का यह सख्त रुख ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के नाम पर वेनेजुएला के खिलाफ अपनी सैन्य और रणनीतिक गतिविधियां बढ़ा रहा है. वाशिंगटन का आरोप है कि कराकास ड्रग तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण नहीं कर पा रहा, जबकि वेनेजुएला इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है.

अमेरिका ने तैनात किया है जेराल्ड आर. फोर्ड

तनाव को और बढ़ाने वाली कड़ी में अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए बताया गया है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीआईए को वेनेजुएला के भीतर गुप्त अभियान चलाने की अनुमति दी थी. नवंबर में पेंटागन ने यह भी ऐलान किया था कि अमेरिकी नेवी का एयरक्राफ्ट कैरियर ‘जेराल्ड आर. फोर्ड’ कैरिबियन क्षेत्र में तैनात किया गया है.

बीते महीनों में वेनेजुएला के पास किए कई हमले

बीते महीनों में अमेरिका ने ड्रग विरोधी अभियानों के तहत लैटिन अमेरिका के तट के पास कई नौकाओं को नष्ट किया है, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है. इसके साथ ही वेनेजुएला के हवाई क्षेत्र को बंद करने और प्रतिबंधित तेल टैंकरों पर रोक लगाने जैसे कदम भी उठाए गए हैं. बीते कुछ महीनों में अमेरिका ने लैटिन अमेरिका के तट के पास 20 से अधिक नौकाओं को ड्रग विरोधी अभियानों के नाम पर नष्ट किया है, जिनमें लगभग 100 लोगों की मौत हुई है. 

इन तमाम घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देते हुए रूस ने अमेरिका से संयम बरतने की अपील की है. रूसी विदेश मंत्रालय के लैटिन अमेरिका विभाग के प्रमुख अलेक्जेंडर श्चेतिनिन ने कहा कि रूस को उम्मीद है कि अमेरिकी प्रशासन वेनेजुएला से जुड़े हालात को लेकर व्यावहारिक रवैया अपनाएगा. उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी तरह की चूक पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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