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Home World रूस से आजाद हुआ खेरसन अब अलग मुसीबत में, कभी 2,80,000 लोगों का घर रहा, अब सड़कों पर पसरा है सन्नाटा

रूस से आजाद हुआ खेरसन अब अलग मुसीबत में, कभी 2,80,000 लोगों का घर रहा, अब सड़कों पर पसरा है सन्नाटा

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रूस से आजाद हुआ खेरसन अब अलग मुसीबत में, कभी 2,80,000 लोगों का घर रहा, अब सड़कों पर पसरा है सन्नाटा
रूसी कब्जे से मुक्ति के लिए संघर्ष कर रहे यूक्रेनी शहर खेरसॉन को एक अलग चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. फोटो- एक्स (Hope For Ukraine)

Russia Ukraine War: यूक्रेन के खेरसॉन की अधिकांश सड़कों पर अब सन्नाटे पसरे हुए हैं. नौ महीने के रूसी कब्जे के खत्म होने और आजादी के तीन साल बीत जाने के बावजूद, वह शहर जो कभी उत्साह और उमंग से भर उठता था, अब शांत और सूना लग रहा है. 11 नवंबर 2022 को दक्षिणी बंदरगाह शहर के मुख्य चौराहे में बड़ी भीड़ जमा हुई थी लोग नीले-पीले झंडे लहरा रहे थे और उन सैनिकों को गले लगा रहे थे जिन्होंने महीनों की रूसी मौजूदगी के बाद उन्हें आजाद कराया था. तब लोगों को लगा था कि सबसे कठिन वक्त बीत गया. मगर युद्ध ने अपनी शक्ल बदल ली है.

द्नीप्रो नदी के उस पार से रूसी ताकतें फिर से हमले करती रहती हैं. अब ड्रोन शहर के ऊपर बार-बार मंडराते हैं. इसके बावजूद, जो लोग यहीं बने हुए हैं, वे कहते हैं कि सुनसान हालात में रहना भी रूस के कब्जे में रहने से बेहतर है. हाल ही में हॉलीवुड अभिनेत्री एंजेलिना जोली की यात्रा ने शहरवासियों का मनोबल बढ़ाया. तस्वीरों में उन्हें बेसमेंट और संकरी, जालदार गलियों में चलते देखा गया, ये जाल ड्रोन से सुरक्षा के लिए लगाए गए हैं.

https://twitter.com/Breking911World/status/1987469114382696465

शहर में पहले जैसी खुशहाली नहीं

जो शहर कभी लगभग 2,80,000 लोगों का घर था, अब पहले जैसी खुशहाली नहीं दिखती. रोजाना धमाकों की आवाजें सुनाई देती हैं. ओल्हा कोमानित्स्का (55) का छोटा-सा फूलों का स्टॉल खेरसॉन के बमग्रस्त इलाके में अलग-सा नजर आता है. पहले जहाँ भीड़ लगी रहती थी, अब स्टॉल पर मुश्किल से कुछ ग्राहक आते हैं. वह बताती हैं, “अब शायद ही कोई फूल लेता है. हम बस यहां किसी तरह गुजारा कर रहे हैं.”

करीब 30 साल तक कोमानित्स्का और उनके पति ने आसपास के ग्रामीण इलाकों में फूल उगाए. अब उनके ग्रीनहाउस टूट चुके हैं और वही छोटा स्टॉल उनकी मेहनत की आखिरी निशानी बचा है. वह अपने पति के शोक में सिर पर काला दुपट्टा बांधे बैठती हैं. पति की मौत दिल की बीमारी से हुई थी, पर उनका मानना है कि युद्ध ने उनकी सेहत बिगाड़ दी. पति के बारे में बोलते हुए उनकी आँखें नम हो जाती हैं.

दिन प्रति दिन इंपॉर्टेंट हो रहा ये क्षेत्र

मैक्स (28) सुरक्षा कारणों से पूरा नाम नहीं बताते. वह 310वीं मरीन इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर बटालियन में तैनात हैं. उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के क्षेत्र में ढाई साल काम किया है और यह क्षेत्र दिन-ब-दिन अधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है. उनका फ्रंट-लाइन पोस्ट किसी प्रोग्रामर के दफ्तर जैसा दिखता है: कंप्यूटर स्क्रीन पर नक्शे और डेटा की धाराएँ चल रही हैं और पड़ोसी यूनिटों की आवाजें लगातार सुनाई देती हैं. मैक्स कहते हैं कि उनका काम लक्ष्यों की पहचान करना और यह सुनिश्चित करना है कि वे अपने मिशन में विफल रहें, चाहे वे ड्रोन हों जो नागरिकों, बुनियादी संरचना, वाहनों या मानवीय सहायता काफिलों को निशाना बना रहे हों.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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