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Home World न्यूक्लियर ट्रायड क्या है, जिसे पुतिन मजबूत करना चाहते हैं, जेलेंस्की बोले; थर्ड वर्ल्ड वार शुरू

न्यूक्लियर ट्रायड क्या है, जिसे पुतिन मजबूत करना चाहते हैं, जेलेंस्की बोले; थर्ड वर्ल्ड वार शुरू

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न्यूक्लियर ट्रायड क्या है, जिसे पुतिन मजबूत करना चाहते हैं, जेलेंस्की बोले; थर्ड वर्ल्ड वार शुरू
न्यूक्लियर ट्रायड की मजबूती दुनिया में हथियार रेस बढ़ाएगी.

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूस के ‘डिफेंडर ऑफ द फादरलैंड डे’ के अवसर पर एक ऐसा भाषण दिया, जिसने पश्चिमी देशों को दहशत में डाल दिया है. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी (New START) की मियाद खत्म होने के बीच देश की परमाणु ताकत को मजबूत करना ‘पूर्ण प्राथमिकता’ है. पुतिन ने अपने संदेश में कहा कि परमाणु त्रयी (न्यूक्लियर ट्रायड) का विकास रूस की सुरक्षा की गारंटी देता है. इस बयान पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति पर तीसरा विश्व युद्ध शुरू करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि मॉस्को के आक्रमण को रोकना पूरी दुनिया के लिए जीत होगी.

पुतिन ने कहा न्यूक्लियर ट्रायड एक प्रभावी रणनीतिक प्रतिरोध व वैश्विक शक्ति संतुलन सुनिश्चित करता है. यह हमारी पूर्ण प्राथमिकता बना रहेगा. उन्होंने यह भी कहा कि रूस अपनी सेना और नौसेना को लगातार मजबूत करता रहेगा और यूक्रेन में लगभग चार वर्षों से चल रहे संघर्ष से मिले सैन्य अनुभव का उपयोग करेगा. पुतिन के मुताबिक, सशस्त्र बलों की सभी शाखाओं में सुधार किया जाएगा.इसमें उनकी युद्ध-तत्परता, गतिशीलता और किसी भी परिस्थिति, यहां तक कि सबसे कठिन हालात में भी, काम करने की क्षमता शामिल है.

क्या है न्यूक्लियर ट्रायड? 

न्यूक्लियर ट्रायड (Nuclear Triad) का मतलब है किसी देश की परमाणु ताकत को तीन अलग-अलग तरीकों में बांटना. इसमें जमीन से दागी जाने वाली परमाणु मिसाइलें, समुद्र में तैनात परमाणु मिसाइलों से लैस पनडुब्बियां और हवा से हमला करने वाले परमाणु बमवर्षक विमान शामिल होते हैं. सरल शब्दों में कहें तो यह जमीन, समुद्र और हवा से परमाणु हमला करने की क्षमता.

कोल्ड वॉर के दौर में यह व्यवस्था अमेरिका की सैन्य रणनीति का बहुत अहम हिस्सा थी. कुछ हद तक सोवियत संघ ने भी इसे अपनाया था. उस समय अमेरिका और सोवियत संघ के बीच हथियारों की होड़ चल रही थी और दोनों ही पक्ष अपने परमाणु हथियारों को ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी बनाना चाहते थे.

इस ट्रायड के पीछे मूल सोच यह थी कि अगर परमाणु हथियार केवल एक ही जगह या एक ही सिस्टम पर निर्भर हों, तो दुश्मन एक बड़े हमले में उन्हें नष्ट कर सकता है. लेकिन जब वही हथियार जमीन, समुद्र और हवा में फैले हों, तो दुश्मन के लिए सभी को एक साथ खत्म करना लगभग असंभव हो जाता है. इसका मतलब यह हुआ कि अगर दुश्मन पहला हमला भी कर दे, तब भी जवाबी हमला करना संभव रहेगा. इसे ‘सेकंड स्ट्राइक क्षमता’ कहा जाता है.

इसी सोच से ‘म्यूचुअली एश्योर्ड डिस्ट्रक्शन’ यानी आपसी सुनिश्चित विनाश की अवधारणा पैदा हुई. इसका अर्थ यह था कि अगर कोई देश पहला परमाणु हमला करेगा, तो भी वह खुद विनाश से नहीं बच पाएगा, क्योंकि दूसरा देश जवाबी हमला करने में सक्षम रहेगा. इस डर ने दोनों पक्षों को सीधे युद्ध से रोकने में बड़ी भूमिका निभाई.

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कौन से हथियार कहां रहते हैं?

न्यूक्लियर ट्रायड के जमीनी हिस्से में अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल होती हैं. ये बेहद लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें थीं, जो हजारों किलोमीटर दूर तक परमाणु हथियार पहुंचा सकती थीं. समुद्री हिस्से में परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां (सबमरीन लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल) होती थीं. इन पनडुब्बियों की सबसे बड़ी ताकत यह थी कि ये महीनों तक समुद्र में छिपी रह सकती थीं और दुश्मन को पता भी नहीं चलता था कि वे कहां हैं. हवाई हिस्से में बड़े रणनीतिक बमवर्षक विमान शामिल थे, जो परमाणु बम या मिसाइलें लेकर दुश्मन के इलाके तक उड़ान भर सकते थे. इन विमानों का फायदा यह था कि इन्हें आखिरी समय में वापस भी बुलाया जा सकता था, यानी ये कुछ हद तक लचीलापन देते थे.

किन देशों के पास कितने न्यूक्लियर हथियार?

रूस के पास आज के समय में दुनिया में सबसे ज्यादा 6257 न्यूक्लियर हथियार हैं. एक समय में उसके पास 20 हजार से ज्यादा न्यूक्लियर वीपन थे. 2020 के बाद से इसमें भारी कमी आई है. हालांकि, अब भी उसके पास दुनिया में सबसे ज्यादा विनाशक हथियार है. रूस के बाद दूसरे नंबर पर अमेरिका है, जिसके पास 5550 एटम बम हैं. वहीं चीन- 600+, फ्रांस- 300, ब्रिटेन- 225, भारत- 180 और पाकिस्तान- 170 हथियारों के साथ क्रमशः नीचे के स्थानों पर हैं. इनके अलावा इजरायल और उत्तर कोरिया 90 और 50 परमाणु हथियारों के साथ इस लिस्ट में शामिल हैं.

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भारत और चीन के पास भी है न्यूक्लियर ट्रायड

शीत युद्ध खत्म होने के बाद परमाणु हथियारों की संख्या में काफी कटौती हुई, लेकिन इसके बावजूद न्यूक्लियर ट्रायड की अवधारणा पूरी तरह खत्म नहीं हुई. आज भी यह कई देशों की परमाणु रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और परमाणु संतुलन बनाए रखने का एक भरोसेमंद तरीका माना जाता है. माना जाता है अमेरिका और रूस के अलावा चीन, यूके, फ्रांस और भारत के पास भी न्यूक्लियर ट्रायड है. 

न्यू स्टार्ट ट्रीटी खत्म होने के बाद आया पुतिन का बयान

पुतिन का यह बयान ऐसे समय आया है, जब 1970 के दशक के बाद पहली बार दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियां रूस और अमेरिका किसी भी हथियार नियंत्रण समझौते से बंधी नहीं हैं. New START Treaty 5 फरवरी को समाप्त हो गई. हालांकि रूस ने यह कहा है कि जब तक पेंटागन भी ऐसा करता रहेगा, वह ‘जिम्मेदाराना’ रुख अपनाते हुए तय सीमाओं का सम्मान करेगा, लेकिन परमाणु त्रयी (Nuclear Triad) को मजबूत करने की पुतिन की प्रतिबद्धता संभावित तनाव बढ़ने का संकेत देती है.

जेलेंस्की बोले- पुतिन तीसरा विश्व युद्ध शुरू कर चुके

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बीबीसी को दिए गए एक इंटरव्यू में जेलेंस्की ने कहा, ‘आज हम इस युद्ध को रोकने की बात कर रहे हैं. मेरा मानना है कि आज पुतिन को रोकना और उन्हें यूक्रेन पर कब्जा करने से रोकना पूरी दुनिया के लिए जीत है, क्योंकि पुतिन यूक्रेन पर ही नहीं रुकेंगे.’ 

जेलेंस्की ने कहा कि उनके मुताबिक पुतिन तीसरा विश्व युद्ध पहले ही शुरू कर चुके हैं. उन्होंने कहा, ‘सवाल यह है कि वह कितना इलाका कब्जा कर पाएंगे और उन्हें कैसे रोका जाए. इसलिए मेरा विश्वास है और मैं लंबे समय से ऐसा मानता आया हूं कि पुतिन इस युद्ध की शुरुआत कर चुके हैं. हमें इसे एक व्यापक, पूर्ण पैमाने के तीसरे विश्व युद्ध में बदलने से रोकना होगा.’

जब उनसे पूछा गया कि क्या यूक्रेन रूस द्वारा कब्जाए गए सभी इलाकों को वापस लेने को लेकर अब भी प्रतिबद्ध है, तो जेलेंस्की ने जवाब दिया, ‘किसी भी स्थिति में हम इसे हासिल करेंगे. यह बिल्कुल स्पष्ट है. यह केवल समय का सवाल है.’ हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि ‘अगर आज ऐसा किया गया, तो इसकी कीमत बेहद भारी होगी. लाखों लोगों की जान जा सकती है, क्योंकि रूसी सेना बड़ी है और हम ऐसे कदमों की कीमत समझते हैं.’ 

जेलेंस्की ने जोर देकर कहा कि अंत में यूक्रेन की जीत होगी. उन्होंने कहा, ‘लोगों के बिना जमीन का क्या मतलब है? सच कहूं तो कुछ भी नहीं.’ उनके मुताबिक, देश की 1991 की सीमाओं की बहाली ‘न्याय की जीत’ होगी और इसके लिए बाहरी मदद जरूरी है. उन्होंने कहा, ‘हमारे पास पर्याप्त हथियार नहीं हैं. यह केवल हम पर निर्भर नहीं करता.’

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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