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Home World खामेनेई की मौत से डरे पुतिन! इजरायल की कारिस्तानी ने रूस को जगाया, इंटरनेट से कटा क्रेमलिन का नेटवर्क

खामेनेई की मौत से डरे पुतिन! इजरायल की कारिस्तानी ने रूस को जगाया, इंटरनेट से कटा क्रेमलिन का नेटवर्क

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खामेनेई की मौत से डरे पुतिन! इजरायल की कारिस्तानी ने रूस को जगाया, इंटरनेट से कटा क्रेमलिन का नेटवर्क
व्लादिमीर पुतिन.

Putin Security AI Threat: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और आधुनिक निगरानी तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल ने रूस की सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. इसी चिंता के बीच क्रेमलिन ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उनके शीर्ष सहयोगियों की सुरक्षा से जुड़े एक विशेष निगरानी तंत्र में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं. रिपोर्टों के मुताबिक, संभावित साइबर घुसपैठ और एआई आधारित ट्रैकिंग के खतरे को देखते हुए इस सिस्टम को अस्थायी रूप से बंद किया गया और बाद में अतिरिक्त सुरक्षा उपायों के साथ दोबारा सक्रिय किया गया.

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 8 जून को क्रेमलिन ने राष्ट्रपति पुतिन और वरिष्ठ अधिकारियों की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाले विशेष निगरानी नेटवर्क के कुछ हिस्सों पर प्रतिबंध लगा दिया था. रिपोर्ट में कहा गया कि रूसी इंजीनियरों ने इस सीसीटीवी सिस्टम की जांच की. इसके बाद सुरक्षा खामियों को दूर करने के बाद उसे फिर से चालू किया , लेकिन इस बार कुछ अलग था. 

सीसीटीवी नेटवर्क के इंटरनेट कनेक्शन को पूरे मॉस्को शहर के 30000 कैमरों से अलग करते हुए केवल क्रेमलिन और उसके जुड़े कैमरों से हटाया गया. ताकि कोई इसे हैक न कर सके.  रूसी सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि एआई आधारित विश्लेषण उपकरणों का इस्तेमाल करके विदेशी खुफिया एजेंसियां वरिष्ठ नेताओं की गतिविधियों, यात्रा कार्यक्रमों और बैठकों की जानकारी जुटा सकती हैं. 

इजराइल-ईरान घटनाक्रम से बढ़ी रूस की चिंता

मॉस्को की चिंता इसलिए बढ़ी, क्योंकि इजराइली खुफिया एजेंसियों ने फरवरी में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को निशाना बनाने के लिए तेहरान के ट्रैफिक कैमरा नेटवर्क में सेंध लगाई थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल की एआई आधारित सॉफ्टवेयर प्रणाली “ब्रीफकैम” का इस्तेमाल कर लाखों घंटों के वीडियो फुटेज का विश्लेषण किया गया. 

तेहरान और अन्य शहरों की सुरक्षा व्यवस्थाओं तथा गतिविधियों के पैटर्न का अध्ययन किया गया. इसके बाद सटीक जानकारी के आधार पर ही अटैक किए गए. 28 फरवरी को इजरायल ने ईरान के कई शहरों को निशाना बनाया, जिसमें सर्वोच्च नेता अली खामेनेई समेत कई सैन्य अधिकारी भी अलग-अलग जगह मारे गए. 

रूसी सर्वरों पर मिला वही सॉफ्टवेयर 

रूस की संघीय सुरक्षा सेवा (एफएसबी) को आशंका है कि इसी तरह की तकनीक का इस्तेमाल रूसी नेतृत्व की निगरानी के लिए भी किया जा सकता है. रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि जिस ब्रीफकैम सॉफ्टवेयर का नाम ईरान से जुड़ी घटनाओं में सामने आया था, उसके कुछ अंश रूसी सर्वरों पर भी पाए गए.

इसके अलावा यूक्रेन द्वारा पहले निगरानी कैमरों और मोबाइल डेटा का उपयोग सैन्य लक्ष्यों की पहचान के लिए किए जाने की घटनाओं ने भी रूसी एजेंसियों की चिंताएं बढ़ा दीं. वहीं हाल के दिनों में रूस के टॉप जनरल की भी गाड़ी में हुए ब्लास्ट के दौरान मौत हुई है. लेकिन यह अकेली घटना नहीं थी, इसी तरह या इससे मिलती जुलते अटैक में कुछ सैन्य अधिकारी मारे जा चुके हैं. इसी वजह से क्रेमलिन ने अपने सुरक्षा ढांचे की समीक्षा शुरू की.

विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने की कोशिश

रूस यूक्रेन युद्ध के बाद से विदेशी तकनीकी प्लेटफॉर्म पर निर्भरता कम करने की नीति पर काम कर रहा है. विश्लेषकों का मानना है कि मॉस्को अब निगरानी प्रणालियों को केवल सुरक्षा उपकरण नहीं, बल्कि संभावित कमजोरी के रूप में भी देखने लगा है. रिपोर्ट के मुताबिक, एफएसबी प्रमुख अलेक्जेंडर बोर्तनिकोव ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि निगरानी कैमरा प्रणालियों में मौजूद सॉफ्टवेयर कमजोरियों या बैकडोर का इस्तेमाल विदेशी एजेंसियां कर सकती हैं.

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घंटों का काम सेकेंड्स में कर रहा है एआई

फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) निगरानी तकनीक में बड़ा बदलाव ला रहा है. पहले जहां वीडियो विश्लेषण मुख्य रूप से चेहरे, वाहन या लाइसेंस प्लेट की पहचान तक सीमित था, वहीं अब एआई विशाल वीडियो डेटाबेस में किसी व्यक्ति के व्यवहार और गतिविधियों की भी खोज कर सकता है. साधारण भाषा में दिए गए निर्देशों के आधार पर एआई हजारों घंटों के फुटेज में संदिग्ध गतिविधियों को खोजने में सक्षम है. 

आधुनिक एआई केवल सीसीटीवी फुटेज तक सीमित नहीं है. यह सोशल मीडिया गतिविधियों, संचार रिकॉर्ड, स्मार्ट डिवाइस डेटा और यात्रा संबंधी जानकारी को जोड़कर किसी व्यक्ति की दिनचर्या, संपर्कों और गतिविधियों का विस्तृत डिजिटल प्रोफाइल तैयार कर सकता है. लक्ष्य की पहचान होने के बाद एआई उसके महीनों पुराने रिकॉर्ड को भी तेजी से व्यवस्थित कर एक तरह की डिजिटल फाइल बना सकता है.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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