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Home World अमेरिका के साथ पीस डील पर नाराज हुई ईरानी जनता, अपनों के खिलाफ सड़कों पर उतरी; अराघची-गालिबाफ का इस्तीफा मांगा

अमेरिका के साथ पीस डील पर नाराज हुई ईरानी जनता, अपनों के खिलाफ सड़कों पर उतरी; अराघची-गालिबाफ का इस्तीफा मांगा

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अमेरिका के साथ पीस डील पर नाराज हुई ईरानी जनता, अपनों के खिलाफ सड़कों पर उतरी; अराघची-गालिबाफ का इस्तीफा मांगा
झंडे के साथ सड़कों पर ईरानी जनता. फोटो- स्क्रीनग्रैब.

Iran US Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की चर्चा तेज होते ही ईरान के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. लोगों ने सड़कों पर उतरकर विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ के खिलाफ नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों का मानना है कि प्रस्तावित समझौता ईरान के राष्ट्रीय हितों को कमजोर कर सकता है. यह विरोध ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच पीस डील पर जल्द हस्ताक्षर हो सकते हैं. हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने अभी किसी निश्चित समयसीमा की पुष्टि करने से परहेज किया है.

मशहद में सबसे ज्यादा दिखा विरोध

उत्तर-पूर्वी ईरान के शहर मशहद में विदेश मंत्रालय के एक कार्यालय के बाहर दर्जनों लोग जमा हुए. ईरानी समाचार एजेंसी फर्स द्वारा साझा किए गए वीडियो में काले चादर पहनी महिलाएं लाल और काले झंडे लहराती नजर आईं. प्रदर्शन के दौरान विदेश मंत्री के खिलाफ जमकर नारे लगाए गए.

रिपोर्ट के मुताबिक, भीड़ ने ‘अराघची मुर्दाबाद, समझौता करने वाले को शर्म आनी चाहिए’, ‘अराघची, झुकना बंद करो’ और ‘देश के साथ समझौता करने वाले अराघची मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए. यह प्रदर्शन उस समय हुआ जब अब्बास अराघची ने सरकारी टेलीविजन को दिए एक साक्षात्कार में प्रस्तावित समझौते पर चर्चा की थी.

तेहरान समेत कई शहरों में प्रदर्शन

रिपोर्ट्स के अनुसार, राजधानी तेहरान और अन्य कई इलाकों में भी समझौते के विरोध में प्रदर्शन हुए. वीडियो में प्रदर्शनकारी अमेरिका के साथ बातचीत के लिए सीधे तौर पर अब्बास अराघची को जिम्मेदार ठहराते दिखाई दिए. प्रदर्शनकारियों ने ‘समझौता करने वाले, इस्तीफा दो’ और ‘समझौतावादी मुर्दाबाद’ जैसे नारे भी लगाए.

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चिंता

लोगों का मानना है कि प्रस्तावित डील ईरान के हितों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं करती. उनका मानना है कि इससे होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की रणनीतिक पकड़ कमजोर पड़ सकती है. उनका आरोप है कि समझौता हासिल करने के लिए ईरानी वार्ताकार अमेरिका के सामने जरूरत से ज्यादा रियायतें दे रहे हैं.

अराघची ने क्या कहा था?

शुक्रवार को सरकारी टेलीविजन को दिए इंटरव्यू में विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि बातचीत के तहत तैयार हो रहा समझौता ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने का रास्ता खोल सकता है. उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का संचालन अब पहले जैसा नहीं रहेगा. इसका अर्थ लोगों ने यह लगाया कि होर्मुज खुल जाएगा. हालांकि, अराघची ने यह भी कहा कि यह समुद्री मार्ग ईरान के लिए निरोधक क्षमता के प्रमुख साधनों में से एक रहा है.

ट्रंप और शहबाज शरीफ ने दिए समझौते के संकेत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान के साथ एक प्रारूप समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर किए जा सकते हैं. उधर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी कहा कि दोनों पक्ष शांति समझौते के लिए एक ढांचे पर सहमत हो चुके हैं और 24 घंटे के अंदर हस्ताक्षर की तैयारी चल रही है. हालांकि, तेहरान ने इस समयसीमा की पुष्टि नहीं की.

ईरान ने कहा- अभी नहीं होगा हस्ताक्षर

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी मीडिया से बातचीत में कहा कि समझौते पर तत्काल हस्ताक्षर नहीं होने जा रहे हैं. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह कल (रविवार को) नहीं होगा. हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले कुछ दिनों में समझौता संभव हो सकता है.

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समझौते में क्या हो सकता है शामिल?

प्रस्तावित पीस डील का अहम मकसद होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा पूरी तरह खोलना और ईरान पर लगाई गई अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाना है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके बाद अगले 60 दिनों के भीतर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अलग चरण में बातचीत की जाएगी.

मसौदे में ईरान की अरबों डॉलर की जमी हुई संपत्तियों को मुक्त करने और ईरानी तेल निर्यात पर लगे कुछ प्रतिबंधों में छूट देने जैसे प्रस्ताव भी शामिल हैं. बदले में ईरान को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज को पूरी तरह खोलना होगा. हालांकि, अराघची ने मीडिया से इस डील के पॉइंट्स पर मीडिया को अटकलें लगाने से मना किया था.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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