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Home World अमेरिका ने हमें टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल किया, पाकिस्तानी रक्षा मंत्री का कबूलनामा

अमेरिका ने हमें टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल किया, पाकिस्तानी रक्षा मंत्री का कबूलनामा

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अमेरिका ने हमें टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल किया, पाकिस्तानी रक्षा मंत्री का कबूलनामा
पाकिस्तान के डिफेंस मिनिस्टर ख्वाजा आसिफ

Pakistan US Relations Khawaja Asif: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री (डिफेंस मिनिस्टर) ख्वाजा आसिफ ने संसद में अपनी ही देश की पुरानी नीतियों पर जोरदार हमला बोला है. उन्होंने बहुत ही कड़वे शब्दों में स्वीकार किया कि पाकिस्तान ने पिछले 20 सालों में अमेरिका को खुश करने के लिए खुद को ‘किराये’ पर दे दिया था. उनका कहना है कि पाकिस्तान ने जो कुछ भी किया, उसका अंजाम बहुत बुरा रहा है.

हम जिहाद नहीं, सिर्फ अमेरिका का सपोर्ट चाहते थे

ख्वाजा आसिफ के अनुसार, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की जंग में जो भी हिस्सा लिया, वह इस्लाम या जिहाद के लिए नहीं था. उन्होंने साफ कहा कि इसका असली मकसद सिर्फ अमेरिका जैसे सुपरपावर का साथ पाना और अपनी राजनीतिक साख बनाना था. उनके मुताबिक, 1999 के बाद और खास तौर पर 9/11 हमलों के बाद अमेरिका का साथ देना पाकिस्तान के लिए एक ऐसी ‘कभी न सुधरने वाली गलती’ बन गई, जिसकी भरपाई नामुमकिन है.

इस्तेमाल करके फेंक दिया गया

रक्षा मंत्री ने संसद में बेहद तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ ‘टॉयलेट पेपर’ से भी बुरा बर्ताव किया. अमेरिका ने अपने मतलब के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल किया और काम निकल जाने के बाद उसे कचरे की तरह फेंक दिया. उन्होंने यह भी माना कि 1980 के दशक में सोवियत संघ के खिलाफ जो जंग हुई, वह भी अमेरिका के फायदे के लिए थी, न कि किसी धार्मिक मकसद के लिए.

शिक्षा सिस्टम को भी नहीं बख्शा

आसिफ ने एक और बड़ी बात कही कि इन युद्धों को सही ठहराने के लिए पाकिस्तान के एजुकेशन सिस्टम (शिक्षा तंत्र) को भी बदल दिया गया था. बच्चों को जो पढ़ाया गया, उसमें कट्टरपंथ के बीज बोए गए, जिसका असर आज भी देश की विचारधारा पर दिख रहा है. इसकी वजह से पाकिस्तान आज भी हिंसा और आर्थिक तंगी से जूझ रहा है.

जमीन पर क्या किया पाकिस्तान ने? (दो बड़े युद्धों की कहानी)

1. सोवियत-अफगान युद्ध (1979-1989):

अमेरिका का जरिया बना: पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने अमेरिका और सऊदी अरब से मिले अरबों डॉलर अफगान विद्रोहियों तक पहुंचाए.

ट्रेनिंग कैंप: पाकिस्तान की जमीन पर लगभग 2.5 लाख लड़ाकों को ट्रेनिंग दी गई.

शरणार्थी: उस वक्त पाकिस्तान ने 32 लाख से ज्यादा अफगान शरणार्थियों को पनाह दी, जो दुनिया में सबसे बड़ी संख्या थी.

2. अमेरिका की अफगानिस्तान जंग (2001-2021):

सप्लाई लाइन: नाटो सेनाओं का 80% सामान कराची पोर्ट के जरिए ही अफगानिस्तान पहुंचता था.

दोहरा खेल: एक तरफ पाकिस्तान अमेरिका का साथी बना रहा, तो दूसरी तरफ उस पर तालिबान की मदद करने के आरोप भी लगे ताकि अफगानिस्तान में भारत का प्रभाव कम किया जा सके.

आज का हाल: 2021 में तालिबान के आने के बाद से रिश्ते और बिगड़ गए हैं. अब ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ (TTP) जैसे ग्रुप पाकिस्तान पर ही हमले कर रहे हैं. अक्टूबर 2025 में तो पाकिस्तान को अफगानिस्तान के अंदर एयरस्ट्राइक तक करनी पड़ी.

हमने 30 साल तक गंदा काम किया

ख्वाजा आसिफ ने पिछले साल एक इंटरव्यू में यह भी माना था कि पाकिस्तान ने तीन दशकों तक आतंकी संगठनों को ट्रेनिंग दी और उन्हें फंडिंग मुहैया कराई. उन्होंने इसे अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए किया गया ‘गंदा काम’ (dirty work) बताया. उनके अनुसार, पाकिस्तान ने जानबूझकर इन संगठनों को पाला-पोसा और अब देश खुद इसका शिकार हो रहा है.

बलूचिस्तान में फेल होती सुरक्षा व्यवस्था

सिर्फ अफगानिस्तान ही नहीं, ख्वाजा आसिफ ने बलूचिस्तान के हालात पर भी बेबसी जताई है. उनके अनुसार, बलूचिस्तान का इलाका इतना बड़ा है कि वहां सुरक्षा बलों को तैनात करना और कंट्रोल करना बहुत मुश्किल है. हाल ही में वहां विद्रोहियों ने 80 सुरक्षाकर्मियों को मार दिया था, जिसके बाद आसिफ ने माना कि पाकिस्तानी सेना वहां एक तरह से ‘लाचार’ महसूस कर रही है.

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