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Home World अपने ही अड्डे पर कैसे मारा गया लश्कर आतंकी बिलाल आरिफ? चाकू और गोली से छलनी कर दी गई दर्दनाक मौत

अपने ही अड्डे पर कैसे मारा गया लश्कर आतंकी बिलाल आरिफ? चाकू और गोली से छलनी कर दी गई दर्दनाक मौत

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अपने ही अड्डे पर कैसे मारा गया लश्कर आतंकी बिलाल आरिफ? चाकू और गोली से छलनी कर दी गई दर्दनाक मौत
बिलाल आरिफ सलाफी. फोटो- एक्स.

Pakistan LeT Terrorist Bilal Arif Killed: 21 मार्च 2026, शनिवार को ईद का दिन, जगह पाकिस्तान का मुरीदके में मरकज के पास का इलाका. सड़क पर एक आदमी को किसी ने गोली मार दी. बाद में पता चला कि उसे चाकू भी घोंपा गया था. खून से लथपथ आदमी को बचाने की कोशिश की जा रही थी…. लेकिन वह बच नहीं सका. कौन था वह? बहुत ज्यादा जाना पहचाना नाम नहीं, पर्दे के पीछ से आतंक के लिए काम करने वाला यह आदमी बिलाल आरिफ सलाफी था. वह बिलाल, जो लश्कर ए तैयबा का रिक्रूटर और फंडिंग के साथ हथियार सप्लायर का काम करता था. 

भारत में मुरीदके से बहुत ज्यादा लोग परिचित नहीं थे. कम से पिछले साल तो नहीं. लेकिन जून 2025 के बाद यह नाम फिर से चर्चा में आ गया. ऑपरेशन सिंदूर में भारत के कुछ शुरुआती हमलों में यह स्थान भी था. यहां स्थित मरकज लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का मुख्यालय था, जिसे भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान निशाना बनाया था. लश्कर ए तैयबा का चीफ हाफिज सईद है, जिसके आतंकी कारनामों ने भारत को कई दर्द दिए हैं. इसी एलईटी के वरिष्ठ कमांडर बिलाल आरिफ सलाफी की गोली मारकर और चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई.

बिलाल आरिफ की हत्या किसने की?

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को ईद की नमाज के बाद उसके ही परिवार के सदस्यों ने यह काम किया. वहीं एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, खुफिया सूत्रों ने इस बेहद नजदीक से किया गया हमला  बताया. बताया जा रहा है कि एक व्यक्ति ने सलाफी पर गोली चलाई, जबकि एक महिला ने उन्हें बार-बार चाकू मारा. इससे यह संकेत मिलता है कि हत्या के पीछे कोई व्यक्तिगत या पारिवारिक विवाद हो सकता है. हालांकि, मरकज तैयबा जैसे अत्यधिक सुरक्षित परिसर के अंदर इस तरह की घटना बिना अंदरूनी मदद के संभव नहीं है.

किस पर जताया जा रहा शक?

कुछ रिपोर्ट्स में यह शक जताया जा रहा है कि बिलाल की हत्या, लश्कर के वरिष्ठ ऑपरेटिव गाजी उबैदुल्लाह खान ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर की. इसे ईद की नमाज के तुरंत बाद मरकज तैयबा के अंदर अंजाम दिया गया. यह हमला उसके दामाद अबू बक्र की हत्या का बदला लेने के लिए किया गया. अबू बक्र की हत्या 3-4 साल पहले बिलाल आरिफ ने ही की थी. 

बिलाल आरिफ को, जकी-उर-रहमान लखवी का करीबी सहयोगी माना जाता था. इसलिए उसे कोई सजा नहीं हुई, लेकिन उबैदुल्लाह बदले की आग में जल रहा था और मौका मिलते ही उसने एक तरह से दिल की ख्वाहिश को अंजाम दे दिया. हमले में शामिल दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है. इस घटना ने लश्कर के अंदर गहरी आंतरिक दरारों को उजागर कर दिया है.

लखवी मुंबई अटैक 2008 के सबसे अहम सूत्रधार में  से एक है. वह लश्कर के टॉप कमांडर्स में से एक है. फिलहाल उसे पाकिस्तान की जेल में रखा गया है. मुंबई हमलों के आरोप में उसे 5-5 साल के तीन टर्म के लिए जेल की सजा सुनाई गई है.

सोशल मीडिया पर इस घटना के बाद के कुछ वीडियो सामने आए हैं, जिनमें आतंकी को जमीन पर मृत अवस्था में पड़ा हुआ देखा जा सकता है. हालांकि, इन वीडियो की पुष्टि नहीं हो सकी है. इन्हें आप भी देख सकते हैं- 

कौन था सराफी और क्या काम था उसका?

बिलाल आरिफ सराफी 2005 से लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ था, जिसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकी संगठन घोषित किया गया है. लश्कर-ए-तैयबा का एक प्रमुख चेहरा माने जाने वाले सराफी तैबा कॉलोनी में अन्य वरिष्ठ कमांडरों के साथ रहता था. वह मुरीदके के मरकज तैयबा परिसर से काम करता था. 

रिपोर्ट्स के मुताबिक वह संगठन का मेन रिक्रूटर और विचारधारा फैलाने वाले लोगों में शामिल था. कश्मीर में जिहाद के नैरेटिव को मजबूत करने और पाकिस्तान के युवाओं को भारत विरोधी आतंकवादी गतिविधियों में शामिल करने में उनकी अहम भूमिका रही थी.  रिपोर्ट्स के अनुसार, उसका काम लोगों को वैचारिक प्रशिक्षण देकर उनका ब्रेनवॉश करना था.

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इसके अलावा, वह लॉजिस्टिक्स, आतंक के लिए फंडिंग और हथियारों की आपूर्ति से भी गहराई से जुड़े हुए थे. खुफिया सूत्रों के मुताबिक, संगठन तक लगातार धन और हथियार पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी. सार्वजनिक रूप से ज्यादा सक्रिय न होने के बावजूद, उसे लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष नेतृत्व के करीबी माना जाता था.

अधिकारियों का मानना है कि उनकी मौत से संगठन के कैडर जुटाने और भर्ती नेटवर्क में अस्थायी खालीपन आ सकता है. इतने सीक्रेट तरीके से काम करने के बावजूद वह कभी भारत के राडार में नहीं आया, इसीलिए बिलाल भारत में वांछित नहीं था. हालांकि, अब इसकी मौत हो गई है.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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