क्या नेतन्याहू की मौत हो गई? वायरल वीडियो में 6 उंगलियां देख मचा हड़कंप

Netanyahu Viral Video: 13 मार्च को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आधिकारिक 'X' अकाउंट से एक वीडियो शेयर किया गया. इस वीडियो में नेतन्याहू 28 फरवरी से चल रहे उस हमले पर बात कर रहे थे, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनई की मौत हुई थी. अब यह वीडियो इंटरनेट पर चर्चा का केंद्र बन गया है.

By Govind Jee | March 15, 2026 7:40 AM

Netanyahu Viral Video: वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे बारीकी से देखना शुरू कर दिया. वीडियो के कुछ फ्रेम्स में नेतन्याहू का हाथ थोड़ा अजीब दिख रहा था, जिसे लेकर दावा किया गया कि उनके हाथ में 5 नहीं, बल्कि 6 उंगलियां दिखाई दे रही हैं. लोगों ने स्क्रीनशॉट लेकर इसे ‘AI का ग्लिच’ (तकनीकी खराबी) करार दिया.

‘एक्स’ के अपने AI टूल ‘ग्रोक’ ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि यह केवल कैमरे के एंगल और स्क्रीनशॉट की वजह से बनने वाला एक ऑप्टिकल इल्यूजन (आंखों का धोखा) है. विशेषज्ञों का भी यह मानना है कि वीडियो कंप्रेशन, खराब कैमरा एंगल या फ्रेम में होने वाली विकृति से ऐसी चीजें दिख सकती हैं, जिन्हें लोग अक्सर गलत समझ लेते हैं.

मौत की भी अफवाहें

वीडियो के साथ ही नेतन्याहू के गायब होने या उनकी मौत को लेकर भी सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें चलने लगीं. हालांकि, स्नोप्स (Snopes) और टाइम्स ऑफ इजरायल जैसी संस्थाओं ने इन खबरों को पूरी तरह से गलत और बिना किसी आधार की अफवाह बताया है. आधिकारिक तौर पर नेतन्याहू को आखिरी बार बेत शेमेश के मलबे के पास सार्वजनिक रूप से देखा गया था.

कन्जर्वेटिव कमेंटेटर कैंडिस ओवेन्स समेत कई लोगों ने वीडियो की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए और यह दावा किया कि यह वीडियो AI से जनरेट किया गया है. लेकिन अभी तक ऐसा कोई भी सबूत सामने नहीं आया है जो यह साबित कर सके कि नेतन्याहू का यह वीडियो नकली या AI द्वारा तैयार किया गया है.

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‘डीपफेक’ का डर और सोशल मीडिया का असर

यह पूरी घटना दिखाती है कि आज के दौर में इंटरनेट पर ‘डीपफेक’ को लेकर लोगों के बीच कितना ज्यादा डर है. लोग अब किसी भी वीडियो को देखते ही उसे शक की नजर से देख रहे हैं. विशेष रूप से युद्ध और तनाव के दौरान ऐसी सूचनाएं बहुत तेजी से फैलती हैं.

लोग अब खुद वीडियो का विश्लेषण (Citizen Forensics) करने लगे हैं, जिसमें वे वीडियो को धीमा करके या फिल्टर लगाकर चेक करते हैं. कभी-कभी लोग तकनीकी खामियों को ही जानबूझकर की गई हेराफेरी समझ लेते हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध के दौरान प्रोपेगेंडा और गलत सूचनाएं फैलाना एक आम तरीका बन गया है, जिससे बचने के लिए आधिकारिक पुष्टि पर भरोसा करना ही जरूरी है.

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