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Home World न न्यूक्लियर, न मिसाइल और न टेररिज्म, US-इजरायल क्यों ईरान पर हमला कर रहे? एक्सपर्ट ने बताई ये वजह

न न्यूक्लियर, न मिसाइल और न टेररिज्म, US-इजरायल क्यों ईरान पर हमला कर रहे? एक्सपर्ट ने बताई ये वजह

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न न्यूक्लियर, न मिसाइल और न टेररिज्म, US-इजरायल क्यों ईरान पर हमला कर रहे? एक्सपर्ट ने बताई ये वजह
इस्तांबुल में इजरायली कॉन्सुलेट के बाहर प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर जलाई. फोटो- PTI.

Why US Israel Attacked Iran: ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका ने महीनों की घेराबंदी के बाद आखिरकार 28 फरवरी को हमला कर ही दिया. अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले में इजरायल-अमेरिका ने ईरान के 31 प्रांतों में 1200 ठिकानों को निशाना बनाया गया. इस दौरान ईरान में सुप्रीम लीडर खामेनेई, रक्षा मंत्री और आईआरजीसी प्रमुख समेत तक कम से कम 201 लोगों की मौत हो गई, जबकि 747 लोग घायल हो गए. ईरान भले ही लहूलुहान है, लेकिन उसने भी अपनी क्षमता के हिसाब से करारा जवाब देने की कोशिश की है. मिडिल ईस्ट के देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकानों और इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमले करके ईरान ने भी बराबर दहशत फैलाई है. लेकिन इस युद्ध की वजह क्या है? क्या अमेरिका सच में ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना चाहता है? भारतीय एक्सपर्ट ने इससे साफ इनकार किया है. 

भारतीय सैन्य विशेषज्ञ डॉ ब्रह्मा चेलानी मानते हैं कि ईरान के खिलाफ चल रहा युद्ध वास्तव में न तो परमाणु या मिसाइल प्रसार से जुड़ा है और न ही राज्य-प्रायोजित आतंकवाद से. उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से एक पोस्ट शेयर की जिसमें उन्होंने तथ्य रखे. उन्होंने कहा, ‘अगर ये ही असली चिंताएँ होतीं, तो अमेरिका का सबसे स्वाभाविक निशाना पाकिस्तान होता. एक घोषित परमाणु संपन्न देश, जिसके पास अनुमानतः 170 से अधिक परमाणु हथियार हैं; ऐसा देश, जिसके बारे में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि वह अंतरमहाद्वीपीय दूरी तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताएं विकसित कर रहा है, जो अमेरिका तक पहुंच सकती हैं; और ऐसा देश, जिसके राज्य-समर्थित आतंकी नेटवर्कों का संबंध पश्चिम सहित कई बड़े अंतरराष्ट्रीय आतंकी हमलों से जोड़ा गया है. 9/11 हमलों के मुख्य योजनाकारों का भी अंततः पाकिस्तान में पता चला था, जिनमें ओसामा बिन लादेन और खालिद शेख मोहम्मद शामिल थे.’

ईरान नियम मान रहा, फिर भी उसके खिलाफ कठोरता

उन्होंने आगे कहा, ‘इसके विपरीत, ईरान आज भी परमाणु अप्रसार संधि का हस्ताक्षरकर्ता है और भले ही उसने यूरेनियम को 60 प्रतिशत तक समृद्ध किया हो, जो 90 प्रतिशत हथियार-ग्रेड स्तर से कम है, फिर भी व्यापक रूप से यह माना जाता है कि वह अभी कार्यशील परमाणु हथियार बनाने से काफी दूर है. इसके बावजूद वॉशिंगटन ने तेहरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने का रास्ता चुना है, जबकि पाकिस्तान के प्रति वह अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाए हुए है. अमेरिका अपने इस कदम को यह कहकर सही ठहराता है कि ईरान अमेरिका के अस्तित्व के लिए खतरा है.’

होर्मूज पर कंट्रोल है असली मकसद

डॉ चेलानी ने आगे कहा, ‘इसलिए इस युद्ध का तर्क सुरक्षा नहीं, बल्कि भू-राजनीति है. इसका उद्देश्य क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को नया रूप देना, तेहरान में एक अनुकूल शासन स्थापित करना और ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव के नेटवर्क को कमजोर करना है. होर्मूज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण करना, जिससे होकर दुनिया के कुल व्यापारिक तेल का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है.  ईरान की रणनीतिक पहुंच को पीछे धकेलने की व्यापक योजना, इस शासन-परिवर्तन एजेंडे के केंद्रीय हिस्से हैं.’ इस जलडमरूमध्य से पूरी दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस का यातायात होता है. ईरान के पास इतनी क्षमता जरूर है कि वह इस पर कंट्रोल कर सकता है. डॉ चेलानी का मानना है कि अमेरिका और इजरायल इसे ही हथियाना चाहते हैं.

फिर से होने लगे एक दूसरे पर हमले

सोमवार को इजरायली वायुसेना (IAF) ने बताया कि ईरान की ओर से इजरायली क्षेत्र को निशाना बनाकर मिसाइल लॉन्च की एक नई लहर शुरू की गई है, जिससे क्षेत्र में संघर्ष और तेज हो गया है. प्रभावित इलाकों में आपातकालीन अलर्ट जारी कर दिए गए हैं. टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार शाम यरुशलम के बाहरी इलाके में एक हाईवे पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल के गिरने से तीन लोग घायल हो गए. इस हमले से सड़क पर एक बड़ा गड्ढा बन गया, एक ट्रैफिक साइन टूट गया और कई कारों को भारी नुकसान पहुंचा. घायलों में 46 वर्षीय एक व्यक्ति शामिल है, जिसे छर्रों से मध्यम स्तर की चोटें आई हैं.

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गैर ईरान देशों में कितने लोग मरे, घायल हुए?

ताजा गोलीबारी पश्चिम एशिया क्षेत्र में शत्रुता के बड़े स्तर पर बढ़ने का संकेत है, जहां कई देशों में अभूतपूर्व मात्रा में प्रोजेक्टाइल दागे गए हैं. यह घटनाक्रम अमेरिका-इजरायल के संयुक्त सैन्य हमलों के बाद सामने आया है, जिनमें रविवार को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार की मौत हो गई थी. इन हमलों के बाद, इस्लामिक रिपब्लिक ईरान ने जवाबी कार्रवाई के तौर पर ड्रोन और मिसाइलों के जरिए क्षेत्र के कई अरब देशों को निशाना बनाते हुए हमलों की एक श्रृंखला शुरू की. अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी हमले में अब तक मौत और घायल लोगों की संख्या इस प्रकार है. 

इजरायल में 9 मौतें, 121 घायल. अमेरिकी सैनिक: 3 मारे गए, 5 घायल. इराक में 2 मौतें, 5 घायल. कुवैत में 1 मौत, 32 घायल. यूएई में 3 मौतें, 58 घायल. बहरीन में 4 घायल. कतर में 16 घायल. ओमान में 5 घायल. 

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इजरायल ने हिज्बुल्लाह पर किया हमला

इससे अलावा आज सोमवार, 2 मार्च को पश्चिम एशिया में संघर्ष और फैल गया. इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत और देश के अन्य हिस्सों में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर हवाई हमले किए, इसमें 31 लोगों की मौत हो गई. यह कार्रवाई लेबनानी क्षेत्र से उत्तरी इजरा.ल की ओर दागे गए प्रोजेक्टाइल्स के बाद की गई. इजरायली एयर फोर्स ने कहा कि बेरूत क्षेत्र में हिज़्बुल्लाह आतंकवादी संगठन के वरिष्ठ आतंकियों पर लक्षित हमला किया. साथ ही, IDF ने दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह संगठन के एक केंद्रीय आतंकवादी को भी निशाना बनाया. 

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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