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Home World चांद पर परमानेंट मून बेस बनाएगा NASA, 20 अरब डॉलर के मिशन का ऐलान; 3 चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया, पूरी डिटेल

चांद पर परमानेंट मून बेस बनाएगा NASA, 20 अरब डॉलर के मिशन का ऐलान; 3 चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया, पूरी डिटेल

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चांद पर परमानेंट मून बेस बनाएगा NASA, 20 अरब डॉलर के मिशन का ऐलान; 3 चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया, पूरी डिटेल
चांद पर ऐसा होगा नासा मून बेस. फोटो- एक्स (@NASA).

NASA Moon Base Mission: चांद पर इंसानी मौजूदगी को स्थायी बनाने की दिशा में नासा ने अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है. आर्टेमिस-II मिशन की सफलता के बाद अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने तीन नए चंद्र मिशनों और करीब 20 अरब डॉलर की महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया है. इस योजना का मकसद चांद पर ऐसा स्थायी बेस तैयार करना है, जहां भविष्य में वैज्ञानिक लंबे समय तक रहकर रिसर्च कर सकें. यानी चांद पर इंसानों की स्थायी मौजूदगी अब सिर्फ विज्ञान कथाओं तक सीमित नहीं रह गई है. नासा ने चांद पर पहला मानव बेस बसाने की दिशा में अपना विस्तृत रोडमैप जारी कर दिया है. एजेंसी ने इसके लिए रोवर, लैंडर और अन्य तकनीकों के विकास पर करीब 1 अरब डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट भी दिए हैं.

NASA ने पेश किया मून बेस का ब्लूप्रिंट

वॉशिंगटन डीसी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नासा एडमिनिस्ट्रेटर जेरेड आइजैकमैन ने कहा कि अमेरिका फिर से चांद पर लौट रहा है और यह ‘मून बेस’ मानवता का किसी दूसरे खगोलीय पिंड पर पहला स्थायी ठिकाना होगा. उन्होंने बताया कि इस बेस में लूनर रोवर, ड्रोन, वैज्ञानिक उपकरण और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा, ताकि इंसान चांद जैसे कठिन वातावरण में रहना और काम करना सीख सकें. नासा ने 2026 के लिए तीन शुरुआती ‘मून बेस मिशन’ घोषित किए हैं. इनका मकसद इंसानों के पहुंचने से पहले उपकरणों का परीक्षण करना और जोखिम कम करना है.

2028 तक इंसानों को चांद पर भेजने का लक्ष्य

नासा का लक्ष्य 2028 तक आर्टेमिस-III मिशन के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों को दोबारा चांद की सतह पर उतारना है. इससे पहले एजेंसी अगले कुछ वर्षों में कई परीक्षण मिशन चलाएगी. हाल ही में अप्रैल 2026 में आर्टेमिस-II मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद की परिक्रमा की थी. यह 1972 के अपोलो-17 मिशन के बाद पहला मानव मिशन था, जिसने लो अर्थ ऑर्बिट से आगे यात्रा की. नासा के ही यूजीन सर्नन और हैरिसन श्मिट 1972 में चांद पर कदम रखने वाले आखिरी अंतरिक्ष यात्री थे.

Moon Base-I मिशन में होगा चांद की सतह का परीक्षण

नासा ने बताया कि ‘मून बेस-I’ मिशन के लिए ब्लू ओरिजिन के ‘ब्लू मून मार्क-1 एंड्योरेंस’ लैंडर को चुना गया है. इस मिशन की लॉन्चिंग सितंबर के बाद किसी समय की जा सकती है. यह मिशन चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास स्थित शैकलटन कनेक्टिंग रिज इलाके में उतरेगा. यहां वैज्ञानिक उपकरण भेजे जाएंगे, जिनमें स्टीरियो कैमरे और लेजर रेट्रो-रिफ्लेक्टिव एरे लगे होंगे. नासा का कहना है कि यह मिशन भविष्य के मानवयुक्त मिशनों के जोखिम को कम करने में मदद करेगा.

स्टीरियो कैमरे- यह अध्ययन करेंगे कि रॉकेट थ्रस्टर चांद की सतह को कैसे प्रभावित करते हैं.

लेजर रेट्रो-रिफ्लेक्टिव एरे- अंतरिक्ष यानों को सटीक लोकेशन पहचानने में मदद करेगा.

Moon Base-II में भेजा जाएगा रोवर और भारी सामान 

इस साल बाद में लॉन्च होने वाला ‘मून बेस-II’ मिशन चांद पर 1100 पाउंड से ज्यादा सामान पहुंचाएगा. यह मिशन एस्ट्रोबोटिक के ‘ग्रिफिन लैंडर’ के जरिए भेजा जाएगा. इसमें एस्ट्रोलैब का FLIP रोवर भी शामिल होगा. इसका उद्देश्य चांद की सतह पर आने-जाने और भारी सामान ले जाने की तकनीक विकसित करना है.

Moon Base-III करेगा रहस्यमयी चमकीले हिस्सों की जांच 

तीसरा मिशन ‘मून बेस-III’ चांद पर दिखने वाले रहस्यमयी चमकीले पैटर्न यानी ‘लूनर स्वर्ल्स’ का अध्ययन करेगा. वैज्ञानिकों का मानना है कि इनका संबंध चांद की सतह के नीचे मौजूद चुंबकीय क्षेत्रों से हो सकता है. इस मिशन में यूरोपियन स्पेस एजेंसी और कोरियन स्पेस एजेंसी के उपकरण भी भेजे जाएंगे.

तीन चरणों में तैयार होगा चांद का बेस

नासा ने अपने मून बेस कार्यक्रम को तीन चरणों में बांटा है.

पहला चरण: 2026 से 2028

नई तकनीकों का परीक्षण

चांद की सतह पर ऑपरेशन की तैयारी

लूनर टेरेन व्हीकल यानी चंद्र वाहन की तैनाती

दूसरा चरण: 2029 से 2032

स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना

पावर ग्रिड और सपोर्ट सिस्टम विकसित करना

तीसरा चरण: 2032 के बाद

लगातार मानव मौजूदगी सुनिश्चित करना

नियमित क्रू रोटेशन

चांद की सतह पर लगातार वैज्ञानिक गतिविधियां चलाना

मून रोवर बनाने पर करोड़ों डॉलर का खर्च

नासा ने अमेरिकी कंपनियों एस्ट्रोलैब और लूनर आउटपोस्ट को चांद पर चलने वाले पहले रोवर तैयार करने का जिम्मा दिया है. एस्ट्रोलैब को करीब 219 मिलियन डॉलर और लूनर आउटपोस्ट को करीब 220 मिलियन डॉलर दिए गए हैं.

एस्ट्रोलैब का रोवर लगभग 900 किलोग्राम वजन का होगा. इसे इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि अंतरिक्ष यात्री इसमें बैठकर 9.5 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से चल सकें. लूनर आउटपोस्ट का रोवर हल्का और ज्यादा तेज होगा. इसकी गति 14 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रखने की योजना है.

यह रोवर तीन तरीकों से काम कर सकेगा. पहला- अंतरिक्ष यात्री खुद बैठकर चलाएं. दूसरा- पृथ्वी से रिमोट कंट्रोल के जरिए संचालित किया जाए. तीसरा- पूरी तरह स्वायत्त तरीके से खुद काम करे. नासा का लक्ष्य है कि यह रोवर चांद पर करीब एक साल तक सक्रिय रह सके.

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ब्लू ओरिजिन को मिला बड़ी जिम्मेदारी

जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन को इन रोवर्स को चांद की सतह तक पहुंचाने का काम सौंपा गया है. इसके लिए कंपनी को 188 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट मिला है. प्रदर्शन के आधार पर कंपनी को अतिरिक्त 280.4 मिलियन डॉलर भी मिल सकते हैं. दोनों रोवर कंपनियों को अगले 18 महीनों में डिजाइन तैयार कर परीक्षण पूरा करना होगा.

2028 में भेजे जाएंगे उड़ने वाले ड्रोन

नासा 2028 में चार छोटे ‘हॉपिंग ड्रोन’ भी चांद पर भेजेगा. इनका काम ऐसे इलाकों की तस्वीरें लेना होगा जहां रोवर पहुंचना मुश्किल है. इन ड्रोन को ले जाने वाला स्पेसक्राफ्ट फायरफ्लाई एयरोस्पेस तैयार करेगी. मिशन पूरा होने के बाद वहां छोड़े गए सेंसर कई महीनों तक डेटा भेजते रहेंगे. अगर यह मिशन सफल रहता है तो यह चांद के दक्षिणी ध्रुव पर नासा की लगातार और स्थायी मौजूदगी की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जाएगा.

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‘अब चांद पर स्थायी मौजूदगी बनाने का समय’

नासा के मून बेस प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव कार्लोस गार्सिया-गालान ने कहा कि आने वाले वर्षों में चांद पर ऐसी स्थिति बनाई जाएगी, जहां इंसान लगातार मौजूद रह सकें. उन्होंने कहा, ‘एक समय ऐसा आएगा जब हम कह सकेंगे कि हम अब चांद पर स्थायी रूप से मौजूद हैं और यहां से पीछे नहीं हटेंगे.’

नासा प्रमुख जेरेड आइजैकमैन ने कहा कि मून बेस सिर्फ अमेरिका का नहीं बल्कि पूरी मानवता का दूसरे खगोलीय पिंड पर पहला स्थायी ठिकाना होगा. उन्होंने कहा कि यह मिशन विज्ञान, नई तकनीकों, आर्थिक संभावनाओं और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की तैयारी के लिहाज से बेहद अहम साबित होगा.

PTI के इनपुट के साथ.

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