[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home World 18 लाख का एक बंदर, डिमांड में तेजी ; जानिए सबकुछ

18 लाख का एक बंदर, डिमांड में तेजी ; जानिए सबकुछ

0
18 लाख का एक बंदर, डिमांड में तेजी ; जानिए सबकुछ
बंदर की कीमत बढ़ी

Monkey Price hike in china : एक बंदर की कीमत कितनी हो सकती है? क्या आपने कभी यह जानने की कोशिश की है? अगर नहीं की है तो जानिए कि चीन में बंदर सोने से भी महंगा बिक रहा है. साउथ चाइना माॅर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार चीन में एक बंदर की कीमत 140,000 युआन यानी $20,260 है. भारतीय रुपए में एक बंदर की कीमत 18 लाख रुपए से भी अधिक है. 

बंदरों की इतनी कीमत की वजह क्या है?

चीन में बंदरों की इतनी कीमत की वजह है कि लैब की किया जा रहा रिसर्च. साउथ चाइना माॅर्निंग पोस्ट के अनुसार पिछले 5 सालों में बंदरों की कीमत दोगुनी हो गई है. सरकारी खरीद के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि किसी भी दवा की गुणवत्ता और वह कितना सुरक्षित है, इसका रिसर्च करने के लिए बंदरों की सख्त आवश्यकता होती है और इसी वजह से चीन में बंदरों की डिमांड काफी बढ़ गई है.

चीन की औसत मजदूरी से भी ज्यादा है बंदर की कीमत

चीन में बंदरों की कीमत में वृद्धि इतनी ज्यादा हो गई है कि यह देश की औसत सालाना मजदूरी से ज्यादा हो गया है. रिपोर्ट के अनुसार चीनी कंपनियों ने कई वैश्विक फार्मा कंपनियों के साथ डील साइन किया है. ऐसे में उन्हें ज्यादा रिसर्च की जरूरत है, ज्यादा रिसर्च होगा तो दवाओं का ट्रायल भी ज्यादा होगा, जिसकी वजह से अधिक से अधिक बंदरों की जरूरत भी होगी. चीन में प्रयोगात्मक दवाओं के लिए भी आवेदन बढ़ गया है और इन वजहों से बंदरों की डिमांड बहुत बढ़ गई है. 

विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर और विशेष आलेख पढ़ने के लिए क्लिक करें

हर दवा में 70 से 100 बंदरों की जरूरत

अमेरिका में रेट कट से बायोटेक फंडिंग बढ़ी है. यह जानकारी टाइम्स ने US इन्वेस्टमेंट बैंक के हेड कुई के हवाले से यह जानकारी दी है कि कि अधिकतर प्रोजेक्ट शुरुआती स्टेज में जा रहे हैं और उन्हें सेफ्टी असेसमेंट की जरूरत है. इसी वजह से अधिक बंदरों की जरूरत पड़ रही है. किसी रिसर्च में कितने बंदरों की जरूरत होगी यह सबकुछ रिसर्च और उसे करने वाले पर निर्भर करता है. एक अनुमान के अनुसार प्रीक्लिनिकल सेफ्टी स्टडीज में एंटीबॉडी-ड्रग के लिए हर दवा में 70 से 100 बंदरों की जरूरत होती है, जबकि कम रिस्क वाली दवाओं के लिए  40 से 60 बंदर चाहिए होते हैं.

ये भी पढ़ें : क्या आप जानते हैं देश में कितने आईएएस 5 साल में चुने गए और बिहार के कितने ललना डीएम हुए?

महिला के पायजामे का नाड़ा खोलना रेप की कोशिश ही माना जाएगा, हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त किया

विकसित भारत के सपने की ओर हनुमान कूद है एआई इंपैक्ट समिट?

Previous article सीमांचल में नये बीएड व लॉ कॉलेज खोले सरकार : अख्तरूल
Next article कर्मचारियों की सीसीआर वार्षिक स्तर पर कॉलेज करें तैयार : वीसी
Avatar Of Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel