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Home World पिता की मौत से चंद सेकेंड पहले निकले थे मोजतबा खामेनेई, किस्मत से बची ईरान के सुप्रीम लीडर की जान

पिता की मौत से चंद सेकेंड पहले निकले थे मोजतबा खामेनेई, किस्मत से बची ईरान के सुप्रीम लीडर की जान

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पिता की मौत से चंद सेकेंड पहले निकले थे मोजतबा खामेनेई, किस्मत से बची ईरान के सुप्रीम लीडर की जान
मोजतबा खामेनेई. फोटो- एक्स.

Iran Mojtaba KhameneI: ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की मौजूदा हालत के बारे में कई तरह की खबरें सामने आ रही हैं. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वह बुरी तरह घायल हैं, कुछ में कहा गया कि उनका इलाज रूस के अस्पताल में हो रहा है. उन्हें उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान का सर्वोच्च नेता घोषित किया गया. अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी को इजरायल-अमेरिका के अटैक में मौत हो गई थी. अब एक रिपोर्ट सामने आई है कि मोजतबा भी उस अटैक के दौरान उसी परिसर में मौजूद थे, लेकिन मिसाइल हमले से चंद सेकेंड पहले ही बाहर निकल गए और अपनी मौत को चकमा दिया. 

ब्रिटिश अखबार द टेलीग्राफ के हवाले से दावा किया गया है कि मोजतबा खामेनेई एक घातक मिसाइल हमले में बाल-बाल बच गए, वह भी महज कुछ सेकंड के फर्क से. रिपोर्ट के मुताबिक, जिस वक्त अमेरिका-इज़राइल के संयुक्त हमले में तेहरान स्थित सुप्रीम लीडर परिसर को निशाना बनाया गया, उस समय मोजतबा अपने आवास के भीतर नहीं थे. बताया जाता है कि वह किसी छोटे से काम के चलते बाहर बगीचे में चले गए थे. ठीक उसी दौरान मिसाइलें इमारत पर आ गिरीं.

यह हमला इतना सटीक और घातक बताया गया है कि उसी परिसर में मौजूद उनके पिता, उनकी पत्नी, बेटे और साले की मौत हो गई. ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए.

लीक ऑडियो में खुलासा

द टेलीग्राफ के हाथ लगी ऑडियो  रिकॉर्डिंग इस रिपोर्ट का आधार है. इसमें अली खामेनेई दफ्तर के प्रोटोकॉल प्रमुख मजहर हुसैनी हमले के घटनाक्रम का विवरण देते सुनाई देते हैं. हुसैनी ने यह बयान वरिष्ठ मौलवियों और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के कमांडरों को दिए एक संबोधन में दिया.

हुसैनी के अनुसार, ‘यह खुदा की मर्जी थी कि मोजतबा किसी काम से आंगन में चले गए… और तभी इमारत पर मिसाइल गिर गई.’ उनके मुताबिक, मोजतबा उस वक्त वापस इमारत की ओर लौट रहे थे और ऊपर जा रहे थे, तभी हमला हुआ. यानी कुछ सेकंड की देरी ने उनकी जान बचा ली. हुसैनी ने बताया कि इस हमले में मोजतबा खामेनेई को सिर्फ पैर में मामूली चोट आई.

तीन मिसाइलें, एक ही निशाना

ऑडियो के हवाले से कहा गया है कि हमले में कम से कम तीन बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ. एक मिसाइल उस हिस्से पर गिरी जहां अली खामेनेई मौजूद थे. दूसरी मोजतबा के आवासीय हिस्से पर और तीसरी उसी परिसर में स्थित अन्य परिवारिक आवासों पर. उनके अनुसार, हमले की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई शव पहचान के लायक भी नहीं बचे.

तबाही का भयावह मंजर

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के सैन्य तंत्र से जुड़े अहम चेहरे भी इस हमले की चपेट में आ गए. इनमें सैन्य ब्यूरो प्रमुख मोहम्मद शिराजी का नाम भी शामिल है. हुसैनी के हवाले से कहा गया कि उनका शरीर पूरी तरह चिथड़े-चिथड़े हो गया था और पहचान केवल कुछ किलो अवशेषों के आधार पर ही हो पाई. इसी तरह, मोजतबा के साले मिस्बाह अल-हुदा बाघेरी कानी भी इस हमले में मारे गए. दावा है कि मिसाइल का असर इतना जबरदस्त था कि उनका सिर धड़ से अलग हो गया.

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मोजतबा की हालत रहस्य बनी हुई

28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू हुआ, लेकिन इसके बाद से मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं. 8 मार्च को उन्हें सुप्रीम लीडर बनाया गया और 13 मार्च को उनकी ओर से केवल एक संदेश ईरानी सरकारी टीवी पर प्रसारित हुआ, जिसमें उन्होंने शहीदों के खून का बदला लेने की बात कही. यही वजह है कि उनकी वास्तविक स्थिति को लेकर अटकलें लगातार तेज हो रही हैं कि क्या वह मामूली रूप से घायल हैं या गंभीर रूप से?

अमेरिका भी अनिश्चित

इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी साफ कहा कि वॉशिंगटन के पास मोजतबा की हालत को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा, हमने उन्हें देखा नहीं है… हमें नहीं पता कि वह जिंदा हैं या नहीं. वहीं, कुवैत के एक अखबार ने दावा किया कि मोजतबा का इलाज रूस के एक अस्पताल में चल रहा है. 

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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