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Home World ईरान में फिर हुई बागेर गालिबाफ की ताजपोशी, 7वीं बार बने संसद स्पीकर; मिला भारी समर्थन-बढ़ी जिम्मेदारी

ईरान में फिर हुई बागेर गालिबाफ की ताजपोशी, 7वीं बार बने संसद स्पीकर; मिला भारी समर्थन-बढ़ी जिम्मेदारी

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ईरान में फिर हुई बागेर गालिबाफ की ताजपोशी, 7वीं बार बने संसद स्पीकर; मिला भारी समर्थन-बढ़ी जिम्मेदारी
मोहम्मद बागेर गालिबाफ.

Mohammad Bagher Ghalibaf: ईरान की राजनीति में एक बार फिर मोहम्मद बागेर गालिबाफ का दबदबा कायम रहा. देश की संसद ने उन्हें लगातार सातवीं बार स्पीकर चुन लिया है. ईरानी समाचार एजेंसी ISNA की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार सुबह हुए मतदान में मोहम्मद बागेर गालिबाफ को 271 में से 235 सांसदों का समर्थन मिला. इसके साथ ही वह फिर से संसद के स्पीकर बन गए. ऐसे समय में उनका दोबारा इस पद पर आना खास माना जा रहा है, क्योंकि इसी दौरान तेहरान और वॉशिंगटन के बीच बातचीत का दौर भी जारी है. 

गालिबाफ को अमेरिका के साथ जारी बातचीत में ईरान के प्रमुख चेहरों में भी गिना जाता है. आईएसएनए समाचार एजेंसी के अनुसार, गालिबाफ के खिलाफ लड़ रहे कट्टरपंथी मोहम्मद ताघी नगदी अली को 29 वोट और एक अन्य सांसद, उस्मान सलारी को 7 वोट मिले. वहीं पांच वोट खाली रहे. वह क्षेत्रीय संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान की राजनीति में लगातार मजबूत चेहरा बनकर उभरे हैं. 

गालिबाफ 11वीं संसद के पूरे चार साल तक स्पीकर रहे और 12वीं संसद के पहले दो सालों में भी इसी पद पर बने रहे. अब 12वीं संसद का तीसरा वार्षिक सत्र शुरू हो चुका है. ईरानी संसद के संचालन के लिए 12 सदस्यीय प्रेसीडिंग बोर्ड होता है. इसमें एक स्पीकर, दो उपाध्यक्ष, छह सचिव और तीन पर्यवेक्षक शामिल होते हैं.

28 फरवरी के बाद पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के दौरान उन्होंने अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत में अहम भूमिका निभाई. इसके अलावा उन्हें चीन के लिए ईरान का विशेष दूत भी नियुक्त किया गया था, जिससे विदेश नीति के मोर्चे पर उनकी सक्रियता और प्रभाव दोनों बढ़े.

माना जा रहा है कि विदेश नीति से जुड़े मुद्दों का असर अब ईरान की घरेलू राजनीति पर भी तेजी से पड़ रहा है, ऐसे में गालिबाफ एक बड़े शक्ति केंद्र के रूप में सामने आए हैं. वोटिंग से पहले ILNA ने दावा किया था कि उनके खिलाफ संगठित दबाव बनाने की कोशिशें हुईं, जिनमें सांसदों और राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाकर संदेश भेजे गए थे. अब दोबारा चुने जाने के बाद संसद में उनकी पकड़ और मजबूत मानी जा रही है.

ईरान बोला- अभी प्राथमिकता युद्ध खत्म करना

गालिबाफ के दोबारा चुने जाने के बाद ईरान की ओर से अमेरिका के साथ चल रही बातचीत को लेकर भी अहम बयान सामने आया. सोमवार को प्रेस ब्रीफिंग के दौरान ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि फिलहाल वार्ता का मुख्य उद्देश्य तनाव और युद्ध की स्थिति को खत्म करना है. उन्होंने साफ किया कि इस समय परमाणु मुद्दे के तकनीकी या विस्तृत पहलुओं पर चर्चा नहीं हो रही है. ISNA के अनुसार, बकाई ने कहा कि मौजूदा बातचीत का फोकस संघर्ष को समाप्त करने पर है और न्यूक्लियर मुद्दे की बारीकियों पर अभी चर्चा नहीं की जा रही.

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ट्रंप ने ओबामा दौर के समझौते से बनाई दूरी

इससे एक दिन पहले रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया था. उन्होंने कहा कि भविष्य में तेहरान के साथ होने वाली किसी भी बातचीत का स्वरूप पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के दौर में हुए समझौतों से बिल्कुल अलग होगा. ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान के साथ जल्दबाजी में कोई समझौता नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि जब तक दोनों देशों के बीच औपचारिक, प्रमाणित और हस्ताक्षरित समझौता नहीं हो जाता, तब तक ईरान के बंदरगाहों पर लगाया गया अमेरिकी ‘ब्लॉकेड’ पूरी तरह लागू रहेगा.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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