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Gaza : मांगने गए खाना, मिली मौत, गाजा में सस्ती हुई लोगों की जान

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Gaza : मांगने गए खाना, मिली मौत, गाजा में सस्ती हुई लोगों की जान
Palestinians struggle to get donated food at Gaza

Gaza : गाजा के दक्षिणी हिस्से में, जब कुछ फलस्तीनी लोग खाने का सामान लेने जा रहे थे, तब इजराइली सैनिकों ने उन पर गोली चला दी. यह खाना अमेरिका और इजराइल समर्थित संस्था ‘गाजा ह्यूमैनिटेरियन फाउंडेशन’ (GHF) के केंद्रों से मिल रहा था. इस गोलीबारी में कम से कम 32 लोगों की मौत हो गई. चश्मदीदों ने बताया कि ये हमले उन्हीं केंद्रों के पास हुए. इसके अलावा, गाजा शहर में एक इजराइली हवाई हमले में 11 और फिलिस्तीनियों की मौत हो गई. कुल मिलाकर ये घटनाएं इलाके में चल रही हिंसा और संघर्ष को और गंभीर बना रही हैं.

जीएचएफ ने मई के अंत में अमेरिका और इजराइल के समर्थन से गाजा में खाद्य सहायता वितरण अभियान शुरू किया. इसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र की पारंपरिक सहायता प्रणाली की जगह लेना था, जिस पर आरोप है कि उसकी मदद हमास के हाथों में चली जाती है. हालांकि, संयुक्त राष्ट्र ने इन आरोपों से इनकार किया है. जीएचएफ का कहना है कि उसने हजारों फिलिस्तीनियों को भोजन दिया है, लेकिन स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों और चश्मदीदों के अनुसार, जब लोग वितरण केंद्रों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे, तब इजराइली सेना की गोलीबारी में सैकड़ों लोग मारे गए.

चेतावनी देने के लिए गोलियां चलती है सेना

सेना का कहना है कि वह चेतावनी देने के लिए केवल तभी गोलियां चलाती है, जब भीड़ उसके बलों के बहुत करीब आ जाती है. जीएचएफ निजी सशस्त्र गार्डों को नियुक्त करता है. उसका कहना है कि उसके यहां कोई घातक गोलीबारी नहीं हुई है, हालांकि इस सप्ताह उसके एक स्थान पर 20 लोग मारे गए, जिनमें से अधिकांश की मौत भगदड़ में हुई. समूह ने हमास प्रदर्शनकारियों पर दहशत फैलाने का आरोप लगाया, लेकिन इस दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया.

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एक बयान में जीएचएफ ने कहा कि शनिवार को उसके कार्यस्थलों पर या उसके आस-पास कोई घटना नहीं हुई, तथा कथित इजराइली गोलीबारी कार्यस्थल खुलने से कुछ घंटे पहले हुई. इसमें कहा गया है, “हमने सहायता चाहने वालों को बार-बार चेतावनी दी है कि वे रात में और सुबह के समय हमारे स्थलों पर न आएं. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि शनिवार को तीएना इलाके में जीएफएफ सहायता वितरण केंद्र के पास गोलीबारी में कई फिलिस्तीनी मारे गए.

जैसे ही भीड़ आगे बढ़ी, बरसने लगी गोलियां

महमूद मोकेइमर नाम के एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि वह अन्य लोगों के साथ सहायता वितरण केंद्र जा रहा था, लेकिन जैसे ही भीड़ आगे बढ़ी, सैनिकों ने पहले चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं और फिर ‘‘अंधाधुंध’’ गोलीबारी की. एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी अकरम अकर ने बताया कि सैनिकों ने टैंकों और ड्रोन पर लगी मशीनगनों से गोलीबारी की. उन्होंने कहा, “उन्होंने हमें घेर लिया और सीधे हम पर गोलीबारी शुरू कर दी.” खान यूनिस स्थित नासिर अस्पताल ने बताया कि 25 शव और दर्जनों घायल अस्पताल में लाए गए.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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