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Home World ‘लिटिल टाइम मशीन’ सीप समुद्र में कहां से आते हैं? इनसे क्या कुछ पता चलता है? इनसे हमें क्या सीखने को मिलता है?

‘लिटिल टाइम मशीन’ सीप समुद्र में कहां से आते हैं? इनसे क्या कुछ पता चलता है? इनसे हमें क्या सीखने को मिलता है?

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‘लिटिल टाइम मशीन’ सीप समुद्र में कहां से आते हैं? इनसे क्या कुछ पता चलता है? इनसे हमें क्या सीखने को मिलता है?
सीपियां समुद्र में ऐसे ही बिखरी रहती हैं, लेकिन इनमें छिपा होता है ढेर सारा इतिहास.

Where do Oysters come from: जब आप समुद्र किनारे टहलते हैं, तो रेत पर बिखरी ढेर सारी सीपियां अक्सर नजर आती हैं। हम में से ज्यादातर लोग उन्हें बस सुंदर चीज समझकर उठा लेते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए ये सीपियां बड़ी दिलचस्प कहानी सुनाती हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि कैलिफोर्निया की खाड़ी के किनारे बीच के सिर्फ एक छोटे से हिस्से में कम से कम 2 हजार अरब सीपियां हैं. सोचिए अगर आज पृथ्वी पर मौजूद हर व्यक्ति सीप इकट्ठा करने जाए तो उनमें से हर कोई लगभग 1,000 सीपियां ले पाएगा. लेकिन ये सभी सीपियां कहां से आती हैं, और वे हमें क्या कहानियां बता सकती हैं?

बीच पर कंकाल; सीप असल में होती क्या हैं?

वैज्ञानिकों माइकल कोवालेस्की (यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा) और थॉमस के फ्रेजर (यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ फ्लोरिडा) ने इन पर शोध किया है. उन्होंने कहा कि सीप बस जीवों के कंकाल ही हैं. लेकिन इंसानों और अधिकतर दूसरे पशुओं से अलग. इन घोंघों, क्लैम, ऑयस्टर और मसेल्स में एक एक्सोस्केलेटन होता है. इसका मतलब है कि यह उनके शरीर के बाहर होता है.

ये उन्हें कई तरह की सुरक्षा देते हैं. जैसे- दुश्मनों (शिकारियों) से बचाते हैं, समुद्र की तेज लहरों से सुरक्षा देते हैं, समुद्र तल पर टिके रहने में मदद करते हैं और बढ़ने के साथ-साथ हिलने-डुलने में सहारा देते हैं.

जब सीपियों की बात होती है, तो उनका मतलब आमतौर पर घोंघों जैसे जीवों के बाहरी खोल यानी शेल से होता है. कई दूसरे समुद्री जीव भी कंकाल बनाते हैं, जिनमें सैंड डॉलर जैसे इकाइनोइड्स शामिल हैं जो अंदरूनी कंकाल बनाते हैं.

ये समुद्री जीव अपने नरम शरीर को बाहरी खतरों, जैसे शिकारियों या उनके रहने की जगह में होने वाले बदलावों से बचाने के लिए अपने शेल खुद बनाते हैं. शेल इन समुद्री जीवों को समुद्र तल पर स्थिर रहने, बड़ा होने या ज्यादा अच्छे से घूमने में भी मदद कर सकते हैं.

ये खोल बनते कैसे हैं?

इस बाहरी आवरण या शेल बनाने की प्रक्रिया को ‘बायोमिनरलाइजेशन’ कहते हैं. समुद्री जानवर शेल कैसे बनाते हैं, यह अलग-अलग प्रजातियों के हिसाब से अलग हो सकता है, लेकिन इन सभी जानवरों के शेल बनाने के लिए खास ऊतक होते हैं.

अधिकतर समुद्री जीव अपने शेल कैल्शियम कार्बोनेट से बनाते हैं, जो एक मजबूत मिनरल है और लाइमस्टोन (चूना) में भी पाया जाता है. कुछ स्पंज और सूक्ष्मजीव एक और पदार्थ सिलिका का इस्तेमाल करते हैं. एक समूह ऐसा भी है जो कैल्शियम फॉस्फेट का इस्तेमाल करके शेल बनाता है, जिसका इस्तेमाल हम अपनी हड्डियां बनाने के लिए भी करते हैं.

दुनिया में ऐसे समुद्री जीवों की 50,000 से ज्यादा प्रजातियां हैं जो अलग-अलग तरह के खोल बनाती हैं. इसलिए बीच पर मिलने वाली सीपियों के आकार, रंग और डिजाइन इतने अलग-अलग होते हैं. हड्डियों की तरह ही, सीपियां भी बहुत लंबे समय तक रह सकती हैं. 

बीच पर सीपियां पहुंचती कैसे हैं?

मृत जीवों के सीप समुद्री की लहरों से इधर-उधर होते रहते हैं. इनमें से कई आखिर में किनारे पर बहकर आ जाते हैं. दूसरी कुछ सीपियां समुद्र तल के नीचे दब जाती हैं. दबाव और समय के साथ ये जीवाश्म में बदल जाती हैं.

सीपियां हमें क्या सिखा सकती हैं?

सीपियां सिर्फ सजावट की चीज नहीं हैं. ये असल में समुद्र के इतिहास की छोटी टाइम मशीन हैं. समुद्री जीवों की इतनी अधिक संख्या के अलावा, सीपियों के इतने अधिक होने का एक और कारण यह है कि वे बहुत लंबे समय तक चलती हैं. वैज्ञानिकों ने बताया कि हमारे अनुसंधान में, हम यह पता लगाने के लिए कार्बन डेटिंग प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हैं कि कोई सीप कितनी पुरानी है. 

पुराने शेल में कम रेडियोकार्बन होता है और वैज्ञानिक इसी आधार पर उनकी उम्र का अंदाजा लगा सकते हैं. साइंटिस्ट ने कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान हमने पाया कि समुद्र में कई सीप सैकड़ों या हजारों साल पुराने हैं. ये सीपियां सिर्फ देखने में ही सुंदर नहीं हैं, बल्कि उपयोगी भी हैं. 

इसमें उन जगहों का विवरण भी शामिल है जहां वे रहते थे. सीप की रासायनिक बनावट का अध्ययन करके वैज्ञानिक पुराने मौसम और माहौल के बारे में जान सकते हैं. हम अक्सर यह भी पता लगा सकते हैं कि यह सीप जिस जीव का है उसकी मौत कैसे हुई और उसे अपनी जिंदगी में किन खतरों का सामना करना पड़ा. इसके साथ ही साइंटिस्ट जान सकते हैं कि उस समय समुद्र का तापमान कैसा था? पानी कितना साफ या खारा था, उस जीव ने किन हालात में जीवन बिताया या उसकी मौत कैसे हुई होगी? यानी छोटी ‘टाइम मशीन’ की तरह, ये सीप अपने अंदर पुराने समय के बारे में बहुत सारी जानकारी रखते हैं,

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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