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Home World Kuwait Fire: कुवैत की आग में भारतीयों समेत 40 से अधिक की मौत, पीएम मोदी ने जताया शोक

Kuwait Fire: कुवैत की आग में भारतीयों समेत 40 से अधिक की मौत, पीएम मोदी ने जताया शोक

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Kuwait Fire: कुवैत की आग में भारतीयों समेत 40 से अधिक की मौत, पीएम मोदी ने जताया शोक

Kuwait Fire : कुवैत की एक बिल्डिंग में आग लगने से 40 से अधिक लोगों के मारे जाने की सूचना है. यह आग बुधवार को कुवैत के दक्षिणी इलाके मंगाफ में लगी. अबतक प्राप्त जानकारी के अनुसार यह मजदूरों की बिल्डिंग थी और यहां श्रमिक वर्ग के लोग ही रहते थे. दुर्घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक जताया और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई है. प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखा है और बताया है कि भारतीय दूतावास मदद के लिए पहुंच चुका है. मरने वालों में अधिकतर भारतीय हैं, हालांकि कुवैत सरकार ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है. आग लगने की घटना पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शोक जताया है और हर संभव मदद का आश्वासन भी दिया है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया है कि इतने लोगों के मारे जाने की सूचना से सदमे में हूं. 40 लोगों की मौत हुई है और 50 से अधिक घायल हैं. हम विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं और मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं.

भारतीयों की बिल्डिंग में लगी आग

आजतक के अनुसार इस इमारत में भारतीय मजदूर रहते थे और मरने वालों में सभी भारतीय हैं. हालांकि अभी तक इस खबर की पुष्टि नहीं हुुई है. चैनल का दावा है कि यह इमारत भारतीय मजदूरों की थी और मरने वाले सभी भारतीय हैं.कुवैत टाइम्स की खबरों के अनुसार भारतीय दूतावास ने बताया कि कुवैत में भारतीय राजदूत आदर्श स्वाइका ने अल-अदान अस्पताल का दौरा किया, जहां आग लगने की घटना में घायल हुए 30 से अधिक भारतीय श्रमिकों को भर्ती कराया गया है. राजदूत ने कई मरीजों से मुलाकात की और उन्हें दूतावास से पूरी सहायता का आश्वासन दिया. बताया जा रहा है कि अस्पताल में भरती पीड़ितों की हालत स्थिर है.

अधिकतर लोगों की दम घुटने से हुई मौत

कुवैत के अधिकारियों की ओर से जो जानकारी सामने आई है उसके अनुसार आग पर काबू पा लिया गया है. आग लगने की यह घटना भारतीय समयानुसार सुबह छह बजे के आसपास की है. अधिकतर लोगों की मौत दम घुटने से हुुई है. घायलों को अस्पताल में भरती कराया गया है और इमारत के मालिक को गिरफ्तार करने का आदेश दे दिया है. घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं. कुवैत के मंत्री फवाद ने बताया कि वे घटनास्थल पर गए थे और घटना के कारणों का पता लगाने के आदेश दिए हैं. शुरुआती जांच में ये नियमों के उल्लंघन का मामला प्रतीत होता है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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