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Home World न भारत, न पाकिस्तान! नागरिकता का सपना चकनाचूर, त्याग प्रमाणपत्र न मिलने से फंसी पाकिस्तानी बहनों की जिंदगी

न भारत, न पाकिस्तान! नागरिकता का सपना चकनाचूर, त्याग प्रमाणपत्र न मिलने से फंसी पाकिस्तानी बहनों की जिंदगी

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न भारत, न पाकिस्तान! नागरिकता का सपना चकनाचूर, त्याग प्रमाणपत्र न मिलने से फंसी पाकिस्तानी बहनों की जिंदगी
केरल की दो बहनें नागरिकता विवाद में फंसी हैं/ एआई द्वारा निर्मित ईमेज

Kerala Pakistani Sisters: केरल में रह रही दो बहनों की जिंदगी पिछले कई सालों से नागरिकता के सवाल पर अटकी हुई है. वे न तो पाकिस्तान की नागरिक मानी जा रही हैं और न ही भारत उन्हें अपना नागरिक मान रहा है. वजह है पाकिस्तान की नागरिकता का त्याग प्रमाणपत्र (Renunciation Certificate) न मिल पाना. इस पेचीदगी ने उन्हें “राज्यहीन” बना दिया है, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है.

Kerala Pakistani Sisters: 2008 में परिवार लौटा भारत

बहनों के पिता मोहम्मद मारूफ का जन्म केरल में हुआ था. 1977 में वे पाकिस्तान चले गए थे. वहीं मां रशीदा बानो के माता-पिता भी 1971 में पाकिस्तान में फंस गए और वहां की नागरिकता ले ली. साल 2008 में पूरा परिवार भारत लौटा. इसके बाद पिता और बेटा भारतीय नागरिक बन गए, लेकिन दोनों बहनों की स्थिति अब भी अनिश्चित बनी हुई है.

पासपोर्ट जमा किया, फिर भी फंसी प्रक्रिया

साल 2017 में बहनों ने पाकिस्तान उच्चायोग को अपने पासपोर्ट सौंप दिए. लेकिन उस वक्त उनकी उम्र 21 साल से कम थी. पाकिस्तान के नागरिकता अधिनियम, 1951 के अनुसार, 21 वर्ष से कम उम्र का कोई भी व्यक्ति स्वतंत्र रूप से नागरिकता का त्याग नहीं कर सकता. यही वजह रही कि उच्चायोग ने त्याग प्रमाणपत्र जारी करने से इनकार कर दिया. बाद में जब वे 21 साल की हुईं और दोबारा आवेदन किया, तब भी पाकिस्तान उच्चायोग ने बिना कारण बताए प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया.

अदालत का चक्कर और कानूनी पेच

बहनों के पास 2018 का एक दस्तावेज है, जिसमें लिखा है कि पाकिस्तान को उनकी भारतीय नागरिकता लेने पर कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन भारतीय अधिकारियों ने इसे मानने से इनकार कर दिया. मामला अदालत पहुंचा. 2024 में केरल हाईकोर्ट की एकल न्यायाधीश बेंच ने बहनों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि सरकार को उन्हें भारतीय नागरिकता देनी चाहिए, क्योंकि प्रमाणपत्र लेना उनके लिए असंभव है. लेकिन केंद्र सरकार की अपील पर 23 अगस्त 2025 को दो-न्यायाधीशों की बेंच ने यह फैसला पलट दिया. अदालत ने कहा कि बिना त्याग प्रमाणपत्र के भारतीय नागरिकता नहीं दी जा सकती.

बिना त्याग प्रमाणपत्र भारतीय नागरिकता नहीं, जानें क्या कहता है कानून

भारत में नागरिकता को लेकर अक्सर एक बड़ा सवाल उठता है कि क्या सरकार उन लोगों को नागरिकता दे सकती है जिनके पास अपने पुराने देश का त्याग प्रमाण पत्र नहीं है? इस पर कानून स्पष्ट है, नहीं. भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत, त्याग प्रमाण पत्र के बिना किसी भी विदेशी को भारतीय नागरिकता नहीं दी जा सकती. कोई भी विदेशी तभी भारतीय नागरिक बन सकता है जब वह औपचारिक रूप से अपने पिछले देश की नागरिकता का त्याग कर दे. केरल उच्च न्यायालय ने इसी बारे में फैसला देते हुए कहा था कि पाकिस्तान में जन्मी दो महिलाओं के मामले में, भले ही उन्होंने पाकिस्तानी पासपोर्ट सरेंडर कर दिया हो, त्याग प्रमाण पत्र के अभाव में भारतीय नागरिकता नहीं दी जा सकती. न्यायालय ने यह भी दोहराया कि भारत में दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है और विदेशी नागरिकता का औपचारिक त्याग अनिवार्य है.

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Indian Citizenship: भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955: कैसे मिलती है नागरिकता?

भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत नागरिकता प्राप्त करने के कई प्रावधान हैं. मोटे तौर पर इन्हें पांच हिस्सों में बांटा गया है- 

1. जन्म से नागरिकता

26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 तक भारत में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति स्वतः भारतीय नागरिक होगा. 1 जुलाई 1987 के बाद जन्म लेने वालों के लिए शर्त है कि उसके माता या पिता में से कोई एक जन्म के समय भारतीय नागरिक हो.

2. वंशानुक्रम से नागरिकता

विदेश में जन्म लेने वाले बच्चे को तभी नागरिकता मिलेगी जब उसके माता या पिता में से कोई एक भारत का नागरिक हो. ऐसे बच्चों का जन्म से एक वर्ष के भीतर भारतीय दूतावास में पंजीकरण कराना जरूरी है. 1992 के नागरिकता संशोधन अधिनियम के बाद मां की नागरिकता के आधार पर भी नागरिकता दी जाने लगी.

3. पंजीकरण से नागरिकता

अवैध प्रवासी को छोड़कर अन्य व्यक्ति आवेदन देकर नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं. इसमें शामिल हैं भारतीय मूल के व्यक्ति, जो सात साल भारत में रह चुके हों. अविभाजित भारत के बाहर (पाकिस्तान और बांग्लादेश को छोड़कर) किसी देश के नागरिक. भारतीय नागरिक से विवाह करने वाला व्यक्ति, जिसने सात साल भारत में निवास किया हो. वे नाबालिग, जिनके माता या पिता भारतीय हों. राष्ट्रमंडल देशों के नागरिक, जो भारत में रह रहे हों या भारत सरकार की सेवा में हों.

4. भूमि-विस्तार से नागरिकता

जब कोई नया क्षेत्र भारत में शामिल होता है, तो वहां के निवासियों को स्वतः भारतीय नागरिकता मिल जाती है. जैसे, 1961 में गोवा और 1962 में पुद्दुचेरी के भारत में विलय के बाद वहां के लोगों को नागरिकता मिल गई.

5. नेचुरलाइजेशन से नागरिकता

विदेशी नागरिक, जो निर्धारित अवधि तक भारत में रहे हों और अधिनियम की तीसरी अनुसूची की शर्तों को पूरा करते हों, प्राकृतिककरण (Naturalization) की प्रक्रिया से नागरिक बन सकते हैं. भारतीय नागरिकता केवल आवेदन करने या पासपोर्ट जमा करने से नहीं मिल सकती. इसके लिए कानूनी रूप से पूर्व नागरिकता का त्याग प्रमाणपत्र देना अनिवार्य है. यही कारण है कि अदालतें और भारत सरकार इस मामले में सख्त रवैया अपनाती हैं. इन सभी प्रावधानों में एक साझा शर्त है – आवेदक को अपनी पिछली नागरिकता छोड़नी होगी.

नागरिकता पाने के लिए जरूरी दस्तावेज

भारतीय नागरिकता ऑनलाइन के अनुसार, भारतीय नागरिकता पाने के लिए आवेदक को गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है. इस दौरान जरूरी दस्तावेज हैं इस प्रकार- पासपोर्ट आकार की फोटो, माता-पिता के पहचान दस्तावेज (जैसे जन्म प्रमाण पत्र). विदेशी पासपोर्ट और लॉन्ग टर्म वीजा (LTV) की प्रति. ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद गृह मंत्रालय (MHA) की ओर से एक फाइल नंबर जारी किया जाता है. आगे की जांच और प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नागरिकता प्रदान की जाती है.

रोजमर्रा की जिंदगी पर असर

बहनों की “राज्यहीन” स्थिति ने उनके जीवन को कठिन बना दिया है. मोबाइल सिम लेना, बच्चों का स्कूल में दाखिला कराना और पासपोर्ट बनवाना जैसे सामान्य काम भी चुनौती बन गए. एक बहन का पति खाड़ी देशों से नौकरी छोड़कर लौट आया क्योंकि वह विदेश यात्रा नहीं कर सकती थीं. दूसरी बहन का बेटा गंभीर बीमारी के इलाज के लिए विदेश नहीं जा पा रहा है. अधिकारियों ने उन्हें आधार कार्ड तो दे दिया, लेकिन यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है.

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आगे की राह

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि 2017 में वे नाबालिग थीं, इसलिए पाकिस्तान से त्याग प्रमाणपत्र लेना संभव नहीं था. अब स्थिति यह है कि उन्होंने पासपोर्ट सौंप दिया है, लेकिन पाकिस्तान लौटकर प्रमाणपत्र लेना भी असंभव है. फिलहाल उनके पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प बचा है. हालांकि, जब तक पाकिस्तान की ओर से त्याग प्रमाणपत्र नहीं मिलता, भारतीय नागरिकता पाना लगभग असंभव माना जा रहा है.

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