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Home World भाड़े के सैनिक या सुपारी किलर! जंग के पीछे पाकिस्तान नहीं कोई और… काबुल-इस्लामाबाद तनाव पर बोला तालिबान

भाड़े के सैनिक या सुपारी किलर! जंग के पीछे पाकिस्तान नहीं कोई और… काबुल-इस्लामाबाद तनाव पर बोला तालिबान

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भाड़े के सैनिक या सुपारी किलर! जंग के पीछे पाकिस्तान नहीं कोई और… काबुल-इस्लामाबाद तनाव पर बोला तालिबान
काबुल-इस्लामाबाद तनाव पर बोला तालिबान; यह पाकिस्तान की जंग नहीं है, कोई और ही पर्दे के पीछे से खेल रहा है.

Taliban on Pakistan Role Kabul-Islamabad Tensions: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तालिबान की ओर से स्पष्ट संदेश सामने आया है. तालिबान नेतृत्व का कहना है कि वह किसी भी तरह के सैन्य टकराव के पक्ष में नहीं है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए संवाद और पड़ोसी देशों के साथ सहयोग को जरूरी मानता है. तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि संगठन पाकिस्तान के साथ युद्ध की कोई संभावना नहीं देखता. उनके मुताबिक, तालिबान की नीति अच्छे पड़ोसी संबंधों पर आधारित है और दोनों देशों के बीच टकराव से किसी को भी लाभ नहीं होगा. टोलो न्यूज के अनुसार, उन्होंने यह भी कहा कि काबुल और इस्लामाबाद के बीच जारी तनाव ने कई क्षेत्रों पर नकारात्मक असर डाला है और इसका कोई सकारात्मक या रचनात्मक नतीजा नहीं निकल रहा.

मुजाहिद ने मौजूदा हालात के पीछे दो संभावित वजहें गिनाईं. उनका कहना था कि संभव है पाकिस्तान के कुछ वर्ग किसी अन्य देश के इशारे पर काम कर रहे हों, या फिर उन्होंने यह मान लिया हो कि सत्ता में आने के बाद तालिबान पाकिस्तान के प्रभाव में ही रहेगा. इसी संदर्भ में उन्होंने इस धारणा को सिरे से खारिज किया कि वर्तमान तनाव पाकिस्तान के अपने राष्ट्रीय हितों से जुड़ा हुआ है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “यह पाकिस्तान की लड़ाई नहीं है. यह संघर्ष किसी और की ओर से थोपा जा रहा है और इसमें शामिल लोग भाड़े के सैनिकों या सुपारी किलरों की तरह काम कर रहे हैं.” 

TTP के ठिकाने, संचालन क्षेत्र और नियंत्रण सब पाकिस्तान में

मुजाहिद ने यह भी कहा कि कुछ लोगों ने यह मान लिया था और इसे बढ़ावा दिया कि इस्लामिक अमीरात पाकिस्तान का ही विस्तार है और उसके नियंत्रण में है. संभव है कि पाकिस्तान ने भी कभी इस सोच को सच मान लिया हो. सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बोलते हुए तालिबान प्रवक्ता ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को पाकिस्तान का आंतरिक मसला बताया. उनके अनुसार, TTP के ठिकाने, संचालन क्षेत्र और नियंत्रण वाले इलाके सभी पाकिस्तान के भीतर ही हैं, इसलिए इस संगठन को अफगानिस्तान से जोड़ने का कोई आधार नहीं है.

हमने किसी से मदद नहीं ली

विदेशी समर्थन को लेकर लगाए जाने वाले आरोपों पर भी मुजाहिद ने प्रतिक्रिया दी और 20 वर्षों के संघर्ष के दौरान तालिबान को किसी बाहरी ताकत से मदद मिलने के दावों को खारिज किया. उन्होंने कहा कि तालिबान किसी भी विदेशी शक्ति के प्रति जवाबदेह नहीं है और अफगानिस्तान का संघर्ष पूरी तरह उसकी अपनी धरती पर लड़ा गया. उनके मुताबिक, लड़ाई देश के हर हिस्से फरयाब, कुंदूज, बदख्शां, हेरात, कंधार और हेलमंद सहित सभी प्रांतों में हुई, जो यह दर्शाता है कि यह संघर्ष जनता से जुड़ा और व्यापक था, न कि किसी बाहरी देश द्वारा संचालित.

धार्मिक विद्वानों के बीच बातचीत से सुलझेगा मामला!

ये बयान ऐसे समय सामने आए हैं जब काबुल और इस्लामाबाद के रिश्तों में तनाव लगातार बढ़ रहा है. सीमा पर दोनों देश कई बार भिड़ चुके हैं. शांति वार्ता के लिए दोनों देशों ने पहले तुर्की और फिर सऊदी अरब में बातचीत की. लेकिन इससे मामला नहीं बना. हालांकि दोनों देशों के उलेमाओं के बीच कुछ सांठगांठ बनती दिख रही है. मौलाना फजलुर रहमान के द्वारा पाकिस्तानी सेना की ओर से अफगानिस्तान पर किए गए हमले की आलोचना के बाद, तालिबान की ओर से सिराजुद्दीन हक्कानी ने भी इस बात की ताईद की. इसी बीच, टोलो न्यूज के अनुसार, इसी परिप्रेक्ष्य में धार्मिक विद्वानों और राजनीतिक नेताओं ने एक वर्चुअल चर्चा के दौरान दोनों देशों से तुरंत बातचीत फिर से शुरू करने की अपील की है, ताकि आपसी भरोसा बहाल किया जा सके और सीमा चौकियों पर मानवीय गतिविधियों को सुचारु रूप से आगे बढ़ाया जा सके.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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