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Home World जापान में ज्वालामुखी का जलजला, 4.4 किलो मीटर तक उठा लावा का धुआं, देखें विस्फोट का खतरनाक वीडियो

जापान में ज्वालामुखी का जलजला, 4.4 किलो मीटर तक उठा लावा का धुआं, देखें विस्फोट का खतरनाक वीडियो

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जापान में ज्वालामुखी का जलजला, 4.4 किलो मीटर तक उठा लावा का धुआं, देखें विस्फोट का खतरनाक वीडियो
जापान के सकुराजिमा में ज्वालामुखी फटने से 4,400 मीटर ऊंचा धुआं उठा. सांकेतिक तस्वीर.

Japan Sakurajima Volcano eruption: जापान में रविवार को तड़के एक ज्वालामुखी का ज्वार देखने को मिला. दक्षिण-पश्चिम जापान के कागोशिमा प्रीफेक्चर में स्थित सकुराजिमा ज्वालामुखी में जोरदरा विस्फोट हुआ. इसकी वजह से राख और धुएँ का गुबार लगभग 4,400 मीटर ऊँचाई तक उठ गया. क्योदो न्यूज़ ने मौसम एजेंसी के हवाले से यह जानकारी दी. प्रारंभिक विस्फोट के बाद भी ज्वालामुखी सक्रिय रहा, जिसके चलते एजेंसी ने कागोशिमा, कुमामोटो और मियाजाकी प्रीफेक्चरों के लिए राख गिरने की चेतावनी जारी की. राहत की बात है कि अब तक किसी भी व्यक्ति के घायल होने या इमारतों को नुकसान पहुँचने की खबर नहीं है.

स्थानीय मौसम ऑब्जर्वेटरी के अनुसार, रविवार रात 12:57 बजे (स्थानीय समय) मिनामिडाके क्रेटर में विस्फोट हुआ. यह विस्फोट पिछले साल 18 अक्टूबर के बाद पहली बार 4,000 मीटर से अधिक ऊँचा गुबार लेकर उठा. हालिया विस्फोटों की सीरीज में बड़े ज्वालामुखी पत्थर पाँचवें स्टेशन तक गिरते देखे गए, लेकिन कोई पायरोक्लास्टिक प्रवाह दर्ज नहीं हुआ. इस विस्फोट के बाद चेतावनी स्तर पांच में से तीन पर बना हुआ है, इसकी वजह से पर्वत क्षेत्र में प्रवेश सीमित रहता है. इस विस्फोट के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. देखें- 

जापान में होते रहते हैं वोल्कैनो विस्फोट

जापान में लगभग 110 एक्टिव वोलकैनो हैं. वहीं सकुराजिमा जापान के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है. यह कभी एक द्वीप था, लेकिन 1914 के लावा प्रवाह ने इसे क्यूशू द्वीप के ओसुमी प्रायद्वीप से जोड़ दिया. 2019 में इससे 5 किमी से ऊंचा लावा विस्फोट हुआ था. जापान रिंग ऑफ फायर क्षेत्र में आता है, इस वजह से यहां पर काफी ज्वालामुखी विस्फोट होते रहते हैं. 

प्रशासन ने बरती सतर्कता

इस बार हुआ विस्फोट काफी ज्यादा धुआं और लावा लेकर निकला. इस वजह से प्रशासन ने लोगों को सतर्कता बरतने की सलाह दी है. मास्क पहनने की सलाह दी गई है. कोगोशिमा शहर और उसके आसपास के इलाके में राख की मोटी परत फैल गई है, जिससे दृश्यता कम हो गई है. एहतियातन एयरपोर्ट को बंद कर दिया गया है, जिससे कम से कम 30 फ्लाइट्स कैंसिल कर दी गई हैं. सकुराजिमा में छोटे-मोटे विस्फोट होते रहते हैं, लेकिन इस बार दबाव की अधिकता थी, जिसकी वजह से राख और धुआं काफी ऊंचाई तक गया. वैज्ञानिक सैटेलाइट और रडार से इस पर नजर बनाए हुए हैं.  

ज्वालामुखी विस्फोट के लिए तैयार रहता है जापान

इससे पहले 30 अगस्त को जापानी सरकार ने माउंट फूजी के बड़े विस्फोट के संभावित प्रभावों, विशेषकर राख गिरने को दर्शाने वाला सिम्युलेटेड वीडियो जारी किया था, ताकि लोगों को ऐसी आपदा के लिए बेहतर तरीके से तैयार किया जा सके.  10 मिनट के इस वीडियो में कंप्यूटर ग्राफिक्स की मदद से 1707 में हुए आखिरी बड़े विस्फोट के समान पैमाने की स्थिति दिखाई गई है. वीडियो में चेतावनी दी गई है कि बिजली आपूर्ति, सीवेज सिस्टम, सड़कें, और रेलमार्ग जैसी आधारभूत सुविधाएँ गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं.

जापान के 3,776 मीटर सबसे ऊँचे माउंट फ़ूजी पर संभावित आपदा दिखाता यह वीडियो कैबिनेट ऑफिस की वेबसाइट पर उपलब्ध है. यह वीडियो 26 अगस्त को ज्वालामुखी आपदा तैयारी जागरूकता दिवस के मौके पर जारी किया गया. वीडियो में टोक्यो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एमेरिटस तोशित्सुगु फ़ुजिई कहते हैं, “यह थोड़ा असामान्य है कि माउंट फूजी पिछले 300 सालों से नहीं फटा है.” उनके अनुसार, औसतन फूजी हर 30 साल में एक बार फटता है.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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