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Home World ट्रंप की बेटी इवांका को मारने की साजिश, IRGC से जुड़ा आरोपी गिरफ्तार, सुलेमानी की मौत का बदला लेना चाहता था

ट्रंप की बेटी इवांका को मारने की साजिश, IRGC से जुड़ा आरोपी गिरफ्तार, सुलेमानी की मौत का बदला लेना चाहता था

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ट्रंप की बेटी इवांका को मारने की साजिश, IRGC से जुड़ा आरोपी गिरफ्तार, सुलेमानी की मौत का बदला लेना चाहता था
राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी बेटी इवांका. फोटो- एक्स (@@vellasrv).

Ivanka Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप की हत्या की कथित साजिश को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है. ईरान समर्थित आतंकी नेटवर्क से जुड़े एक संदिग्ध ने इवांका ट्रंप को निशाना बनाने की योजना बनाई थी. बताया गया है कि यह साजिश ईरानी सैन्य कमांडर और कुद्स फोर्स के चीफ कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए रची गई थी.

न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी की पहचान 32 वर्षीय मोहम्मद बकर साद दाऊद अल सादी के रूप में हुई है. उसे पहले 15 मई को तुर्की में गिरफ्तार किया गया और बाद में अमेरिका प्रत्यर्पित कर दिया गया. जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपी ने इवांका ट्रंप की हत्या करने की कसम खाई थी. बताया गया है कि उसके पास फ्लोरिडा स्थित उस घर का नक्शा भी था, जहां इवांका अपने पति जेरेड कुश्नर के साथ रहती हैं.

जांच एजेंसियों के अनुसार अल-सादी ने सोशल मीडिया एक्स पर फ्लोरिडा के उस इलाके की तस्वीर पोस्ट की थी. इस पोस्ट में अरबी भाषा में लिखा गया था, ‘ अमेरिकियों इस फोटो को देख लो और ध्यान में रखो कि न तो तुम्हारे महल और न ही सीक्रेट सर्विस तुम्हें बचा पाएगी.’ इसके साथ ही दावा किया था कि निगरानी और विश्लेषण का काम पहले से चल रहा है. हमारा बदला बस समय की बात है. रिपोर्ट के अनुसार, उसके पास इराक का सर्विस पासपोर्ट मिला था, जो आमतौर पर सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को प्रधानमंत्री की मंजूरी के बाद दिया जाता है.

कासिम सुलेमानी की मौत के बाद बना बदले का प्लान

रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी ने 2020 में बगदाद में अमेरिकी ड्रोन हमले में कासिम सुलेमानी के मारे जाने के बाद ट्रंप परिवार को निशाना बनाने का फैसला किया. वॉशिंगटन स्थित इराकी दूतावास के पूर्व डिप्टी मिलिट्री अटैची एंतिफाध कानबार ने दावा किया कि अल-सादी खुलेआम बदला लेने की बात करता था. कानबार के मुताबिक वह लोगों से कहता था कि ‘ट्रंप ने हमारा घर जलाया है, इसलिए हमें इवांका को मारकर ट्रंप का घर तबाह करना चाहिए.’ 

कई आतंकी संगठनों से जुड़े होने का आरोप

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अल-सादी इराक और ईरान से जुड़े आतंकी नेटवर्क का बड़ा चेहरा है. उसके संबंध कताइब हिज्बुल्लाह और ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूश्नरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC से बताए गए हैं. अमेरिकी न्याय विभाग ने अल-सादी पर टोरंटो, लंदन, नीदरलैंड के एम्सटर्डम, बेल्जियम के रॉटरडैम और लीज, यानी अमेरिका और यूरोप में 18 हमलों और हमले की कोशिशों से जुड़े आरोप लगाए हैं.

IRGC ट्रेनिंग और आतंकी नेटवर्क से जुड़ाव

रिपोर्ट के अनुसार अल-सादी का कासिम सुलेमानी से करीबी रिश्ता था. रिपोर्ट में दावा किया गया कि 2006 में उसके पिता, ईरानी ब्रिगेडियर जनरल अहमद काजमी की मौत के बाद वह सुलेमानी को पिता समान मानने लगा था. उसकी परवरिश बगदाद में उसकी इराकी मां के साथ हुई, लेकिन बाद में उसे ईरान भेजा गया, जहां IRGC के साथ उसकी ट्रेनिंग हुई. एंतिफाध कानबार के अनुसार अल-सादी बाद में धार्मिक यात्राओं से जुड़ी ट्रैवल एजेंसी चलाने लगा. इस काम की वजह से उसे कई देशों में यात्रा करने और आतंकी नेटवर्क से संपर्क बनाने का मौका मिला.

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ब्रुकलिन मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा गया है सादी

गंभीर आतंकी आरोपों के बावजूद अल-सादी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय था. कोर्ट दस्तावेजों में ऐसी तस्वीरें भी शामिल हैं, जिनमें वह कथित तौर पर कासिम सुलेमानी के साथ किसी सैन्य परिसर में नक्शे और उपकरणों का अध्ययन करता दिखाई दे रहा है. सुलेमानी की मौत के बाद 2020 में अल-सादी ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि वह ‘अमेरिकी दुश्मन की हार तक’ सोशल मीडिया छोड़ रहा है. फिलहाल अल-सादी को ब्रुकलिन स्थित मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में अलग सेल में रखा गया है.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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