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Home World इजरायल ने इस मुस्लिम देश को दिया आयरन बीम और डोम, चुपचाप सैनिक भी तैनात, भारत का है खास दोस्त

इजरायल ने इस मुस्लिम देश को दिया आयरन बीम और डोम, चुपचाप सैनिक भी तैनात, भारत का है खास दोस्त

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इजरायल ने इस मुस्लिम देश को दिया आयरन बीम और डोम, चुपचाप सैनिक भी तैनात, भारत का है खास दोस्त
इजरायल के आयरन डोम द्वारा दागी गई मिसाइलों के बाद का दृश्य. फोटो- एक्स (@IDF)

Israel Deployed Weapons System UAE: अरब सागर की गर्म रेत की तरह ही पश्चिम एशिया में तनाव है. ईरान युद्ध की वजह से पूरे खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष फैला हुआ है. इसी बीच एक बड़ा जियो पॉलिटिकल खुलासा सामने आया है. इजरायल ने कथित तौर पर चुपचाप अपना लेजर आधारित एयर डिफेंस सिस्टम आयरन बीम, आयरन डोम, ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम और सैनिकों का एक दस्ता संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में तैनात किया. 

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम का मकसद ईरान की ओर से बढ़ते मिसाइल और ड्रोन हमलों से यूएई की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. यह संभवतः खुले तौर पर पहली बार सामने आया है, जब इजरायल ने किसी मुस्लिम देश में अपने रक्षा हथियारों के साथ सैनिकों को भी उतारा हो. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की तरफ से लगातार हो रहे हवाई हमलों के खतरे को देखते हुए, इजरायल ने अपने अत्याधुनिक रक्षा सिस्टम यूएई को उपलब्ध कराए. इन हमलों में बैलिस्टिक मिसाइलें और बड़ी संख्या में ड्रोन शामिल थे, जिनसे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को गंभीर चुनौती मिली.

‘स्पेक्ट्रो’ निगरानी सिस्टम की भी तैनाती

सिर्फ लेजर हथियार ही नहीं, इजरायल ने स्पेक्ट्रो नामक एक एडवांस निगरानी प्लेटफॉर्म भी यूएई में भेजा. यह सिस्टम लगभग 20 किलोमीटर की दूरी से ड्रोन का पता लगाने में सक्षम है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इजरायल ने सिर्फ उपकरण ही नहीं भेजे, बल्कि अपने प्रसिद्ध आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम को भी में तैनात किया. इसके संचालन के लिए इजरायली सैन्यकर्मियों को भी भेजा गया. एक सूत्र के अनुसार, यह संख्या कई दर्जन सैनिकों की थी.

विकासाधीन सिस्टम भी तुरंत भेजे गए

दिलचस्प बात यह है कि यूएई को भेजे गए कई सिस्टम अभी प्रोटोटाइप स्टेज में थे. यानी वे पूरी तरह विकसित या इजरायल की नियमित सैन्य संरचना में शामिल नहीं थे. लेकिन क्षेत्र में बढ़ते खतरे के कारण इजरायल ने जो उपलब्ध था उसे तुरंत तैनात कर दिया, भले ही वे रडार सिस्टम के साथ पूरी तरह सिंक्रोनाइज न हों.

क्या है इजरायली हथियारों की खासियत?

1. आयरन बीम (लेजर डिफेंस सिस्टम)

हाई-एनर्जी लेजर तकनीक पर आधारित

4-5 सेकंड में रॉकेट या ड्रोन को नष्ट करने की क्षमता

कम दूरी के खतरों के खिलाफ बेहद प्रभावी

इसे राफेल एडवांस डिफेंस सिस्टम्स ने विकसित किया है

कम लागत में इंटरसेप्शन, क्योंकि इसमें मिसाइल की जरूरत नहीं होती

2. आयरन डोम (एयर डिफेंस सिस्टम)

शॉर्ट-रेंज रॉकेट और आर्टिलरी को रोकने में सक्षम

रडार और इंटरसेप्टर मिसाइल का संयोजन

इजरायल में पहले से व्यापक उपयोग

90% तक सफलता दर का दावा

3. स्पेक्ट्रो (ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम)

20 किमी तक ड्रोन का पता लगाने में सक्षम

निगरानी और शुरुआती चेतावनी के लिए उपयोगी

छोटे और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन भी पकड़ सकता है

ईरानी हमला और इजरायल का खुफिया सहयोग

इजरायल ने खुफिया जानकारी भी साझा की

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ कार्रवाई के बाद, ईरान ने जवाबी हमला करते हुए यूएई पर 500 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें और करीब 2,000 ड्रोन लॉन्च किए. इसके जवाब में यूएई ने बहु-स्तरीय एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय किया और अधिकांश हमलों को निष्क्रिय करने में सफलता पाई. 

इसके जवाब में सिर्फ सैन्य तकनीक ही नहीं, इजरायल ने यूएई के साथ खुफिया जानकारी भी साझा की. इसमें ईरान के भीतर मिसाइल लॉन्च की तैयारियों से जुड़े अलर्ट शामिल थे, जिससे समय रहते बचाव की रणनीति बनाई जा सकी.

भारत के दोनों दोस्तों के बीच बढ़ रही दोस्ती

एक क्षेत्रीय अधिकारी ने इस सहयोग को ‘इजरायल का दोस्त होने के फायदे’ बताते हुए इसकी अहमियत पर जोर दिया. भारत की इन दोनों देशों से अच्छी दोस्ती है. इसी साल जनवरी में यूएई के प्रशासक शेख मोहम्मद बिन जाएद अल नाहयान भारत दौरे पर आए थे. यह दौरा केवल  3 घंटे का ही था. लेकिन इतने छोटे से समय के लिए शेख जाएद का भारत आने की विशेष वजहें गिनाईं गई थीं, जिनमें रक्षा सहयोगी भी शामिल था. हालांकि, इसके बारे में स्पष्ट रूप से कुछ सामने नहीं आया था. वहीं भारत का इजरायल के साथ विशेष रक्षा सहयोग का लंबा इतिहास रहा है.

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अब्राहम समझौते के बाद मजबूत हुए रिश्ते

इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि पश्चिम एशिया में बदलते सुरक्षा हालात के बीच इजरायल और यूएई के बीच सैन्य सहयोग तेजी से गहरा रहा है. एक मुस्लिम और वो भी अरब देश को अपनी सबसे संवेदनशील सैन्य तकनीक सौंपना इस बात का संकेत है कि इजराइल और यूएई साझेदार ही नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद और रणनीतिक सहयोगी भी हो रहे हैं. यह बढ़ता सहयोग 2020 में हुए अब्राहम अकॉर्ड के बाद से संभव हुआ. इस समझौते को डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में लागू किया गया था, जिससे दोनों के बीच संबंध सामान्य हुए. इसके बाद से दोनों देशों के बीच रक्षा और आर्थिक सहयोग लगातार बढ़ रहा है.

अरब का इजरायल के अस्तित्व में आने के साथ ही कड़वाहट और अविश्वास भरा रिश्ता रहा है, लेकिन हाल के घटनाक्रम इस पुराने समीकरण को बदलते हुए दिख रहे हैं. क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच यूएई और इजरायल का यह उभरता हुआ गठजोड़ ईरान के खिलाफ एक संयुक्त रक्षा मोर्चे का रूप लेता दिख रहा है, जो आने वाले समय में पश्चिम एशिया की शक्ति-संतुलन को और प्रभावित कर सकता है. यह साझेदारी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के साथ ही क्षेत्रीय भू-राजनीति में नए समीकरण भी पैदा कर रही है.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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