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Home World ट्रंप की ‘धमकी’ के बाद होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने आगे आए 6 बड़े देश, ईरान को दी चेतावनी, क्या करेंगे?

ट्रंप की ‘धमकी’ के बाद होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने आगे आए 6 बड़े देश, ईरान को दी चेतावनी, क्या करेंगे?

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ट्रंप की ‘धमकी’ के बाद होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने आगे आए 6 बड़े देश, ईरान को दी चेतावनी, क्या करेंगे?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में विकट स्थिति का सांकेतिक चित्र. फोटो- एआई जेनरेटेड.

Iran War Hormuz Strait Blockade: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को ‘ईरान को खत्म कर देने’ की धमकी दी, क्योंकि उसने कतर के रास लफान गैस रिफाइनरी पर अटैक कर दिया. इसकी वजह से पूरी दुनिया में गैस संकट आ सकता है. कतर एनर्जी के सीईओ का दावा है कि इससे कतर की 17 प्रतिशत गैस उत्पादन क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे उबरने में उसे 5 साल लगेंगे. इसके बाद दुनिया के छह देशों ने संकेत दिया है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) पर ईरान की नाकेबंदी से निपटने के लिए संयुक्त प्रयास पर विचार कर सकते हैं. 

यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड और जापान ने कहा कि वे इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से आवाजाही बहाल करने के उद्देश्य से एक मिशन की योजना बनाने के लिए तैयार हैं. अपने बयानों में, इन देशों ने ईरान की नाकेबंदी की कड़ी निंदा की. हालाँकि, इस संयुक्त प्रयास के लिए अभी तक कोई समय-सीमा या स्वरूप घोषित नहीं किया गया है.

जर्मनी और नीदरलैंड ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी भागीदारी युद्धविराम पर, या कम से कम, शत्रुतापूर्ण गतिविधियों के रुकने पर निर्भर करेगी. इटली के साथ साझा बयान में नीदरलैंड ने कहा, ‘हम उन देशों की प्रतिबद्धता का स्वागत करते हैं जो तैयारी संबंधी योजना में जुटे हैं.’ वहीं, यूके के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी तेल और गैस प्रतिष्ठानों सहित नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा की.”

संयुक्त बयान में सहयोगी देशों ने कहा, ‘हम बढ़ते संघर्ष को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं.’ उन्होंने ईरान से अपील करते हुए कहा, ‘हम ईरान से आग्रह करते हैं कि वह तुरंत धमकियां देना, बारूदी सुरंगें बिछाना, ड्रोन और मिसाइल हमले करना और वाणिज्यिक जहाजों के रास्ते को अवरुद्ध करने के अन्य प्रयास बंद करे. समुद्री आवागमन की स्वतंत्रता अंतरराष्ट्रीय कानून का एक बुनियादी सिद्धांत है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन भी शामिल है.’ इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान की इन कार्रवाइयों का असर दुनिया के हर हिस्से के लोगों पर पड़ेगा, खासकर कमजोर तबकों पर.

सुरक्षित आवागमन पर जोर

यह कदम वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों को कम करने में मदद कर सकता है. होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का एक बेहद अहम ऊर्जा मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20% गुजरता है. संयुक्त बयान में समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया गया. साथ ही यह भी कहा गया कि आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से समन्वित तरीके से तेल जारी करने और उत्पादन बढ़ाने जैसे कदम उठाने की जरूरत है. इन छह देशों ने युद्ध के दोनों पक्षों से तेल और गैस सुविधाओं पर हमले तुरंत रोकने की अपील की.

ट्रंप ने अपने सहयोगियों को लेकर क्या कहा था?

यह घोषणा उस समय सामने आई जब डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ईरान को ‘पूरी तरह तबाह’ कर सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘मैं सोच रहा हूं कि क्या होगा अगर हम ईरान के तथाकथित ‘आतंकी राज्य’ को पूरी तरह खत्म कर दें और जो देश इसका इस्तेमाल करते हैं, उन्हें ही इस ‘जलडमरूमध्य’ की जिम्मेदारी दे दें? इससे हमारे कुछ निष्क्रिय सहयोगी तेजी से सक्रिय हो जाएंगे.’ इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि उन्हें अमेरिका के कई नाटो सहयोगियों से जानकारी मिली है कि वे अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों में ‘शामिल नहीं होना चाहते’.

ट्रंप के बयान के बाद, ब्रिटेन के एक रक्षा अधिकारी ने बुधवार (18 मार्च 2026) को कहा था कि होर्मुज स्ट्रेट में खतरे का स्तर इतना ज्यादा है कि अभी कई देश अपने युद्धपोत वहां भेजने को तैयार नहीं हैं. उन्होंने आगे कहा कि वे अपने सहयोगियों के साथ मिलकर यह देख रहे हैं कि स्थिति अनुकूल होने पर क्या किया जा सकता है. अधिकारी ने यह भी बताया कि लंदन ने  होर्मुज समस्या पर आगे की रणनीति बनाने के लिए यूएस सेंट्रल कमांड के पास कुछ अतिरिक्त सैन्य योजनाकार भेजे हैं.

यूरोपीय देश और जापान खाड़ी क्षेत्र से तेल आयात पर काफी निर्भर हैं. वे तेजी से बढ़ती तेल कीमतों और आपूर्ति में रुकावट के खतरे को लेकर चिंतित हैं. बुधवार रात ईरान और कतर में हुए हमलों की वजह से क्रूड ऑयल की कीमत 116 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थी. हालांकि, आज 20 मार्च को यह 102 डॉलर तक पहुंच गया है. लेकिन ये कीमतें युद्ध शुरू होने के पहले- 73 डॉलर से कहीं ज्यादा है. इसके अलावा होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से भविष्य भी संकट में है. 

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बढ़ती वैश्विक चिंता

ईरान द्वारा जलडमरूमध्य पर प्रभावी नाकाबंदी के कारण इस अहम समुद्री मार्ग से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है. सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का कच्चा तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से गुजरता है. यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर बमबारी शुरू की थी. इसके जवाब में तेहरान ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में हमले किए. 

इस संघर्ष में अब तक 23 वाणिज्यिक जहाज हमलों या घटनाओं का शिकार हो चुके हैं, इनमें 10 टैंकर भी शामिल हैं. इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, इस स्थिति के कारण जलडमरूमध्य के पश्चिम में लगभग 3,200 जहाजों पर सवार करीब 20,000 नाविक फंसे हुए हैं. 

वहीं, भारत के भी 22 जहाज इसी स्ट्रेट में फंसे हैं, जिसमें 611 नाविक शामिल हैं. हालांकि, भारत अपने जहाजों और तेल-गैस की सप्लाई के लिए ईरान के साथ बातीचत कर रहा है. 4 मार्च के बाद से भारत में तीन-चार जहाज तेल और गैस लेकर आ चुके हैं. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आने वाले समय में और जहाज भारत आ सकते हैं. 

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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