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Home World ईरान ने अमेरिका-इजराइल के सामने रखी युद्ध खत्म करने की 3 शर्तें, क्या मानेंगे ट्रंप?

ईरान ने अमेरिका-इजराइल के सामने रखी युद्ध खत्म करने की 3 शर्तें, क्या मानेंगे ट्रंप?

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ईरान ने अमेरिका-इजराइल के सामने रखी युद्ध खत्म करने की 3 शर्तें, क्या मानेंगे ट्रंप?
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान

Iran War Peace Conditions: ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहे युद्ध का आज 13वां दिन है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी दी कि उन्होंने शांति बहाल करने के लिए रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बात की है. राष्ट्रपति के मुताबिक, युद्ध खत्म करने के लिए तीन शर्तें हैं: 

  • पहला- ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता दी जाए.
  • दूसरा- युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा (रेपेरेशंस) दिया जाए.
  • तीसरा- भविष्य में किसी भी तरह के हमले को रोकने के लिए पुख्ता अंतरराष्ट्रीय गारंटी दी जाए. उनका आरोप है कि इस युद्ध को अमेरिका और इजराइल ने शुरू किया है.

फरवरी के अंत से शुरू हुई थी जंग

रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त हमले किए थे. इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई, शीर्ष सैन्य कमांडर और कई नागरिक मारे गए थे. इसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इजराइल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाना शुरू किया. ईरान के संयुक्त राष्ट्र में प्रतिनिधि आमिर-सईद इरावानी ने बताया कि 28 फरवरी के बाद से अब तक 1,348 से ज्यादा नागरिकों की मौत हो चुकी है और 17,000 से अधिक लोग घायल हैं.

UN की निंदा और भारत का रुख

बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने एक प्रस्ताव पास किया, जिसमें खाड़ी देशों और जॉर्डन पर ईरान के हमलों की निंदा की गई. बहरीन की तरफ से पेश किए गए इस प्रस्ताव को 13-0 के बहुमत से पास किया गया. भारत ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है, जबकि चीन और रूस ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया. इस प्रस्ताव में ईरान से तुरंत हमले रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद न करने की चेतावनी दी गई है.

ईरान का ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस’

ईरान ने तेल अवीव, हाइफा और क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4’ के तहत 40वां हमला किया है. ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ‘इमाम अली’ नाम के इस ऑपरेशन में ‘घद्र’, ‘एमाद’ और ‘फत्तह’ जैसी मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया. वहीं, इराक के तट पर दो तेल टैंकरों पर भी हमले की खबर है, जिसमें एक क्रू मेंबर की मौत हो गई. न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) की एक रिपोर्ट का दावा है कि ईरान के पलटवार में पश्चिम एशिया में स्थित अमेरिका के कम से कम 17 सैन्य ठिकानों और अन्य सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है. इसमें अमेरिकी THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्टम का रडार भी शामिल है, जो एक बड़ा नुकसान माना जा रहा है.

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वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

ईरान के हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावित होने से दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई है, जिससे कीमतें बढ़ गई हैं. ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर ‘प्रेस टीवी’ के अनुसार, IRGC के जवान वहां तैनात हैं और उन्होंने अब तक 14 तेल टैंकरों को निशाना बनाने का दावा किया है, जिनमें दो अमेरिकी टैंकर भी शामिल हैं.

ट्रंप का बड़ा दावा

इन सबके बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को दावा किया कि अमेरिका इस युद्ध को पहले ही जीत चुका है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक उनका मिशन पूरी तरह से पूरा नहीं हो जाता, तब तक अमेरिकी सैनिक क्षेत्र में तैनात रहेंगे.

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