[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home World फिर एक्टिव हुए ईरान के अंडरग्राउंड मिसाइल अड्डे! रिपोर्ट का दावा- 69 में से 50 सुरंगें खुलीं, जारी कीं सैटेलाइट तस्वीरें

फिर एक्टिव हुए ईरान के अंडरग्राउंड मिसाइल अड्डे! रिपोर्ट का दावा- 69 में से 50 सुरंगें खुलीं, जारी कीं सैटेलाइट तस्वीरें

0
फिर एक्टिव हुए ईरान के अंडरग्राउंड मिसाइल अड्डे! रिपोर्ट का दावा- 69 में से 50 सुरंगें खुलीं, जारी कीं सैटेलाइट तस्वीरें
ईरान ने सीजफायर के दौरान इन सभी सुरंगों को खोला. फोटो- एक्स (@@Beefeater_Fella).

Iran Underground Missile Bases: अमेरिका और इजरायल की ओर से कई सप्ताह तक किए गए हमलों के बावजूद ईरान की मिसाइल ताकत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. अमेरिका और ईरान के बीच अब तक युद्ध समाप्त करने को लेकर कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ है. 28 फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष अब चौथे महीने में पहुंच चुका है. शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें किसी समझौते को लेकर जल्दबाजी नहीं है. इसी बीच हालिया सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण में दावा किया गया है कि ईरानन ने अपने अधिकांश अंडरग्राउंड मिसाइल ठिकानों तक पहुंच बहाल कर ली है और युद्ध के दौरान क्षतिग्रस्त हुए कई एंट्री पॉइंट्स फिर से खोल दिए हैं.

संघर्ष के दौरान अमेरिका और इजरायल ने ईरान की लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता को खत्म या सीमित करने के टारगेट से कई अंडरग्राउंड मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया था. हमलों में सुरंगों के एंट्री पॉइंट, वहां तक पहुंचने के रास्ते और मिसाइल लॉन्च से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर मेन टारगेट रहे. लगातार बमबारी के कारण कई सुरंगों के मुहाने मलबे से भर गए थे, जबकि उन्हें जोड़ने वाली सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए थे. इसके बाद युद्धविराम लागू होने के बाद ईरान ने मरम्मत और सफाई अभियान शुरू किया.

अंडरग्राउंड मिसाइल भंडार अब भी सुरक्षित होने की आशंका

सीएनएन की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 18 अंडरग्राउंड मिसाइल स्थलों पर किए गए हमलों में 69 सुरंग एंट्री पॉइंट्स प्रभावित हुए थे. इनमें से 50 को ईरान ने साफ कर दोबारा खोल दिया है. सैटेलाइट तस्वीरों में बुलडोजर, लोडर और डंप ट्रक जैसे भारी निर्माण उपकरण मलबा हटाते और रास्ते बहाल करते दिखाई दिए हैं. विश्लेषकों का मानना है कि सुरंगों के एंट्री पॉइंट्स को नुकसान पहुंचाना अपेक्षाकृत आसान होता है, लेकिन पहाड़ों और चट्टानों की कई परतों के नीचे छिपाए गए मिसाइल भंडार को नष्ट करना कहीं अधिक कठिन है.

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की बड़ी संख्या में मिसाइलें जमीन के काफी नीचे सुरक्षित रखी गई थीं, इसलिए माना जा रहा है कि हमलों के बावजूद उनका बड़ा हिस्सा बच गया. विशेषज्ञों का अनुमान है कि ईरान के पास अब भी करीब 1,000 मिसाइलें अंडरग्राउंड सुविधाओं में मौजूद हो सकती हैं. इनमें से कई ठिकाने पिछले दो दशकों में खास तौर पर इस तरह तैयार किए गए थे कि वे हवाई हमलों का सामना कर सकें.

सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा तेज मरम्मत अभियान

युद्धविराम के बाद ली गई नई सैटेलाइट तस्वीरों में कई मिसाइल अड्डों पर बड़े पैमाने पर मरम्मत कार्य दिखाई दिया है. निर्माण दल मलबा हटाने, बमबारी से बने गड्ढों को भरने और क्षतिग्रस्त सड़कों को फिर से तैयार करने में जुटे नजर आए. इस्फहान के पास स्थित एक मिसाइल स्थल पर संघर्ष के दौरान कई बार हमले किए गए थे. बाद की तस्वीरों में वहां डंप ट्रकों और अन्य भारी मशीनों को क्षति की मरम्मत करते और बंद रास्तों को दोबारा खोलते देखा गया.

इसी तरह खोमेन के पास स्थित एक अन्य फैसेलिटी में कम से कम 10 निर्माण वाहन एक साथ काम करते दिखाई दिए. उनका लक्ष्य बंद हो चुके एक सुरंग के एंट्री पॉइंट्स को फिर से चालू करना था. विश्लेषकों का मानना है कि मरम्मत की यह रफ्तार दिखाती है कि साधारण निर्माण उपकरणों की मदद से कई बार अत्याधुनिक सैन्य हमलों के प्रभाव को अपेक्षाकृत कम समय में काफी हद तक सुधारा जा सकता है.

विशेषज्ञ ने क्या कहा?

जेम्स मार्टिन सेंटर फॉर नॉनप्रोलिफरेशन स्टडीज के रिसर्च एसोसिएट सैम लेयर का कहना है कि जब तक ईरान के पास लॉन्चर और उन्हें संचालित करने वाले दल मौजूद हैं, तब तक वह मिसाइल दागने की क्षमता बनाए रख सकता है. उनके मुताबिक, ईरान के पास मौजूद मिसाइलों के भंडार को लॉन्चरों से जोड़ने में कोई बड़ी बाधा नहीं है, इसलिए उसकी मिसाइल क्षमता पूरी तरह समाप्त नहीं मानी जा सकती.

ये भी पढ़ें:- अमेरिका पर बरसे गालिबफ, कहा- अधिकारों से समझौता नहीं, नाकाम होंगे US के मंसूबे

ये भी पढ़ें:- म्यांमार में खनन विस्फोटकों के गोदाम में धमाका, 45 लोगों की मौत, दर्जनों घायल

ट्रंप ने मिसाइल कार्यक्रम को बनाया था बड़ा लक्ष्य

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध के दौरान कई बार सार्वजनिक रूप से कहा था कि ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को कमजोर करना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है. पिछले साल जून 2025 में अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमला किया था. वहीं इस साल मार्च में में भी अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला किया. ट्रंप ने इन हमलों का लक्ष्य ईरान की मिसाइल क्षमता और लॉन्च सिस्टम को नुकसान पहुंचाना घोषित किया था. 

मिसाइल फैसेलिटीज भी रहे निशाने पर

संघर्ष के दौरान अमेरिका और इजरायल ने केवल मिसाइल अड्डों को ही नहीं, बल्कि ईरान के मिसाइल उत्पादन नेटवर्क को भी निशाना बनाया था. हमलों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, रॉकेट प्रोपेलेंट और मिसाइल निर्माण से जुड़ी सुविधाएं शामिल थीं. 8 अप्रैल को युद्धविराम लागू होने के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा था कि ईरान के लिए नष्ट किए गए लॉन्चरों को बदलना और अपने रक्षा उद्योग का पुनर्निर्माण करना आसान नहीं होगा. हालांकि, विभिन्न खुफिया आकलनों से संकेत मिले हैं कि ईरान पहले ही अपनी सैन्य संरचना के कुछ हिस्सों को बहाल करने की दिशा में काम शुरू कर चुका है. 

Previous article बगहा: रील और स्टंट के चक्कर में ‘डेथ ट्रैप’ बनी तिरहुत नहर, पुलिस की बढ़ी चौकसी
Next article सारण के सरयू तट पर उमड़ा आस्था का सैलाब, भव्य पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुआ श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ
Avatar Of Anant Narayan Shukla
अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel