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Home World ईरानी स्पीकर गालिबाफ US की ‘यूएसएस त्रिपोली’ तैनाती पर भड़के, बोले- हमला हुआ तो पछताओगे

ईरानी स्पीकर गालिबाफ US की ‘यूएसएस त्रिपोली’ तैनाती पर भड़के, बोले- हमला हुआ तो पछताओगे

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ईरानी स्पीकर गालिबाफ US की ‘यूएसएस त्रिपोली’ तैनाती पर भड़के, बोले- हमला हुआ तो पछताओगे
तस्वीर में ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ. इमेज सोर्स- एक्स.

Iran Speaker Ghalibaf Warns US: ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने साफ कर दिया है कि अगर उनके देश पर हमला हुआ तो उसका अंजाम बहुत बुरा होगा. वेस्ट एशिया में अमेरिकी सेना की बढ़ती हलचल और ‘USS त्रिपोली’ जहाज पर हजारों अमेरिकी मरीन्स (नौसैनिकों) के पहुंचने की खबरों के बीच गालिबाफ ने चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि ईरान के लोग सुप्रीम लीडर के लीडरशिप में अपने हक की रक्षा करेंगे और दुश्मनों को ऐसा सबक सिखाएंगे कि उन्हें पछताना पड़ेगा.

सोशल मीडिया और ‘सॉफ्ट वॉर’ पर आरोप

गालिबाफ ने एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट कर विरोधियों पर मनोवैज्ञानिक युद्ध या ‘सॉफ्ट वॉर’ छेड़ने का आरोप लगाया है. उनके अनुसार, दुश्मन अपनी इच्छाओं को खबरों की तरह फैलाकर देश का माहौल बिगाड़ना चाहता है. उन्होंने लिखा कि दुश्मन हमारी कौम को डराने के साथ अपनी पसंद की झूठी खबरें फैला रहा है. यह उनकी बड़ी गलती है. अगर वे हमें एक बार मारेंगे, तो उन्हें कई गुना ज्यादा जवाब मिलेगा.

मार्केट मैनिपुलेशन से बचने की सलाह

सोमवार को गालिबाफ ने एक और चेतावनी दी, जिसमें उन्होंने बाजार खुलने से पहले आने वाली ‘फेक न्यूज’ से बचने को कहा. उन्होंने इसे दुश्मनों की एक चाल बताया ताकि वे युद्ध के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव कर मुनाफा कमा सकें. उन्होंने निवेशकों से कहा कि ऐसी खबरों को ‘रिवर्स इंडिकेटर’ की तरह देखें, यानी अगर कोई शेयर को पंप (बढ़ावा) दे रहा है तो उसे बेचें, और अगर गिरा रहा है तो खरीदें.

अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना

गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका का 15-पॉइंट वाला शांति प्रस्ताव केवल एक दिखावा है, जिसके पीछे वे हमले की योजना बना रहे हैं. उन्होंने धमकी दी कि अगर अमेरिकी सैनिक जमीन के रास्ते एंट्री करते हैं, तो उन्हें ‘आग के हवाले’ कर दिया जाएगा. अब ईरान अमेरिका और इजरायल के बीच कोई फर्क नहीं करेगा और क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी बेस IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के निशाने पर होंगे. उन्होंने यह भी साफ किया कि स्ट्रैटेजिक रूप से अहम ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ पर अब पहले जैसा कंट्रोल नहीं रहेगा.

व्हाइट हाउस ने दी चेतावनी

दूसरी ओर, अमेरिकी व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान की नई सरकार की हर बात को परख रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्दे के पीछे जो बातचीत हो रही है, ईरान को उस पर टिके रहना होगा. अगर वे अपनी बात से मुकरते हैं, तो उन्हें उन सैन्य परिणामों का सामना करना पड़ेगा जिनका जिक्र राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही कर चुके हैं.

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‘रीजनेबल’ सरकार पर अमेरिका का रुख

लेविट ने राष्ट्रपति ट्रंप के उस बयान को भी समझाया जिसमें उन्होंने ईरान की नई सरकार को ‘अधिक समझदार’ कहा था. उन्होंने कहा कि ईरान के मौजूदा नेता पिछले नेताओं की तुलना में बातचीत में अधिक संजीदा दिख रहे हैं. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पुराने नेता अब इस दुनिया में नहीं हैं क्योंकि उन्होंने अमेरिका से झूठ बोला था. लेविट के अनुसार, ईरान के पास यह ऐतिहासिक मौका है कि वह अपनी न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाएं छोड़ दे और अमेरिका के साथ डील करे, वरना उसे अमेरिकी सेना की कड़ी कार्रवाई झेलनी होगी.

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