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Home World ईरान में तख्तापलट का डर! राष्ट्रपति-स्पीकर ने अराघची को हटाने की ठानी, क्या IRGC चला रही सरकार?

ईरान में तख्तापलट का डर! राष्ट्रपति-स्पीकर ने अराघची को हटाने की ठानी, क्या IRGC चला रही सरकार?

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ईरान में तख्तापलट का डर! राष्ट्रपति-स्पीकर ने अराघची को हटाने की ठानी, क्या IRGC चला रही सरकार?
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची.

Iran Political Crisis: ईरान इंटरनेशनल के अनुसार, पिछले दो हफ्तों में अराघची ने राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान को भरोसे में लिए बिना कई बड़े फैसले किए हैं. वे सीधे तौर पर IRGC कमांडर अहमद वाहिदी के निर्देशों पर काम कर रहे हैं. इस बात से राष्ट्रपति इतने खफा हैं कि उन्होंने अपने करीबी लोगों से कह दिया है कि अगर अराघची का यही रवैया रहा, तो वे उन्हें जल्द ही बर्खास्त कर देंगे.

परमाणु वार्ता में बढ़ी रार

ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत में भी अंदरूनी कलह सामने आई है. ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट बताती है कि 12 अप्रैल, शनिवार को ईरानी डेलीगेशन को बातचीत बीच में ही छोड़नी पड़ी थी. इसका कारण यह था कि शुक्रवार की मीटिंग में अराघची ने हिजबुल्लाह जैसे संगठनों को मिलने वाली सैन्य और आर्थिक मदद कम करने के संकेत दिए थे. अराघची के इस लचीले रुख पर सुरक्षा परिषद के सचिव और पूर्व IRGC कमांडर मोहम्मद बागेर जोल्गाद्र ने कड़ी आपत्ति जताई थी, जिससे टीम के अंदर मतभेद गहरे हो गए.

अमेरिका का तंज: अपनी मर्जी से डील नहीं कर सकता ईरान

इस विवाद पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ‘फॉक्स न्यूज’ से बातचीत में कहा कि अमेरिकी डेलीगेशन ने महसूस किया कि ईरानी टीम अपनी मर्जी से कोई समझौता नहीं कर सकती. उन्हें हर छोटे-बड़े फैसले के लिए तेहरान से ‘सुप्रीम लीडर’ या किसी और बड़े अधिकारी की मंजूरी लेनी पड़ती है. इधर, 28 मार्च की एक पुरानी रिपोर्ट में भी राष्ट्रपति पेजेश्कियान और कमांडर वाहिदी के बीच युद्ध और गिरती इकोनॉमी को लेकर गंभीर विवाद की बात सामने आई थी.

राष्ट्रपति पेजेश्कियान खुद को लाचार महसूस कर रहे हैं

ईरान इंटरनेशनल की 31 मार्च की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान खुद को लाचार महसूस कर रहे हैं. उन्हें जंग में मारे गए सरकारी अधिकारियों की जगह नई नियुक्तियां करने तक की आजादी नहीं दी जा रही है. कमांडर वाहिदी ने साफ कह दिया है कि युद्ध के हालात को देखते हुए सभी महत्वपूर्ण और संवेदनशील पदों पर नियुक्तियां सीधे रिवोल्यूशनरी गार्ड्स द्वारा ही की जाएंगी.

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गालिबाफ ने बातचीत की टीम से इस्तीफा दे दिया था

संसद में भी फूट साफ दिख रही है. 27 अप्रैल को 261 सांसदों ने गालिबाफ की टीम का समर्थन किया, लेकिन सईद जलीली गुट के कट्टरपंथी सांसदों ने इस पर दस्तखत नहीं किए. इससे पहले खबर आई थी कि न्यूक्लियर एनर्जी के मुद्दे पर फटकार पड़ने के बाद गालिबाफ ने बातचीत की टीम से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद अराघची ने कमान संभालने की कोशिश की और 24 अप्रैल को अकेले इस्लामाबाद जाकर प्रस्ताव सौंपा, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति ने खारिज कर दिया.

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