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Home World ईरान न्यूक्लियर हथियार कभी नहीं चाहता; यह हराम… बोले खामेनेई के प्रतिनिधि, दुनिया के ‘दोगले रवैये’ पर भड़के, चाबहार पर क्या कहा?

ईरान न्यूक्लियर हथियार कभी नहीं चाहता; यह हराम… बोले खामेनेई के प्रतिनिधि, दुनिया के ‘दोगले रवैये’ पर भड़के, चाबहार पर क्या कहा?

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ईरान न्यूक्लियर हथियार कभी नहीं चाहता; यह हराम… बोले खामेनेई के प्रतिनिधि, दुनिया के ‘दोगले रवैये’ पर भड़के, चाबहार पर क्या कहा?

ईरान ने परमाणु हथियारों के लिए अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध तक का रास्ता तय किया. जून 2025 में अमेरिका ने मिडनाइट हैमर नाम के ऑपरेशन के जरिए ईरान की न्यूक्लियर फैसिलिटी पर हमला तक कर दिया. इजरायल ने इन हथियारों को लेकर ईरान पर कितने ही आरोप लगाए, खुफिया और खुले तौर पर कई हमले किए. लेकिन ईरान कभी पीछे नहीं हटा. हालांकि, अब ईरान की ओर से अलग ही बात कही जा रही है. ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं चाहता था, क्योंकि यह ‘हराम’ है. यह बात भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कही. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान परमाणु ऊर्जा का उपयोग शांतिपूर्ण और मानवीय जरूरतों को पूरा करने के लिए करना चाहता है.

ANI को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठनों पर ‘दोहरा मापदंड’ अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं चाहता था, क्योंकि यह हराम है. साथ ही, ईरान सामाजिक और मानवीय उपचार की कुछ जरूरतों के लिए शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा चाहता है. लेकिन दुर्भाग्य से दोहरा मापदंड अपनाया जाता है. कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ईरान पर कई प्रतिबंध लगाए हैं और उसकी परमाणु गतिविधियों की सख्त निगरानी करते हैं, लेकिन कुछ अन्य देशों के पास भी यह क्षमता है, वे इसका इस्तेमाल करते हैं और उनके खिलाफ कुछ नहीं कहा जाता.’

ईरान के मुद्दे पर बंटी दिखे यूएन पॉवर्स

पिछले महीने परमाणु अप्रसार (न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफिरेशन) पर चर्चा के लिए हुई एक बैठक में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ईरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर बंटी-बंटी नजर आई. कुछ देश प्रतिबंधों को फिर से लागू करने के पक्ष में थे, जबकि कुछ सदस्य प्रतिबंधों को स्थायी रूप से हटाने की वकालत कर रहे थे. साथ ही, कुछ देशों ने बैठक की वैधता (लेजिटिमेसी) पर भी सवाल उठाए.

इस विभाजन के केंद्र में 2015 के ईरान परमाणु समझौते जॉइंट कॉम्प्रिहेन्सिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) से जुड़े मुद्दों पर बैठक करने की वैधता को लेकर विवाद था. इस समझौते के तहत ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर सहमति जताई थी, बदले में उस पर लगे प्रतिबंधों में राहत दी जानी थी. ईरान ने यह समझौता संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों (चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका) के साथ-साथ जर्मनी और यूरोपीय संघ (EU) के साथ मिलकर किया था.

भारत के साथ संबंधों को कैसे देखता है ईरान?

कुछ सवालों के जवाब में अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने यह भी कहा कि ईरान और भारत के संबंधों का इतिहास 3,000 साल पुराना है, इस्लाम के उदय से भी सैकड़ों साल पहले का है. उन्होंने कहा कि भारत की गणित, खगोल विज्ञान (स्पेस साइंस) और चिकित्सा के क्षेत्र में उपलब्धियों का अध्ययन ईरान में किया जाता रहा है. ईरान के लोग हमेशा से इन दो प्राचीन सभ्यताओं के रिश्तों के बारे में सीखते रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के सर्वोच्च नेता हमेशा ईरान और भारत के बीच अच्छे संबंध और सहयोग पर जोर देते हैं. मुझे उम्मीद है कि चाबहार में काम अच्छी तरह आगे बढ़ेगा. 

प्रदर्शनों का फायदा उठाने की कोशिश की गई

उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों के कारण ईरान को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और कुछ लोग इससे नाराज हैं. लेकिन कुछ अन्य लोग इस स्थिति का फायदा उठाकर अपने मकसद हासिल करना चाहते हैं. हाल के दिनों में 28 दिसंबर से 18 जनवरी तक ईरान में काफी हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए. ये महंगाई और मुद्रा के अवमूल्यन के खिलाफ शुरू हुए थे, लेकिन फिर सरकार की सत्ता के शिखर पर बैठे सर्वोच्च नेता अयातोल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ भी हो गए. इन विरोध प्रदर्शनों में मारे जाने वालों की संख्या अलग-अलग रिपोर्ट्स में 2500-12000 तक बताई गई है. हालांकि, अब स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है. 

स्थिति नियंत्रण में

उन्होंने कहा कि ईरान की स्थिति को लेकर वास्तविकता और कल्पना के बीच फर्क समझने की जरूरत है. पहली है सच्चाई और वास्तविक स्थिति. दूसरी है कल्पना, जो पत्रकारों की कथाओं, दुश्मनों या अन्य लोगों द्वारा बनाई जाती है. इन दोनों के बीच बहुत गहरा अंतर है.” अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि फिलहाल स्थिति ‘काफी अच्छी है, नियंत्रण में है’ और सोशल मीडिया पर दिखाई जा रही तस्वीर जैसी नहीं है. 

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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