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ईरान के नए सुप्रीम लीडर बने मोजतबा खामेनेई, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने किया ऐलान

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ईरान के नए सुप्रीम लीडर बने मोजतबा खामेनेई, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने किया ऐलान
मोजतबा अली खामेनेई.

Iran Mojtaba Ali Khamenei: ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता का चुनाव कर लिया है. रविवार को असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने मोजतबा अली खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया है. मोजतबा 28 फरवरी को दिवंगत हुए अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे हैं. अली खामेनेई की मौत इजरायल और अमेरिका के साझा हमले में हुई थी.  अली खामेनेई की मौत के बाद ही उन्हें इस पद का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा था. ईरान की मीडिया ने इस बात की जानकारी साझा की. 

मोजतबा खामेनेई, अली खामेनेई के दूसरे सबसे बड़े बेटे हैं. ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने ईरानी जनता से एकजुट रहने और खामेनेई के समर्थन में खड़े होने की अपील की है. मध्यम स्तर के धर्मगुरु मोजतबा खामेनेईका ईरान की सुरक्षा एजेंसियों और अपने विशाल कारोबारी नेटवर्क के लिए जाना जाता है. असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स 88 शिया धर्मगुरुओं की संस्था है, जिसे अली खामेनेई के बाद नए सर्वोच्च नेता का चयन करने की जिम्मेदारी दी गई थी. इसने वोटिंग के जरिए मोजतबा का चुनाव किया.

1979 के बाद तीसरे सुप्रीम लीडर

ईरान में 1979 की ईरानी क्रांति के दौरान शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी को सत्ता से हटा दिया गया था. इसके बाद रूहोल्लाह खुमैनी देश के पहले सुप्रीम लीडर बने. 1989 में उनके निधन के बाद अली खामेनेई ने यह पद संभाला. 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल के हमले में अली खामेनेई की मौत के बाद अब मोजतबा खामेनेई को यह जिम्मेदारी दी गई है.

ईरान की संपूर्ण सत्ता अब मोजतबा के हाथ

56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई एक शिया धार्मिक नेता हैं. उन्हें 2022 में ‘आयतुल्ला’ की उपाधि दी गई थी, जो ईरान का सुप्रीम लीडर बनने के लिए जरूरी मानी जाती है. देश के बड़े फैसलों में अब मोजतबा खामेनेई का निर्णय ही अंतिम होगा. वह सेना और पैरामिलिट्री संगठन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के सर्वोच्च कमांडर भी होंगे. अन्य नीतिगत और देश-विदेश से जुड़े मुद्दों पर भी अंतिम फैसला उन्हीं का होगा, जिसमें ईरान के परमाणु हथियारों से जुड़े निर्णय भी शामिल हैं.

मोजतबा को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का भी समर्थन प्राप्त है. इस संगठन ने उनके प्रति अपनी निष्ठा जताई है. वहीं, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने अपने बयान में कहा कि स्पष्ट बहुमत से मोजतबा को चुना गया है. ईरान की संसद ने भी मोजतबा के चुनाव का स्वागत किया है. उसका कहना है कि नए नेता का समर्थन करना उसकी धार्मिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारी है. ऐसे में माना जा रहा है कि अब ईरान में सत्ता में स्थिरता आ सकती है.

नए लीडर पर भी इजरायल-अमेरिकी हमले का खतरा

ईरान इस समय युद्ध की स्थिति में है. ऐसे में देश को एकजुट रखने के लिए एक मजबूत नेता की जरूरत थी. अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद खाली पड़े इस पद को भरने में ईरान ने करीब 10 दिन का समय लिया. इस दौरान अमेरिका की ओर से लगातार चेतावनियां भी दी जाती रहीं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह कहा था कि वे ईरान के अगले सुप्रीम लीडर के चयन में भूमिका निभाना चाहते हैं. वहीं, इजरायल ने यह भी कहा है कि जो भी नया नेता चुना जाएगा, वह भी निशाने पर होगा.

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ईरान मोजतबा के साथ खड़ा

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी ने देश के नए सुप्रीम लीडर के चयन के लिए असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स का धन्यवाद किया है. उन्होंने कहा कि तेहरान के विरोधियों को उम्मीद थी कि अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान में राजनीतिक संकट पैदा हो जाएगा, लेकिन असेंबली ने समय रहते फैसला लेते हुए मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुन लिया.

मोजतबा का विशाल आर्थिक नेटवर्क

इजरायली मीडिया ने मोजतबा को अपने पिता से भी ज्यादा कट्टर रुख वाला बताया है. उसके मुताबिक, ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई सख्त कार्रवाई के पीछे भी उनकी भूमिका रही है. नवंबर 2019 में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने मोजतबा खामेनेई पर प्रतिबंध लगाए थे. उन पर आरोप था कि वे उस समय के सुप्रीम लीडर का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, जबकि वे किसी सरकारी पद पर चुने या नियुक्त नहीं हुए थे.

अमेरिकी ट्रेजरी के अनुसार, उस समय के सुप्रीम लीडर ने अपनी कुछ जिम्मेदारियां मोजतबा खामेनेई को सौंप दी थीं. मोजतबा, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स-कुद्स फोर्स और बसीज रेजिस्टेंस फोर्स के कमांडरों के साथ मिलकर अपने पिता की क्षेत्रीय रणनीतियों और घरेलू नीतियों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभा रहे थे. यह भी कहा गया है कि मोजतबा खामेनेई के पास लंदन में आलीशान संपत्तियों तक पहुंच है और उनके यूनाइटेड किंगडम, स्विट्जरलैंड और लिकटेंस्टाइन में बैंक खाते भी हैं.

ट्रंप ने कहा था मोजतबा स्वीकार नहीं

हालांकि, युद्ध के बीच ईरान ने अपना नया सुप्रीम लीडर चुन लिया है, लेकिन खतरा अब भी बना हुआ है. सबसे बड़ा जोखिम खुद मोजतबा खामेनेई की सुरक्षा को लेकर माना जा रहा है. अमेरिकी समाचार वेबसाइट एक्सियोस को दिए एक इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वे ईरान के अगले नेता की नियुक्ति में भूमिका चाहते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अली खामेनेई के बेटे का उत्तराधिकारी बनना उन्हें स्वीकार्य नहीं है.

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ट्रंप ने कहा था, ‘वे अपना समय बर्बाद कर रहे हैं. खामेनेई का बेटा एक कमजोर खिलाड़ी है. मुझे नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल होना होगा, जैसा कि वेनेजुएला में डेल्सी रोड्रिगेज के मामले में हुआ था.’ ट्रंप ने मोजतबा खामेनेई को ‘अस्वीकार्य’ बताते हुए कहा कि वे ऐसे नेता को देखना चाहते हैं जो ईरान में ‘सद्भाव और शांति’ ला सके. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अली खामेनेई की नीतियां जारी रहीं तो भविष्य में अमेरिका और ईरान के बीच फिर टकराव हो सकता है.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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