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Home World अमेरिका की 15 सूत्री शांति योजना का ईरान ने उड़ाया मजाक, कहा– युद्ध जारी रहेगा

अमेरिका की 15 सूत्री शांति योजना का ईरान ने उड़ाया मजाक, कहा– युद्ध जारी रहेगा

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अमेरिका की 15 सूत्री शांति योजना का ईरान ने उड़ाया मजाक, कहा– युद्ध जारी रहेगा
डोनाल्ड ट्रंप और इब्राहिम जोल्फाकारी

Iran War @ day 26 : ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के 26 दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शांति प्लान पर जोर दिया है और 15 प्वाइंट में अपनी शर्तें ईरान के सामने रखी हैं. अमेरिका के इस पीस प्लान पर ईरान की जो प्रतिक्रिया आई है, उसमें ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बातचीत के नए दावे को खारिज कर दिया और लड़ाई जारी रखने का वादा किया.

ईरानी मिलिट्री के प्रवक्ता ने उड़ाया डोनाल्ड ट्रंप का मजाक

अल जजीरा के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ शांति प्लान पर जोर दिया, तो ईरानी मिलिट्री के प्रवक्ता ने ट्रंप द्वारा की गई बातचीत के दावों का मजाक उड़ाया. ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, ईरानी मिलिट्री के स्पोक्सपर्सन इब्राहिम जोल्फाकारी ने कहा कि यूनाइटेड स्टेट्स खुद से ही बातचीत कर रहा है. उन्होंने एक वीडियो संदेश में वॉशिंगटन का मजाक उड़ाया. इब्राहिम जोल्फाकारी ने यह सवाल किया कि क्या उनके अंदरूनी झगड़े इस पॉइंट पर पहुंच गए हैं, जहां अमेरिका खुद से ही बातचीत कर रहा है. गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि वॉशिंगटन, ईरान के एक टॉप लीडर से बात कर रहा है, हालांकि वह सुप्रीम लीडर नहीं है.

क्या है ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान के सामने रखी गई 15 सूत्रीय युद्धविराम योजना की पेशकश

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली सरकार ने ईरान के सामने पाकिस्तान की मध्यस्थता से 15-सूत्रीय युद्धविराम योजना की पेश की है. इस बात की पुष्टि पाकिस्तान ने की है. पाकिस्तान ने खुद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में मध्यस्थता की पेशकश की है. यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब अमेरिका की सेना 82वीं एयरबोर्न डिवीजन से कम से कम 1,000 और सैनिकों को तैनात की तैयारी कर रही है ताकि क्षेत्र में पहले से मौजूद करीब 50,000 सैनिकों को और बल मिल सके.

न्यूयॉर्क टाइम्स ने मंगलवार को ही इस बात की पुष्टि कर दी थी कि युद्धविराम के लिए 15-सूत्रीय योजना ईरानी अधिकारियों को सौंप दी गई है. हालांकि इजराइली अधिकारी अमेरिकी प्रशासन द्वारा युद्धविराम योजना सौंपे जाने से हैरान हैं और वे युद्ध को जारी रखना चाहते हैं.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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