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Home World US हमले में परमाणु ठिकाने बर्बाद, मलबे में दफन है यूरेनियम… ईरानी विदेश मंत्री का नया खुलासा

US हमले में परमाणु ठिकाने बर्बाद, मलबे में दफन है यूरेनियम… ईरानी विदेश मंत्री का नया खुलासा

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US हमले में परमाणु ठिकाने बर्बाद, मलबे में दफन है यूरेनियम… ईरानी विदेश मंत्री का नया खुलासा
ईरान के पास लगभग 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम है.

Iran War Nuclear Material: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को देश के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमले में ईरान के न्यूक्लियर ठिकाने पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं. उनका कहना है कि इन जगहों की परमाणु सामग्री (Nuclear Material) फिलहाल मलबे के नीचे दब गई है. उन्होंने कहा कि भविष्य में इसे निकाला जा सकता है, लेकिन अभी यह पहुंच से बाहर है. यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच भीषण जंग चल रही है. 28 फरवरी को दोनों देशों ने मिलकर ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और अन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए भारी अटैक किया. जिसके बाद से मिडिल ईस्ट में भारी तनाव है.

सीबीएस न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में, अराघची ने कहा ‘परमाणु सामग्री मलबे के नीचे है. हमारी परमाणु सुविधाओं पर हमला हुआ और सब कुछ मलबे के नीचे दब गया है.’ अमेरिका ने 28 फरवरी को ही नतांज और पश्चिमी तेहरान और कुछ मिलिट्री टारगेट पर हमला किया था. इस दौरान भारी तबाही मची थी. तब से ईरान लगातार युद्ध में उलझा हुआ है. वह इन ठिकानों के मलबे पर कोई एक्शन नहीं ले पाया है. 

एजेंसी की निगरानी में निकालेंगे

परमाणु विकिरण बड़ा खतरा है. ऐसे में इस मलबे के नीचे से बचे हुए न्यूक्लियर सामग्री को कैसे निकाला जाएगा, यह एक बड़ा सवाल है. अराघची ने कहा, ‘उन्हें निकालने की संभावना है, लेकिन यह एजेंसी की निगरानी में ही किया जा सकता है. अगर कभी हम ऐसा करने का फैसला करते हैं तो यह एजेंसी की निगरानी में ही होगा. लेकिन फिलहाल हमारे पास उन्हें मलबे के नीचे से निकालने का कोई कार्यक्रम या योजना नहीं है.’ यहां अराघची का इशारा अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी की ओर था.

ईरान बातचीत में समझौते पर था तैयार- अराघची

अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु संवर्धन को लेकर इस युद्ध से पहले बातचीत चल रही थी. इसमें ओमान भी मध्यस्थ बना था. अराघची ने कहा कि हालिया तनाव बढ़ने से पहले ईरान अपने उच्च स्तर पर समृद्ध यूरेनियम भंडार को कम करने के लिए तैयार था. अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में दावा किया गया है कि ईरान के पास लगभग 450 किलोग्राम यूरेनियम है. यह पिछले साल हुए हमले के बाद बचा था. अमेरिका और इजरायल संभवतः इसी के पीछे पड़े हैं.

अराघची ने अमेरिका के साथ चल रही बातचीत पर कहा, ‘उस समझौते के प्रस्ताव में ईरान के 60% तक समृद्ध सामग्री के मुद्दे को शामिल किया गया था. हमने वास्तव में प्रस्ताव दिया था कि हम उस समृद्ध सामग्री को पतला करने या कम प्रतिशत में बदलने के लिए तैयार हैं.’ उन्होंने कहा कि यह एक बड़ा प्रस्ताव और बड़ी रियायत थी, ताकि यह साबित किया जा सके कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं चाहता था और न ही भविष्य में चाहता है. लेकिन इस बातचीत के अगले ही दिन अमेरिका और इजरायल ने हमला कर दिया.

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ट्रंप बोले सरेंडर करना चाहता है ईरान, तेहरान का इनकार

हाल ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान बातचीत की टेबल पर है. उन्होंने कहा कि ईरान सरेंडर कर सकता है. लेकिन वहां कोई  लीडरशिप नहीं बचा है, ऐसे में यह नहीं हो पा रहा है. ट्रंप ने कहा कि ईरान युद्ध विराम मांग रहा है. हालांकि, अराघची ने कहा कि ईरान ने कभी सीजफायर नहीं मांगा. उन्होंने कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा के लिए जब तक संभव है तैयार रहेगा. 

अराघची ने मिडिल ईस्ट के देशों पर ईरानी हमले का बचाव किया और कहा कि वह केवल अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है. उन्होंने कहा कि ईरान ने कसम खाई है कि जब तक अमेरिका इस युद्ध को समाप्त नहीं कर देता तेहरान अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा. 

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अमेरिका और इजरायल ने पिछले साल भी किए थे हमले

अमेरिका और इजरायल ने पिछले साल- जून 2025 में भी ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर अटैक किया था. इस दौरान नतांज, इस्फहान और फोर्दो पर बी-2 बॉम्बर जहाज से हमला किया गया था. अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करना चाह रहा है. वहीं उसका एक और लक्ष्य ईरान में सत्ता परिवर्तन का भी है. इसीलिए उसने फरवरी 2026 में देश के सुप्रीम लीडर को निशाना बनाते हुए हमला किया. इसके बाद से ही पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है. 

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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