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Home World हमने नहीं किया… ईरानी राजदूत ने नकारा साउथ कोरिया का दावा, शिप पर मिसाइल अटैक से किया साफ इनकार

हमने नहीं किया… ईरानी राजदूत ने नकारा साउथ कोरिया का दावा, शिप पर मिसाइल अटैक से किया साफ इनकार

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हमने नहीं किया… ईरानी राजदूत ने नकारा साउथ कोरिया का दावा, शिप पर मिसाइल अटैक से किया साफ इनकार
कोरियाई जहाज एचएमएम नामू. इनसेट में हमले के बाद क्षतिग्रस्त शिप. फोटो- एक्स.

Iran South Korea HMM Namu: होर्मुज जलडमरूमध्य में दक्षिण कोरिया के एक व्यापारी जहाज पर हुए हमले को लेकर ईरान और दक्षिण कोरिया के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है. सियोल ने दावा किया है कि हमले में संभवतः ईरान में विकसित एंटी-शिप मिसाइल का इस्तेमाल हुआ, जबकि तेहरान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. दक्षिण कोरिया की समाचार एजेंसी योनहाप के मुताबिक, बुधवार को दक्षिण कोरिया में ईरान के राजदूत सईद कूजेची को विदेश मंत्रालय में बातचीत के लिए बुलाया गया. वहां उन्होंने साफ कहा कि ईरान का इस हमले से कोई लेना-देना नहीं है.

ईरानी राजदूत बोले- हम बिल्कुल शामिल नहीं थे

सईद कूज़ेची ने इंटरप्रेटर (दुभाषिए) के जरिए कहा, ‘ईरान इन सभी आरोपों को खारिज करता है. हम इस हमले में बिल्कुल शामिल नहीं थे.’ उन्होंने दक्षिण कोरियाई जहाज को हुए नुकसान पर अफसोस भी जताया, लेकिन सियोल के निष्कर्षों को गलत बताया. उन्होंने कहा कि इस मामले में ‘फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन’ यानी किसी तीसरे देश द्वारा जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की संभावना को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.

दक्षिण कोरिया ने तकनीकी जांच के आधार पर लगाया आरोप

इससे पहले दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि इस महीने की शुरुआत में होर्मुज जलडमरूमध्य में दक्षिण कोरियाई शिपिंग कंपनी एचएमएम के जहाज ‘एचएमएम नामू’ पर हुए हमले में ईरानी मिसाइल इस्तेमाल होने की आशंका काफी मजबूत है. दक्षिण कोरिया के प्रथम उप विदेश मंत्री पार्क यून-जू ने कहा कि यह निष्कर्ष तकनीकी और फोरेंसिक जांच के बाद निकाला गया. जांच में वारहेड की बनावट, विस्फोट के बाद गैस के मलबे का रंग और बरामद हिस्सों का विश्लेषण किया गया.

कैसे हुआ था हमला?

पार्क यून-जू के मुताबिक, 4 मई को ‘एचएमएम नामू’ पर दो अज्ञात विमानों से हमला किया गया था. उन्होंने बताया कि पहला वारहेड पूरी तरह जल गया, जबकि दूसरा विस्फोट कर गया. शुरुआती हमले से जहाज के इंजन रूम में आग लगी थी और दूसरे धमाके के बाद आग तेजी से पूरे जहाज में फैल गई. जांच में बरामद मलबे के बारे में दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने कहा कि उसमें इस्तेमाल प्रप्लशन सिस्टम ईरानी टर्बोजेट इंजन जैसी दिखता है. कुछ हिस्सों पर ऐसे निशान भी मिले, जिन्हें ईरानी निर्माता से जुड़ा माना जा रहा है.

जहाज को हुआ भारी नुकसान

हमले के समय जहाज पर कुल 24 क्रू सदस्य मौजूद थे. दक्षिण कोरिया के मुताबिक, जहाज के पिछले बाएं हिस्से में करीब 5 मीटर चौड़ा और लगभग 7 मीटर अंदर तक गहरा नुकसान हुआ. घटना के बाद दक्षिण कोरिया ने औपचारिक विरोध दर्ज कराने के लिए ईरानी राजदूत को तलब किया. हालांकि, इससे पहले मई में ही सियोल स्थित ईरानी दूतावास ने भी एचएमएम के जहाज पर हुए हमले से ईरानी सेना का कोई संबंध होने से साफ इनकार किया था.

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डोनाल्ड ट्रंप ने भी लगाया था आरोप

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया था कि ईरान से जुड़े हमलों में दक्षिण कोरियाई मालवाहक जहाज को भी निशाना बनाया गया. उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए सात छोटी नौकाओं को मार गिराया था. यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया से अमेरिका के नेतृत्व वाले समुद्री सुरक्षा अभियान में शामिल होने की अपील की.

फिर भड़क रही युद्ध की चिंगारी

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है. 28 फरवरी 2026 से पहले इस संकरे समुद्री इलाके से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई होती थी. लेकिन ईरान और अमेरिका की नाकेबंदी की वजह से यहां से तेल और गैस का यातायात नहीं हो पा रहा है. दोनों देश फिलहाल 8 अप्रैल से सीजफायर की स्थिति में हैं, लेकिन पिछले 48 घंटे में दोनों देश एक बार फिर से एक दूसरे पर हमले कर चुके हैं. ऐसे में इस इलाके में बढ़ता तनाव एकबार फिर वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ा रहा है.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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