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Home World मौत के 3 महीने बाद अली खामेनेई की अंतिम विदाई की तैयारी, इमाम रजा दरगाह में किया जाएगा दफन, जनाजे में करोड़ों लोग शामिल होंगे

मौत के 3 महीने बाद अली खामेनेई की अंतिम विदाई की तैयारी, इमाम रजा दरगाह में किया जाएगा दफन, जनाजे में करोड़ों लोग शामिल होंगे

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मौत के 3 महीने बाद अली खामेनेई की अंतिम विदाई की तैयारी, इमाम रजा दरगाह में किया जाएगा दफन, जनाजे में करोड़ों लोग शामिल होंगे
ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई. फोटो- एक्स.

Ali Khamenei Funeral: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. अधिकारियों ने उनके सम्मान में तीन दिनों तक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करने और 24 घंटे लंबे जनाजा जुलूस की योजना की घोषणा की है. यह अंतिम विदाई कार्यक्रम उनकी मौत के 3 महीने बाद आयोजित किया जा रहा है. उन्हें मशहद के इमाम रजा दरगाह में दफन किया जाएगा. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के साझा हमले में उनकी मौत हो गई थी. 

राष्ट्रीय स्तर पर चल रही तैयारियां

ईरान की अर्ध सरकारी न्यूज एजेंसी, तस्मीन न्यूज के अनुसार, तेहरान के सांस्कृतिक और सामाजिक मामलों के उपमहापौर मोहम्मद अमीन तवक्कोलीजादेह ने बताया कि अंतिम विदाई, जनाजा और दफन से जुड़े कार्यक्रमों की तैयारियां अंतिम चरण में हैं. उन्होंने कहा कि इन आयोजनों में राष्ट्रीय संस्थानों के साथ-साथ देशभर की नगरपालिकाएं भी सहयोग कर रही हैं. उनके मुताबिक, श्रद्धांजलि कार्यक्रमों के लिए तीन दिनों का विशेष कार्यक्रम तैयार किया गया है, जबकि राजधानी तेहरान में कम से कम 24 घंटे तक जनाजा जुलूस निकाले जाने की योजना है. 

अंतिम श्रद्धांजलि स्थल पर फैसला बाकी

अधिकारियों के अनुसार, श्रद्धांजलि समारोह के लिए स्थान को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. इसके लिए तेहरान के मुसल्ला (ग्रैंड प्रेयर्स हॉल) और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के संस्थापक इमाम खुमैनी के मकबरे के बीच विचार-विमर्श चल रहा है. प्रशासन का कहना है कि जल्द ही अंतिम स्थल की घोषणा कर दी जाएगी. अमूमन किसी की मौत के बाद तुरंत ही अंतिम संस्कार किया जाता है, लेकिन ईरान जंग की वजह से उनके जनाजे में इतनी देरी हो रही है.

तेहरान के बाद कुम और मशहद ले जाया जाएगा पार्थिव शरीर

तवक्कोलीजादेह ने बताया कि तेहरान में कार्यक्रम समाप्त होने के बाद अयातुल्ला खामेनेई के पार्थिव शरीर को पहले पवित्र शहर कुम ले जाया जाएगा. वहां श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होने के बाद पार्थिव शरीर को मशहद पहुंचाया जाएगा, जहां अंतिम चरण के आयोजन संपन्न होंगे.

इमाम रजा की दरगाह में होगा अंतिम संस्कार

अधिकारियों की सिफारिशों के आधार पर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम विश्राम स्थल के रूप में मशहद स्थित इमाम रजा की पवित्र दरगाह को चुना गया है. बताया गया है कि उत्तर-पूर्वी ईरान के इस धार्मिक शहर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि तेहरान में इस अंतिम यात्रा में करीब दो करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं. 

विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद

ईरानी अधिकारियों का अनुमान है कि मशहद में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हो सकते हैं. खासतौर पर पाकिस्तान, अफगानिस्तान, भारत, बांग्लादेश और कश्मीर क्षेत्र से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रहने की संभावना जताई गई है.

श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था

तवक्कोलीजादेह ने बताया कि अस्तान कुद्स रजवी संगठन और खुरासान रजवी प्रांत में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने श्रद्धालुओं के स्वागत और अंतिम संस्कार कार्यक्रमों के संचालन के लिए विशेष व्यवस्थाएं तैयार की हैं. अधिकारियों का कहना है कि लाखों लोगों की संभावित मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा, आवास, यातायात और अन्य सुविधाओं के लिए व्यापक प्रबंधन किया जा रहा है, ताकि श्रद्धांजलि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सकें.

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मोजतबा खामेनेई ने संभाली कमान

86 साल के दिवंगत अयातुल्ला अली खामेनेई ने 37 साल तक ईरान का शासन संभाला. उन्होंने अगस्त 1989 से फरवरी 2026 तक ईरान से इस्लामिक तंत्र को एक धुरी पर बनाए रखा. उनके बाद उनके बेटे मोजतबा अली खामेनेई को ईरान का सुप्रीम लीडर चुना गया है. अमेरिका और ईरान के हमले में उनके भी घायल होने की खबरें सामने आई थीं. हालांकि, 28 फरवरी से शुरू हुई इस  ईरान जंग के बाद से वह सार्वजनिक रूप से कहीं नजर नहीं आए हैं. 

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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