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Home World ईरान का आरोप: US-इजरायल से हो रहे अरब देशों पर अटैक, यूज कर रहे नकली शाहेद ड्रोन

ईरान का आरोप: US-इजरायल से हो रहे अरब देशों पर अटैक, यूज कर रहे नकली शाहेद ड्रोन

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ईरान का आरोप: US-इजरायल से हो रहे अरब देशों पर अटैक, यूज कर रहे नकली शाहेद ड्रोन
नकली शाहेद ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं अमेरिका-इजरायल.

Iran War US False Drone Attack: मिडिल ईस्ट में 28 फरवरी 2026 को जंग शुरू हुई, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के ऊपर एयरस्ट्राइक की. इस हमले के तुरंत बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की. इजरायल और मिडिल ईस्ट के देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाते हुए उसने युद्ध का दायरा बढ़ा दिया. हालांकि, अब ईरान ने अमेरिका और इज़रायल पर आरोप लगाया है. ईरान का दावा है कि उसके ड्रोन की कॉपी बनाकर मिडिल ईस्ट के देशों के नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले के लिए किया जा रहा है, ताकि जानबूझकर इसका आरोप इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान पर लगाया जा सके.

रविवार को ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर प्रेस टीवी पर खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता ने अपना बयान दिया. उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर आरोप लगाया है कि वे ईरान के शाहेद-136 ड्रोन के रीब्रांडेड संस्करण ‘लुकास’ का इस्तेमाल कर फॉल्स-फ्लैग अभियान चला रहे हैं.

अपने आधिकारिक बयान में प्रवक्ता ने कहा कि सैन्य चुनौतियों का सामना करने और तेहरान के खिलाफ राजनीतिक गठबंधन बनाने में विफल रहने के बाद दुश्मन अब धोखे और भ्रामक रणनीतियों का सहारा ले रहा है.

बयान के अनुसार, इन गतिविधियों का उद्देश्य ‘संदेह पैदा करना और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान पर आरोप लगाना’ है, साथ ही तेहरान और उसके क्षेत्रीय साझेदारों के बीच संबंधों को नुकसान पहुंचाना भी है.

प्रवक्ता ने हाल ही में पड़ोसी देशों जैसे तुर्किये, कुवैत और इराक में हुई कई ‘संदिग्ध हमलों’ का भी जिक्र किया. उनका कहना था कि पश्चिमी मीडिया और शत्रुतापूर्ण ताकतों ने गलत तरीके से इन घटनाओं के लिए ईरानी बलों को जिम्मेदार ठहराया है.

ईरान के अटैक केवल अमेरिका और इजरायल पर

उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि ईरान की सैन्य गतिविधियां अत्यंत अनुशासित हैं और केवल विशिष्ट लक्ष्यों तक सीमित रहती हैं. प्रवक्ता ने कहा, ‘जैसा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान कई बार घोषित कर चुका है, वह केवल यूनाइटेड स्टेट्स और जायनिस्ट शासन (इजरायल) के ठिकानों, केंद्रों और हितों को निशाना बनाता है, और जिस भी स्थान को निशाना बनाता है उसकी जिम्मेदारी आधिकारिक बयान जारी कर स्वीकार करता है.’

प्रेस टीवी द्वारा प्रसारित इस बयान में क्षेत्रीय देशों से अधिक सहयोग की अपील भी की गई. इसमें कहा गया, ‘जरूरी है कि हम एक-दूसरे पर भरोसा करें और एकता व सहयोग बनाए रखकर आक्रामक दुश्मन को इन चालों और खतरनाक व्यवहारों से रोकें.’

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ईरान ने ब्रिटेन सरकार के बयान का दिया हवाला

यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब संघर्ष के दौरान मिडिल ईस्ट के कई देशों के आवासीय इलाकों और राजनयिक ठिकानों पर कई ड्रोन हमले हुए हैं. तेहरान लगातार यह कहता रहा है कि गैर-सैन्य लक्ष्यों पर हुए हमलों में उसका कोई हाथ नहीं है.

इस दावे के समर्थन में प्रवक्ता ने 3 मार्च को यूनाइटेड किंगडम के रक्षा मंत्रालय की पुष्टि का हवाला दिया. इसमें कहा गया था कि साइप्रस में स्थित आरएएफ अक्रोतिरी एयरबेस पर हमला करने वाला ड्रोन ईरान से लॉन्च नहीं किया गया था.

अराघची ने भी लगाया आरोप

इसके अलावा अब्बास अराघची के पहले दिए गए बयान का भी उल्लेख किया गया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि इजरायल ने अजरबैजान में ड्रोन हमलों को अंजाम देकर तेहरान के विदेशी संबंधों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की.

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ताजा घटना शनिवार को इराकी कुर्दिस्तान क्षेत्र में स्थित लानाज रिफाइनरी पर हुए हमले की है. ईरानी सैन्य सूत्रों ने कहा है कि इस हमले का ईरान या उसके सहयोगियों से कोई संबंध नहीं है.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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