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Home World खामेनेई के दफ्तर पर हुए हमले से जिंदा निकले थे अराघची, खुद सुनाया किस्सा; बोले- 2 दिन तक सुप्रीम लीडर का पता नहीं चला

खामेनेई के दफ्तर पर हुए हमले से जिंदा निकले थे अराघची, खुद सुनाया किस्सा; बोले- 2 दिन तक सुप्रीम लीडर का पता नहीं चला

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खामेनेई के दफ्तर पर हुए हमले से जिंदा निकले थे अराघची, खुद सुनाया किस्सा; बोले- 2 दिन तक सुप्रीम लीडर का पता नहीं चला
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया था, जिसमें अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हुई थी.

Iran Abbas Araghchi Ali Khamenei Office: अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के कार्यालय पर हुए हमले को लेकर विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने दावा किया कि हमले के समय वह उसी इमारत में मौजूद थे और विस्फोट के बाद मलबे के बीच से बाहर निकलने में सफल रहे. अराघची ने कहा कि उस समय उनकी सबसे बड़ी चिंता खुद की नहीं, बल्कि अली खामेनेई की सुरक्षा को लेकर थी. लेबनान के टीवी चैनल अल-मयादीन को दिए एक विशेष इंटरव्यू में अराघची ने संघर्ष के शुरुआती दिनों की घटनाओं का विस्तार से जिक्र किया. 

हमले के बाद दो दिन तक अनिश्चितता में रहे

ईरानी मीडिया प्रेस टीवी ने भी इसे रिपोर्ट किया, जिसमें अराघची ने कहा, ’28 फरवरी को संघर्ष के शुरुआती घंटों में जब अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालय पर हमला हुआ, तब मैं वहीं मौजूद था. मेरी पहली सोच और मेरी पहली चिंता नेता की स्थिति को लेकर थी.’ उन्होंने बताया कि हमले के बाद स्थिति बेहद अराजक थी और कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए थे.

विदेश मंत्री ने कहा कि अगले दो दिनों तक उन्हें यह स्पष्ट नहीं था कि खामेनेई किस स्थिति में हैं. इस दौरान उनका पूरा ध्यान लोगों को सुरक्षित निकालने और आपातकालीन व्यवस्थाओं पर केंद्रित रहा. उन्होंने यह भी बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने कई बार खामेनेई को सुरक्षित स्थान या बंकर में जाने की सलाह दी थी, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया.

‘जब तक जनता सुरक्षित नहीं, मैं भी नहीं जाऊंगा’

अराघची ने दावा किया कि अली खामेनेई का मानना था कि यदि आम ईरानी नागरिकों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध नहीं है तो वह स्वयं भी किसी विशेष सुरक्षा व्यवस्था का लाभ नहीं लेंगे. विदेश मंत्री के मुताबिक, खामेनेई ने कहा था कि जो कुछ देश की जनता के साथ होगा, वही उनके साथ भी होना चाहिए. अराघची ने युद्ध के दौरान खामेनेई की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि खतरे के बावजूद वह लगातार सरकारी कामकाज और रणनीतिक फैसलों की निगरानी करते रहे.

खाड़ी देशों को पहले ही दी थी चेतावनी

इंटरव्यू में अराघची ने यह भी कहा कि संघर्ष तेज होने से पहले उन्होंने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों का दौरा किया था. उन्होंने कहा कि हमने साफ कर दिया था कि अगर ईरान पर हमलों के लिए अमेरिकी सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल किया गया तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी.

उनके मुताबिक, क्षेत्रीय देशों ने अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए किए जाने का समर्थन नहीं किया था, लेकिन अमेरिका ने अपनी रणनीति जारी रखी. अराघची ने अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा कि यदि पड़ोसी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डे नहीं होते तो वे ईरान की जवाबी कार्रवाई का निशाना भी नहीं बनते.

‘ईरान की प्रतिक्रिया ने विरोधियों को चौंकाया’

विदेश मंत्री ने दावा किया कि ईरान की सैन्य प्रतिक्रिया की तीव्रता ने उसके विरोधियों को आश्चर्यचकित कर दिया. उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू समेत कई लोगों ने इतनी तेज और तत्काल प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं की थी. अराघची के अनुसार, बड़े पैमाने पर हमले झेलने के बावजूद ईरान ने बहुत कम समय में जवाब दिया, जिसने विरोधी पक्ष की रणनीतिक गणनाओं को प्रभावित किया.

मोजतबा खामेनेई के पास है पूरी कमान

ईरान के नेतृत्व परिवर्तन पर पूछे गए सवालों के जवाब में अराघची ने कहा कि अब मोजतबा खामेनेई देश के सर्वोच्च नेतृत्व की पूरी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि मोजतबा खामेनेई का शासन व्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों पर मजबूत प्रभाव है तथा राज्य की बागडोर पूरी तरह उनके नियंत्रण में है. अराघची ने कहा कि नए सर्वोच्च नेता के साथ लगातार संवाद बना हुआ है. उनके निर्देश नियमित रूप से अधिकारियों तक पहुंचाए जा रहे हैं. उनके मुताबिक, नेतृत्व परिवर्तन के बाद भी व्यवस्था में कोई रुकावट नहीं आई है.

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28 फरवरी से मिडिल ईस्ट में शुरू हुई जंग

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नामक संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया. इस अभियान में ईरान के परमाणु ठिकानों, मिसाइल अड्डों, वायु-रक्षा प्रणालियों और शीर्ष सैन्य नेतृत्व को निशाना बनाया गया. इस हमले में तेहरान सहित कई शहरों में विस्फोट हुए. 

इन्ही हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ सैन्य एवं सुरक्षा अधिकारियों के मारे जाने की खबरें सामने आईं. इजरायल ने दावा किया कि उसके लगभग 200 लड़ाकू विमानों ने सैकड़ों लक्ष्यों पर हमला किया, जबकि अमेरिका ने भी मिसाइल और हवाई हमलों में भाग लिया.

हमलों के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू की, जिसे उसने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस IV’ नाम दिया. ईरान ने इजरायल के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों की सैन्य सुविधाओं पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए. बहरीन, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और इराक के कुछ हिस्सों में हवाई हमले की घटनाएँ दर्ज की गईं. 

इस दिन से शुरू हुआ संघर्ष आगे चलकर 2026 के ईरान युद्ध में बदल गया, जिसके कारण पूरे मध्य-पूर्व में तनाव, आर्थिक प्रभाव और बड़े पैमाने पर जनहानि हुई. इसने पूरी दुनिया में आर्थिक संकट और जियो पॉलिटिकल टेशन को भी पैदा कर दिया, जो अब तक जारी है. फिलहाल 8 अप्रैल से दोनों पक्षों (अमेरिका और ईरान) के बीच सीजफायर चल रहा है, लेकिन आए दिन भड़काऊ बयानबाजी और छिटपुट हमले कब दोबारा युद्ध का रुख अख्तियार कर लें, कहा नहीं जा सकता. 

ANI के इनुपुट के साथ.

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अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.
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